ब्रिटेन में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर Google पर सवाल! भारत के लिए क्यों है यह बड़ा खतरे का संकेत?
Social Media in Britain: Ofcom के मुताबिक, लंबे समय से चेतावनियां मिलने के बावजूद दोनों कंपनियों ने कोई बड़ा और प्रभावी बदलाव लागू नहीं किया.

- Meta, Snap, Roblox ने बच्चों की सुरक्षा के लिए नए नियम लागू किए।
Social Media in Britain: ब्रिटेन की मीडिया रेगुलेटर संस्था Ofcom ने हाल ही में TikTok और Google के स्वामित्व वाले YouTube की कड़ी आलोचना की है. रेगुलेटर का आरोप है कि इन प्लेटफॉर्म्स ने बच्चों को खतरनाक और नुकसानदायक ऑनलाइन कंटेंट से बचाने के लिए अब तक पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं. खासतौर पर उन एल्गोरिद्म्स को लेकर चिंता जताई गई है जो बच्चों को लगातार ऐसा कंटेंट दिखाते रहते हैं जो उनकी मानसिक सुरक्षा और व्यवहार पर बुरा असर डाल सकता है.
Ofcom के मुताबिक, लंबे समय से चेतावनियां मिलने के बावजूद दोनों कंपनियों ने कोई बड़ा और प्रभावी बदलाव लागू नहीं किया. बच्चों तक हिंसक, गलत जानकारी वाला या मानसिक रूप से नुकसान पहुंचाने वाला कंटेंट आसानी से पहुंच रहा है और प्लेटफॉर्म्स की सिफारिश प्रणाली इसे और बढ़ा रही है.
YouTube और TikTok ने क्या कहा?
आलोचनाओं के बाद YouTube ने अपना बचाव करते हुए कहा कि वह बच्चों के लिए सुरक्षित और उम्र के हिसाब से उपयुक्त अनुभव देने वाला अग्रणी प्लेटफॉर्म है. कंपनी के अनुसार, वह चाइल्ड सेफ्टी एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि परिवारों को बेहतर सुरक्षा मिल सके.
वहीं TikTok ने भी Ofcom की टिप्पणियों पर नाराजगी जताई. कंपनी का कहना है कि रेगुलेटर ने उसके पुराने और नए सुरक्षा फीचर्स को नजरअंदाज किया है जबकि प्लेटफॉर्म लगातार बच्चों की सुरक्षा के लिए काम कर रहा है.
दूसरी कंपनियां पहले ही सख्त कदम उठा चुकी हैं
मामला इसलिए और गंभीर हो गया है क्योंकि कई बड़ी टेक कंपनियां पहले ही ब्रिटेन में बच्चों की सुरक्षा को लेकर नए नियमों को अपनाने पर सहमत हो चुकी हैं. Meta अब किशोर यूजर्स के अकाउंट्स के लिए अतिरिक्त सुरक्षा कंट्रोल जोड़ रही है और संदिग्ध चैट्स पकड़ने के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल कर रही है.
Snapchat की मालिक Snap ने तय किया है कि अब डिफॉल्ट रूप से कोई भी अजनबी वयस्क सीधे बच्चों से संपर्क नहीं कर पाएगा. गेमिंग प्लेटफॉर्म Roblox ने भी घोषणा की है कि 16 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए माता-पिता डायरेक्ट मैसेजिंग फीचर बंद कर सकेंगे.
चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए
Ofcom की रिपोर्ट में कुछ बेहद चिंताजनक आंकड़े भी सामने आए हैं. ब्रिटेन में लगभग 67 प्रतिशत बच्चे YouTube इस्तेमाल करते हैं, जबकि करीब 60 प्रतिशत बच्चे TikTok पर सक्रिय हैं. सबसे बड़ा खुलासा यह रहा कि 8 से 12 साल की उम्र के लगभग 84 प्रतिशत बच्चे उन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का उपयोग कर रहे हैं, जहां आधिकारिक तौर पर न्यूनतम उम्र 13 साल तय की गई है.
रेगुलेटर का मानना है कि मौजूदा कानून इतने मजबूत नहीं हैं कि कंपनियों को नाबालिग यूजर्स को प्लेटफॉर्म से दूर रखने के लिए मजबूर किया जा सके. इसी वजह से अब सख्त कानूनों की मांग तेज हो रही है.
भारत को इस चेतावनी को हल्के में नहीं लेना चाहिए
भारत में भी स्थिति बहुत अलग नहीं है. Instagram, Facebook, X, Snapchat और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लाखों बच्चे रोजाना सक्रिय रहते हैं. इन प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे लोग भी मौजूद हैं जो बच्चों को गलत तरीके से निशाना बनाते हैं, उनका पीछा करते हैं या उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित करने की कोशिश करते हैं.
दुनिया के कई देश अब इस खतरे को गंभीरता से लेने लगे हैं. ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने जैसा बड़ा कदम उठाया है. वहीं यूरोपीय संघ ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा बढ़ाने के लिए एज वेरिफिकेशन ऐप शुरू किया है. भारत में भी बच्चों के लिए सख्त सोशल मीडिया नियमों पर चर्चा बढ़ रही है लेकिन अब तक कोई बड़ा फैसला सामने नहीं आया है.
बिना उम्र जांच के सोशल मीडिया इस्तेमाल कर रहे करोड़ों बच्चे
भारत में बड़ी संख्या में बच्चे रोजाना YouTube Shorts, Instagram Reels और दूसरे शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करते हैं. समस्या यह है कि ज्यादातर ऐप्स पर उम्र की सही जांच नहीं होती. बच्चे आसानी से गलत उम्र दर्ज करके अकाउंट बना लेते हैं और फिर उन्हें ऐसा कंटेंट देखने को मिलता है जो उनके लिए सुरक्षित नहीं होता.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते मजबूत नियम और तकनीकी सुरक्षा उपाय लागू नहीं किए गए, तो आने वाले वर्षों में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा भारत के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है.
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Source: IOCL

























