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फोन की स्क्रीन को छूने पर वह उंगली को कैसे पहचानती है?

How Touchscreen Works: इसके पीछे एक बेहद दिलचस्प टेक्नोलॉजी काम करती है जिसे Capacitive Touchscreen कहा जाता है.

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  • कैपेसिटिव टचस्क्रीन इलेक्ट्रिकल सिग्नल और बदलाव महसूस करती है।
  • उंगली छूने पर शरीर के विद्युत प्रभाव से कैपेसिटेंस बदलती है।
  • टच कंट्रोलर इन्हीं बदलावों को मापकर सटीक स्थान पहचानता है।
  • मल्टी-टच कई उंगलियों की हरकतों को कुशलता से ट्रैक करता है।

How Touchscreen Works: आज के स्मार्टफोन में स्क्रीन सिर्फ फोटो दिखाने का काम नहीं करती बल्कि हमारी उंगलियों के हर टच को समझकर तुरंत रिएक्शन भी देती है. हम स्क्रीन पर टैप करते हैं, स्वाइप करते हैं, दो उंगलियों से फोटो को जूम करते हैं और स्क्रीन पर लिख भी सकते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर फोन को कैसे पता चलता है कि स्क्रीन पर उंगली कहां रखी गई है? आइए जानते हैं इसके पीछे की पूरी टेक्नोलॉजी.

क्या है टेक्नोलॉजी

जानकारी के अनुसार, इसके पीछे एक बेहद दिलचस्प टेक्नोलॉजी काम करती है जिसे Capacitive Touchscreen कहा जाता है. दरअसल, स्मार्टफोन की स्क्रीन को बाहर से देखने पर ये एक ही सर्फेस दिखाई देती है लेकिन इसके अंदर कई लेयर होती हैं. इनमें डिस्प्ले पैनल के साथ एक टच-सेंसिंग लेयर भी मौजूद होती है.

ये लेयर बेहद छोटे इलेक्ट्रिकल सिग्नल और अंदर होने वाले पार्ट्स के बदलाव को महसूस कर सकती है. जब आप स्क्रीन को छूते हैं तो आपकी उंगली इस सिस्टम में कुछ बदलाव पैदा करती है और फोन उसी बदलाव को टच के रूप में पहचान लेता है.

कैसे उंगली स्क्रीन पर असर डालती है?

आपको बता दें कि ज्यादातर एडवांस स्मार्टफोन में कैपेसिटिव टच टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है. स्क्रीन की टच लेयर में बेहद पतली और ट्रांसपेरेंट इलेक्ट्रोड की ग्रिड होती है. इन इलेक्ट्रोड के आसपास एक छोटा इलेक्ट्रिकल फील्ड बना रहता है.

मान लीजिए स्क्रीन पर सैकड़ों छोटे-छोटे सेंसर पॉइंट मौजूद हैं. जब आप स्क्रीन को नहीं छूते तो सिस्टम में एक नॉर्मल इलेक्ट्रिकल कंडिशन में बना रहता है. जैसे ही आपकी उंगली स्क्रीन के पास आती है या उसे छूती है, वहां की कंडिशन बदलने लगती है.

इंसान के शरीर से पड़ता है फर्क

जानकारी के लिए बता दें कि यहां सबसे दिलचस्प भूमिका इंसान के शरीर की होती है. दरअसल, ह्यूमन बॉडी में इलेक्ट्रिकल पावर होती है. हमारा शरीर इलेक्ट्रिकल चार्ज को प्रभावित कर सकता है. उंगली स्क्रीन के इलेक्ट्रिकल फील्ड के कॉन्टेक्ट में आने पर वहां की capacitance में बदलाव आता है.

टच कंट्रोलर इस बदलाव को महसूस करता है. इसके बाद वह ये पता लगाने की कोशिश करता है कि जो बदलाव हुआ है वो स्क्रीन के किस हिस्से में हुआ है. यानी फोन आपकी उंगली को कैमरे की तरह देखकर नहीं पहचानता है. बल्कि ये डिवाइस में होने वाले इलेक्ट्रिकल बदलाव को मापकर ये समझता है कि स्क्रीन को छुआ गया है.

फोन को कैसे पता चलता है कि आपने कहां Touch किया?

दरअसल, स्मार्टफोन की टचस्क्रीन में इलेक्ट्रोड एक तरह का नेटवर्क बनाते हैं. जब उंगली किसी खास जगह पर आती है तो उस एरिया के आसपास इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदलाव दिखाई देता है.

टच कंट्रोलर इन बदलावों को पढ़कर एक अंदाजा लगाता है कि टच की क्या कंडिशन है. इसके बाद ये जानकारी स्मार्टफोन के प्रोसेसर और ऑपरेटिंग सिस्टम तक पहुंचती है.

जैसे आपने स्क्रीन के नीचे बाईं ओर किसी ऐप के आइकन पर टैप किया. टच सिस्टम उस जगह के X और Y coordinates का पता लगाता है. ऑपरेटिंग सिस्टम समझता है कि उस जगह मौजूद ऐप के आइकन को दबाया गया है और फिर ऐप खुल जाता है.

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स्मार्टफोन, गैजेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और इंटरनेट टेक्नोलॉजी की दुनिया में मेरा इंटरेस्ट काफी ज्यादा है. मैं यानी हिमांशु तिवारी, ABP LIVE में टेक और डिजिटल सेक्शन का हिस्सा हूं. मैं नई टेक्नोलॉजी को आसान और दिलचस्प अंदाज में पाठकों तक पहुंचाने का काम करता हूं. स्मार्टफोन लॉन्च, वायरल टेक ट्रेंड्स, AI अपडेट्स, सोशल मीडिया फीचर्स और साइबर फ्रॉड जैसे विषयों पर मेरी पकड़ मजबूत है.

टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों को सिर्फ जानकारी तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें आम लोगों की जरूरत और रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर पेश करता हूं. खासतौर पर ऐसी खबरों पर काम करना पसंद करता हूं, जो लोगों के डिजिटल एक्सपीरियंस को सीधे प्रभावित करती हैं.

इसके अलावा मुझे नई टेक्नोलॉजी एक्सप्लोर करना, स्मार्टफोन फीचर्स को समझना और डिजिटल ट्रेंड्स पर रिसर्च करना पसंद है. मैं आसान भाषा और आकर्षक अंदाज में लिखने के लिए जाना जाता हूं, जिससे कठिन टेक्निकल बातें भी पाठकों के लिए समझना आसान हो जाती हैं. मैंने परास्नातक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की है.

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