उत्तराखंड में 20 हजार से ज्यादा बूथ लेवल एजेंट तैनात, निर्वाचन आयोग ने मांगा शत-प्रतिशत लक्ष्य
Uttarakhand SIR: मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम की सक्रिय पहल के बाद प्रदेश के राष्ट्रीय राजनीतिक दलों ने अब तक कुल 20,863 बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) की नियुक्ति कर दी है.

आगामी मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान से पहले उत्तराखंड में चुनावी तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं. भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम की सक्रिय पहल के बाद प्रदेश के राष्ट्रीय राजनीतिक दलों ने अब तक कुल 20,863 बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) की नियुक्ति कर दी है. यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि जमीनी स्तर पर चुनावी मशीनरी को दुरुस्त करने की कोशिशें रंग लाने लगी हैं.
अगर दलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो भारतीय जनता पार्टी ने सबसे अधिक 10,551 बीएलए नियुक्त किए हैं, जो कुल लक्ष्य का 89 प्रतिशत है. इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 9,869 बीएलए तैनात कर 84 प्रतिशत का आंकड़ा छुआ है. इसके अलावा सीपीआई (एम) ने 326 और बहुजन समाज पार्टी ने 117 बीएलए की नियुक्ति की है. प्रदेश के 13 जिलों में से 5 जिले ऐसे हैं जहां भाजपा और कांग्रेस — दोनों ही दलों ने अपने-अपने सभी बूथों पर शत-प्रतिशत बीएलए तैनात कर दिए हैं.
क्यों जरूरी है बीएलए की भूमिका
दरअसल, बूथ लेवल एजेंट राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग के बीच की वह कड़ी है जो जमीन पर काम करती है. विशेष गहन पुनरीक्षण यानि SIR के दौरान मतदाता सूची को दुरुस्त करने में इन्हीं एजेंटों की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है. नए मतदाताओं को जोड़ना, गलत या दोहरी प्रविष्टियों को हटाना, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटवाना यह सब काम बीएलए के सक्रिय सहयोग के बिना संभव नहीं होता.
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने की शत-प्रतिशत नियुक्ति की अपील
डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने राजनीतिक दलों द्वारा की गई इस प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि आयोग के निर्देश पर सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दलों के साथ बैठक कर उन्हें जल्द से जल्द शत-प्रतिशत बीएलए नियुक्त करने का अनुरोध किया गया था. उसी का नतीजा है कि अधिकांश दलों ने बड़ी संख्या में नियुक्तियां कर दी हैं.
उन्होंने शेष बचे बूथों पर भी जल्द नियुक्ति पूरी करने की अपील दोहराई है, ताकि SIR अभियान बिना किसी रुकावट के पूरी पारदर्शिता के साथ चलाया जा सके. यह पूरी कवायद इस बात की तैयारी है कि जब अगली बार मतदाता सूची का पुनरीक्षण हो, तो कोई पात्र मतदाता सूची से बाहर न रह जाए और मतदान प्रक्रिया की विश्वसनीयता और भी मजबूत हो.
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