यूपी चुनाव से पहले BJP का दलितों पर फोकस, बड़े संदेश की तैयारी
Varanasi News: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी सीर गोवर्धनपुर से कलश पूजन, कलश यात्रा और समरसता संकल्प सभा की शुरुआत करेगी.

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में आज गुरु पूर्णिमा पर्व पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक संदेश देने की शुरुआत हो रही है. जिसके तहत काशी में संत रविदास की जन्मस्थली से 131 से अधिक कलश यात्रा निकाली जाएगी. जिसमें यहां की मिट्टी भरी होगी और इस मिट्टी को देश के अलग-अलग राज्यों में भेजा जाएगा. ये आयोजन अगले आठ महीनों तक यूपी व कई दूसरे जिलों में चलेगा.
दरअसल वाराणसी के सिरगोवर्धनपुर स्थित संत रविदास जन्मस्थली पर समरसता संकल्प सभा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक राज्यसभा सांसद तरुण चुग समेत 20 हजार से अधिक कार्यकर्ता शामिल होंगे.
महीनों तक बीजेपी का ये कार्यक्रम
एबीपी लाइव को मिली जानकारी के अनुसार 29 जुलाई गुरु पूर्णिमा को वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर से कलश पूजन, कलश यात्रा और समरसता संकल्प सभा की शुरुआत हो रही है. 29 जुलाई से लेकर यह कार्यक्रम माघ पूर्णिमा फरवरी माह करीब 8 महीने तक देश के अलग-अलग राज्यों में चलेगा.
भारतीय जनता पार्टी ने इसको लेकर विशेष काशी में तैयारी की है. इसके लिए हफ्तों से संगठन के शीर्ष नेताओं की देखरेख में इस बड़े कार्यक्रम को आयोजित करने के लिए पूरी रूपरेखा तैयार की गई है.
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यूपी से पंजाब तक विशेष फोकस
भारतीय जनता पार्टी की देश के अलग-अलग राज्यों में समरसता संकल्प सभा और यह कलश यात्रा पहुंचेगी. लेकिन, विशेष तौर पर उत्तर प्रदेश और पंजाब पर इस आयोजन का फोकस रहेगा. सभी जाति और वर्ग को एक धागे में बांधने की विचारधारा को समर्पित रहने वाले संत रविदास को केंद्रित इस आयोजन के ज़रिए पार्टी समाज के तमाम वर्गों को जोड़ने की कोशिश करेगी.
राजनीतिक जानकारों की भी माने तो इस यात्रा में सामाजिक और राजनीतिक संदेश भी शामिल है. उत्तर प्रदेश, पंजाब और राजस्थान से आने वाले एक बड़ी संख्या में दलित समाज के लोग संत रविदास जी के प्रति विशेष आस्था रखते हैं और ऐसे में इस आयोजन के माध्यम से बीजेपी सीधे उस वर्ग को अपने खेमे में लाना चाहती है. और यही दलित समाज अकेले इन प्रदेशों में चुनावी समीकरण को प्रभावित करने की ताकत रखता है.
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