Deepfake से लेकर AI रील्स तक! Instagram के लिए खतरे की घंटी, CEO ने किया खुलासा
Instagram AI Content: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जिस रफ्तार से इंटरनेट की दुनिया बदल रहा है उसी तेजी से Instagram भी अपने सबसे बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है.

Instagram AI Content: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जिस रफ्तार से इंटरनेट की दुनिया बदल रहा है उसी तेजी से Instagram भी अपने सबसे बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. प्लेटफॉर्म के प्रमुख एडम मोसेरी ने साफ कहा है कि अगर Instagram को अपनी पहचान बचानी है तो उसे बहुत जल्दी दिशा बदलनी होगी. उनके मुताबिक, अब समय हाथ से निकलता जा रहा है.
जब बदलने लगी रिएलिटी
Instagram की शुरुआत इस सोच के साथ हुई थी कि फोटो और वीडियो किसी की ज़िंदगी की असली झलक दिखाते हैं. लेकिन समय के साथ कंटेंट ज्यादा सजावटी और एडिटेड होता चला गया. अब हालात और भी जटिल हैं क्योंकि AI ऐसी तस्वीरें और वीडियो बना रहा है जो असली और नकली के बीच की रेखा ही मिटा देते हैं. मोसेरी का कहना है कि आज के दौर में ऑथेंटिसिटी यानी असलियत को बार-बार कॉपी किया जा सकता है और यही Instagram के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है.
2025 में AI कंटेंट का विस्फोट
बीते साल AI आधारित टूल्स ने जबरदस्त उछाल देखा. टेक्स्ट से इमेज बनाने वाले मॉडल हों या कुछ सेकंड में वीडियो तैयार करने वाले प्लेटफॉर्म अब कोई भी वायरल विज़ुअल बना सकता है. Instagram खुद भी AI फीचर्स पेश कर चुका है जैसे क्रिएटर्स के लिए वीडियो एडिटिंग से जुड़ा नया ऐप. लेकिन इससे एक नई समस्या खड़ी हो गई है: जो दिख रहा है, क्या वह सच है?
युवाओं का बदला व्यवहार और कंटेंट ट्रेंड
मोसेरी के अनुसार, अब युवाओं को ज्यादा पॉलिश्ड पोस्ट्स उतनी आकर्षक नहीं लगतीं. उनकी दिलचस्पी निजी मैसेज और सीधे साझा किए गए, बिना फिल्टर वाले कंटेंट में ज्यादा है. इसका मतलब साफ है अगर कच्चा और बिना एडिट किया गया कंटेंट नया मानक बन रहा है तो Instagram को भी असलीपन की परिभाषा नए सिरे से गढ़नी होगी.
असली और नकली में फर्क कैसे किया जाए?
आने वाले समय में सबसे बड़ा सवाल यही है कि ऑनलाइन दिखने वाले कंटेंट पर भरोसा कैसे किया जाए. अभी जो तरीका अपनाया जा रहा है फेक या AI कंटेंट पर लेबल लगाना वह सिर्फ अस्थायी समाधान है. मोसेरी ने संकेत दिया कि भविष्य में तस्वीर या वीडियो लेते समय ही उसे डिजिटल सिग्नेचर देने जैसे नए तरीकों पर काम करना पड़ सकता है ताकि बाद में उसकी सच्चाई साबित की जा सके.
भरोसा, पारदर्शिता और रचनात्मकता
Instagram अब सिर्फ फोटो शेयरिंग ऐप नहीं रह गया है. यह ऐसा सोशल प्लेटफॉर्म बनता जा रहा है जिसे AI से भरी दुनिया में लोगों का मार्गदर्शन भी करना होगा. आने वाले अपडेट्स में भरोसे को मजबूत करना, पारदर्शिता बढ़ाना और क्रिएटर्स को अलग पहचान देने वाले टूल्स देना प्राथमिकता होगी.
तेजी से बदलना ही एकमात्र रास्ता
Instagram के पुराने दिन पीछे छूट रहे हैं. जिस दौर में AI एक क्लिक में हकीकत जैसी दुनिया बना सकता है वहां टिके रहने के लिए प्लेटफॉर्म को खुद को जल्दी और समझदारी से बदलना होगा. एडम मोसेरी की चेतावनी यही इशारा करती है कि बदलाव अब विकल्प नहीं, बल्कि मजबूरी बन चुका है.
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Source: IOCL






















