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UP Politics: गोरखपुर में मंच पर क्यों रोए संजय निषाद? चुनावी स्टंट या हिस्सेदारी का सवाल, चर्चाएं तेज

UP News: यूपी के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद गोरखपुर में पार्टी के कार्यक्रम में फूट-फूटकर रोने लगे. जिसके बाद प्रदेश की सियासत में कयासों का दौर शुरू हो गया है.

गोरखपुर में निषाद पार्टी के स्‍थापना दिवस पर राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष डॉ. संजय निषाद मंच पर ही फफक कर रो पड़े. उन्‍होंने सपा-बसपा सरकार में उनके समाज का हक लूटे जाने का आरोप लगाते हुए 2027 में उनके साथ जुड़ने का आह्वान किया. संजय निषाद के इन आंसुओं को लेकर कई तरह के सियासी कयास लगने लगे है, क्या ये उनका चुनावी स्टंट है या वाकई में भावनाओं में उनके आंसू निकल गए. 

संजय निषाद ने पार्टी के स्थापना दिवस पर 22 मार्च को जब माइक संभाला तो उनकी आंखों में आंसू आ गए. खुद सरकार के घटक दल होने के बावजूद उनके आंसुओं से सियासी गलियारों में हलचल मच गई. उन्‍होंने कहा भी कि मोदी-योगी सीट देते हैं और हम जीत देते हैं. जिस सीट पर जीत मुश्किल हो और निषाद ज‍ाति बाहुल्‍य सीट हो, वो उनकी पार्टी को दे दी जाए.

बीजेपी के साथ चुनाव लडे़ंगे निषाद

संजय निषाद ने कहा कि 2022 में उन्हें 16 सीटें मिली थी. अधिकतर सीटों पर वो जीते. जिन सीटों पर हार का सामना करना पड़ा, वो मामूली अंतर से हारे. उस हार को हार नहीं कहा जा सकता है. उन्होंने साफ़ किया 2027 के चुनाव में भी वो बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे. लेकिन, ये नहीं बताया कि पूर्वांचल की कितनी सीटों पर उनकी दावेदारी होगी. 2022 में उन्होंने 19 सीटों दावा ठोंका था लेकिन 16 सीटें मिली और 6 सीटों पर जीत दर्ज की. 

संजय निषाद की सियासी कहानी

यूपी में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने निषाद पार्टी को अपने दम पर खड़ा किया, उस समय उनके समाज के गिने-चुने लोग ही उनके साथ थे. उन्होंने निषाद समाज और अन्‍य उप जातियों को अनुसूचित‍ जात‍ि में शामिल करने की मांग को लेकर साल 2012-13 में उन्‍होंने जब आंदोलन शुरू किया, तो निषाद समाज के अधिकतर ऐसे गिने-चुने लोगों ने उनका साथ दिया. 

बावजूद इसके संजय निषाद सहजता के साथ अपने आंदोलन को लेकर चले, जिसके बाद गोरखपुर व आसपास उनकी पहचान बनने लगी. साल 2013 में उन्‍होंने आरक्षण की मांग को लेकर गोरखपुर कलेक्‍ट्रेट में 56 दिन तक अनिश्चितकालीन धरना किया. जिसमें तात्‍कालीन बीजेपी सांसद और वर्तमान में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने भीसमर्थन किया. इसके बाद वो निषाद समाज के बड़े नेता के तौर पर उभरे. 

कसरवल कांड की वजह से गए जेल

साल 2015 में कसरवल निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) ने आरक्षण की माँग को लेकर आंदोलन किया, संजय निषाद कसरवल में ट्रेन की पटरियों पर आंदोलनकारियों के साथ रेलवे ट्रैक पर चारपाई लगाकर बैठ गए. पुलिस के हटाने पर उन्‍होंने रेलवे ट्रैक को बाधित करने के साथ ही पटरी को क्षतिग्रस्‍त कर दिया. रेलवे ट्रैक से लेकर सड़क पर भी आंदोलनकारी आक्रोशित हुए और पुलिस बल और आरपीएफ पर पत्‍थरबाजी करने लगे. 

इसी आंदोलन के दौरान चली गोली में इटावा के 21 साल के अखिलेश निषाद नाम के युवक की मौत हो गई और कई आंदोलनकारी घायल हो गए थे. इस मामले में संजय निषाद समेत 37 लोगों को आरोपी बनाया गया. कसरवल कांड की वजह से संजय निषाद को जेल भी जाना पड़ा. हालांकि इस आंदोलन ने उनकी पार्टी को पहचान दी, तो वहीं उनका चेहरा भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया.
 
जेल में एक माह से अधिक समय गुजारने के बाद संजय निषाद को जमानत मिली. चार्जशीट लगने के बाद जब सीजेएम कोर्ट में मामला पहुंचाय. 13 जनवरी 2016 को संजय निषाद को जमानत मिल गई. इनकी चार्जशीट 2019 में कोर्ट में द‍ाखिल हुई. इस मामले में कोर्ट की ओर से कोई भी समन सूचना प्राप्‍त नहीं हुई. इसमें गलत तरीके से वारंट कर दिया गया. आज अर्जी पड़ी. कोर्ट ने इसे स्‍वीकार कर वारंट को रिकाल कर दिया.
 
ये केस भी एमपी-एमएलए कोर्ट में चलेगा. क्‍योंकि दो बार चार्जशीट आई थी. इसलिए फाइल अलग-अलग कोर्ट में जाने से दो कोर्ट में मामला चल रहा है. ये फाइल भी एमपी-एमएलए कोर्ट में चला जाएगा, जिससे एक ही जगह पर केस चल सके. 

संजय निषाद पर भी परिवारवाद का आरोप

गोरखपुर से निषाद पार्टी का झंडा बुलंद करने वाले संजय निषाद पर राजनीति में परिवारवाद को बढ़ावा देने का भी आरोप लगता है. वे निषाद पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष हैं. उनके मंझले पुत्र इंजीनियर प्रवीण निषाद साल 2018 में मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के मुख्‍यमंत्री बनने के बाद रिक्‍त हुई सीट पर सपा के टिकट पर उपचुनाव लड़कर जीत हासिल की. इसके बाद वे भाजपा के साथ हो लिए. 

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में इंजीनियर प्रवीण निषाद ने संत कबीर नगर सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की. साल 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उनके छोटे पुत्र सरवन निषाद को चौरीचौरी विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा. इस चुनाव में उन्‍होंने जीत हासिल की. इसके बाद साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में इंजीनियिर प्रवीण निषाद ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन उन्‍हें हार का सामना करना पड़ा. 

हालांकि इस बीच डा. संजय निषाद एमएलसी बनने के साथ ही यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री मतस्य की शपथ लेकर यूपी की राजनीति का बड़ा चेहरा बन गए. 

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