iPhone में मिलेगा Photo Authentication फीचर! जानें कैसे मिलेगा फायदा
Apple Photo Authentication Feature: iOS 27 के लेटेस्ट बीटा वर्जन में ऐसे संकेत मिले हैं जो कंपनी के नए फोटो ऑथेंटिकेशन सिस्टम की ओर इशारा करते हैं.

- फोटो लेते समय 'Reference Mode' सक्रिय करना अनिवार्य होगा।
Apple Photo Authentication Feature: एप्पल के डिवाइसेज को पूरी दुनिया में खूब पसंद किया जाता है. देश में एप्पल आईफोन का युवाओं में खास क्रेज देखने को मिलता है. बता दें कि एप्पल के डिवाइस को उनमें मिलने वाले बेहतरीन फीचर्स की वजह से ज्यादा पसंद किया जाता है. कंपनी समय-समय पर डिवाइसेज के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट पेश करती रहती है जिसमें कुछ नए फीचर्स ऐड किए जाते हैं.
इसी कड़ी में बता दें कि कंपनी जल्द ही अपने नए अपडेट में एक खास फीचर यूजर्स के लिए पेश करने की तैयारी में है. जानकारी के अनुसार, इस फीचर का नाम Apple Reference Image हो सकता है. आइए जानते हैं पूरी जानकारी.
क्या है Apple Reference Image?
दरअसल, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, iOS 27 के लेटेस्ट बीटा वर्जन में ऐसे संकेत मिले हैं जो कंपनी के नए फोटो ऑथेंटिकेशन सिस्टम की ओर इशारा करते हैं. माना जा रहा है कि कंपनी इस फीचर को Apple Reference Image के नाम से पेश कर सकती है.

इसके अलावा माना जा रहा है कि इस फीचर का मकसद किसी भी फोटो के सोर्स के बारे में जानकारी देना हो सकता है. इससे ये साफ होता है कि अब ये जानना आसान हो जाएगा कि फोटो आईफोन से ली गई है या फिर एआई से बनी हुई है या फिर किसी दूसरे सोर्स से ली गई है. हालांकि, अभी ये फीचर बीटा टेस्टिंग फेज में है और Apple की ओर से भी इसको लेकर कोई आधिकारीक जानकारी शेयर नहीं की गई है.
AI फोटो की पहचान से थोड़ा अलग होगा तरीका
जानकारी के लिए बता दें कि अभी AI से बने कंटेंट की पहचान के लिए कई कंपनियां डिजिटल वॉटरमार्किंग जैसी टेक्नोलॉजी पर काम कर रही हैं. उदाहरण के लिए बता दें कि AI से बनाई गई तस्वीर में ऐसे डिजिटल हिंट्स ऐड किआ जा सकते हैं जिनसे बाद में ये पता चलेगा कि फोटो एआई से बनाई गई है या नहीं.
Apple भी अपने AI इमेज टूल्स के साथ इसी तरह की टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है. दूसरी तरफ Google अपने SynthID सिस्टम के जरिए AI से बने कंटेंट की पहचान और वॉटरमार्किंग को आगे बढ़ा रहा है. लेकिन Reference Image का तरीका इससे थोड़ा अलग होगा.
कैसे होगी फोटो की जांच?
जानकारी के अनुसार, किसी फोटो को वेरिफाई करने के लिए उसके कैमरा सेंसर से जुड़ी जानकारी और मेटाडेटा का इस्तेमाल किया जाता है. ये जानकारी Apple के Private Cloud Compute सिस्टम को भेजी जा सकती है जहां फोटो के सोर्स की जांच की जाएगी.
बता दें कि इस प्रोसेस का मकसद फोटो के कंटेंट को केवल देखकर फैसला करना नहीं बल्कि उससे जुड़े टेक्निकल चीजों के आधार पर ये पता लगाना होगा कि फोटो असल में iPhone कैमरे से कैप्चर हुई है या नहीं.
हालांकि, इसके लिए iPhone कैमरा में एक नया Reference Mode एक्टिवेट करना जरूरी होगा है. इसका मतलब ये हुआ कि अगर यूजर को फोटो की पूरी जानकारी लेनी है तो फोटो लेते समय उसे इस मोड को एक्टिवेट करना जरूरी होगा.

बताते चलें कि आज AI की मदद से फोटो बनाना और किसी फोटो में बदलाव करना पहले के मुकाबले काफी आसान हो गया है. अब एआई कुछ ही सेकेंड में ऐसी फोटो तैयार कर देता है जिसे देखकर ये बताना मुश्किल हो जाता है कि इसे कैमरे से लिया गया है कि एआई से बनाया गया है.
इसी वजह से आज के समय में किसी फोटो की असल पहचान कर पाना काफी मुश्किल हो चुका है. सोशल मीडिया पर भी ऐसी कई वायरल फोटो देखने को मिलती हैं जिन्हें असली बताया जाता है लेकिन बाद में वो एआई से बनी पाई जाती हैं.
अब अगर Apple का ये सिस्टम सही तरीके से काम करता है तो किसी फोटो के बारे में ये एक्सट्रा जानकारी मिल सकती है कि वह असल में iPhone कैमरे से कैप्चर की गई थी या नहीं.
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