फसल तबाह...कौन देगा सहारा? महाराष्ट्र से राजस्थान...परेशान किसान
क्या हमारे देश का अन्नदाता केवल वोट बैंक बनकर रह चुका है.. जिसकी याद नेताओं को चुनाव के वक्त ही आती है.. अगर ऐसा नहीं है.. तो महाराष्ट्र का अन्नदाता खून के आंसू क्यों रो रहा है.. ये सवाल इसलिए.. क्योंकि महाराष्ट्र के कई जिले सूखे की मार झेल रहे हैं.. किसानों की खड़ी फसल उनके सामने बर्बाद हो रही है.. हालत ये है.. पानी के लिए तरस रहे किसानों ने अपने गांव के बाहर.. गांव बिकाऊ है का बोर्ड लगा दिया है.इस देश के अन्नदाता का दुख दूर क्यों नहीं होता... क्यों देश का पेट पालने वाला किसान.. दो जून की रोटी के इंतजाम के लिए जूझता दिखता है.. सूखे के कारण महाराष्ट्र सरकार 26 सितंबर को 32 जिलों की 358 में से 265 तहसीलों को सूखा घोषित कर चुकी है.. बावजूद इसके.. अन्नदाता पर सरकारी राहत की बारिश अबतक नहीं हुई.. ऐसे में सवाल ये है... क्या देश का अन्नदाता सिर्फ नेताओं के नारों और सरकारी विज्ञापनों की तस्वीरों तक ही सिमट कर रह गया है
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