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AI से पढ़ाई आसान, लेकिन नंबरों की गारंटी नहीं; जानिए सही यूज

AI चैटबॉट्स अब छात्रों की पढ़ाई का हिस्सा बनते जा रहे हैं. 15 साल के छात्र इनका इस्तेमाल नए विषय समझने, रिसर्च करने, असाइनमेंट तैयार करने और लंबे टेक्स्ट का सार बनाने के लिए कर रहे हैं.

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  • सीमित AI उपयोग ने छात्रों का प्रदर्शन सुधारा.

स्कूल की पढ़ाई में AI चैटबॉट्स का यूज तेजी से बढ़ रहा है. अब 15 साल की उम्र के कई छात्र इन टूल्स की मदद से नए विषयों को समझने, रिसर्च करने, असाइनमेंट तैयार करने और पढ़ने के लिए दिए गए टेक्स्ट का सार बनाने जैसे काम कर रहे हैं. हालांकि AI का यूज ज्यादा करने का मतलब यह नहीं है कि छात्रों के नंबर भी बेहतर होंगे. OECD की PISA 2025 रिपोर्ट में AI के यूज और छात्रों के साइंस प्रदर्शन के बीच संबंध को लेकर कई अहम बातें सामने आई हैं. 

क्या है PISA 2025 स्टडी?

यह रिपोर्ट OECD के Programme for International Student Assessment की ओर से जारी की गई है. PISA 2025 में 91 देशों और अर्थव्यवस्थाओं के 7.6 लाख से ज्यादा छात्रों ने हिस्सा लिया. ये छात्र लगभग 3.3 करोड़ 15 साल के स्टूडेंट्स का प्रतिनिधित्व करते हैं. इस आकलन में साइंस के साथ रीडिंग और मैथ्स पर भी ध्यान दिया गया. साथ ही, डिजिटल दुनिया में सीखने की क्षमता का भी आकलन किया गया. इस रिपोर्ट में भारत को शामिल नहीं किया गया है. 

छात्र AI का यूज किन कामों के लिए करते हैं?

रिपोर्ट के अनुसार, OECD देशों में AI चैटबॉट्स का सबसे आम यूज सीखने में मदद लेने के लिए किया गया. इसके बाद नए विषय पर शुरुआती रिसर्च करना, लिखित असाइनमेंट का ड्राफ्ट तैयार करना और पढ़ने के लिए दिए गए टेक्स्ट का सार बनाना प्रमुख उद्देश्य रहे. हालांकि छात्रों के बीच AI के यूज की अलग-अलग रहा. लगभग रोज AI यूज करने वाले छात्रों की संख्या अभी भी सीमित रही. OECD देशों में करीब 14 प्रतिशत छात्रों ने कहा कि स्कूलवर्क से जुड़े किसी भी काम के लिए AI का कभी यूज नहीं करते या बहुत कम करते हैं. 

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ज्यादा AI यूज करने से स्कोर बेहतर नहीं

स्टडी में पाया गया कि जो छात्र स्कूलवर्क के लिए AI का यूज नहीं करते, वे सामान्य तौर पर AI यूज करने वाले छात्रों की तुलना में साइंस में बेहतर प्रदर्शन करते हैं. ऐसे छात्र मदद मांगने की आदत के मामले में भी आगे पाए गए. वहीं हफ्ते में एक बार AI यूज करने वाले छात्रों का प्रदर्शन, गैर-यूजर्स के लगभग बराबर रहा. वहीं रोजाना या बहुत कम यूज करने वाले छात्रों के साइंस स्कोर कम पाए गए.
 
AI का कितना यूज छात्रों के लिए सही?
 
स्टडी के अनुसार, AI का सीमित और सही तरीके से यूज करने वाले छात्रों का प्रदर्शन बेहतर हो सकता है. टेक्स्ट का सार बनाने या शुरुआती रिसर्च के लिए महीने में एक बार से लेकर हफ्ते में दो बार तक AI यूज करने वाले छात्रों ने बहुत कम या बिल्कुल AI यूज न करने वालों से बेहतर प्रदर्शन किया. हालांकि रिपोर्ट यह साबित नहीं करती कि AI के कारण स्कोर कम होते हैं. छात्रों के प्रदर्शन पर इस बात का भी असर पड़ता है कि वे AI का यूज किस उद्देश्य और किस तरीके से करते हैं. 

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मानसी उपाध्याय करीब दो साल से डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मूल रूप से उत्तराखंड से जुड़ी मानसी ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (ऑनर्स) हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की और वर्तमान में राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म कर रही हैं. पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अक्टूबर 2024 में एबीपी नेटवर्क से की. अब वह डिजिटल कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें फीचर और इंफॉर्मेटिव स्टोरीज लिखने के साथ-साथ स्क्रिप्ट राइटिंग, सोशल मीडिया और रिसर्च आधारित कंटेंट तैयार करने में रुचि है. हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखने वाली मानसी ऐसी स्टोरीज लिखना पसंद करती हैं, जो पाठकों को नई और जरूरी जानकारी आसान भाषा में दें. उनकी कोशिश रहती है कि कंटेंट सिर्फ जानकारी देने वाला ही नहीं, बल्कि पढ़ने में दिलचस्प और पाठकों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ भी हो.

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