उत्तराखंड: BJP ने नेताओं की बयानबाजी पर कसी लगाम, अनुशासन तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई
Uttarakhand News: बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि पिछले लोकसभा सत्र के दौरान दिल्ली में कोर कमेटी की बैठक हुई थी और अब संसद के आगामी बजट सत्र के दौरान अगली कोर कमेटी की बैठक प्रस्तावित है.

उत्तराखंड भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक अनुशासन को बनाए रखने के लिए नेताओं की सार्वजनिक बयानबाजी पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. पार्टी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि पार्टी फोरम से बाहर दिए जाने वाले बयानों से संगठन असहज हो रहा है और यदि किसी नेता ने इस निर्देश की अनदेखी की तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है.
बीजेपी के कुछ नेताओं, खासकर विधायक अरविंद पांडे सहित अन्य के हालिया बयानों को लेकर पार्टी नेतृत्व में नाराजगी देखी जा रही थी. इन बयानों से संगठन की छवि और आंतरिक समन्वय प्रभावित हो रहा था. इसी को देखते हुए पार्टी ने यह फैसला लिया है कि अब कोई भी नेता पार्टी मंच के बाहर बयानबाजी नहीं करेगा.
प्रदेश अध्यक्ष ने की पुष्टि
प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए बताया कि सभी नेताओं को इस संबंध में स्पष्ट रूप से अवगत करा दिया गया है. उन्होंने कहा, "अब यदि कोई नेता सार्वजनिक रूप से बयान देता है या पार्टी लाइन से हटकर टिप्पणी करता है तो संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी."
महेंद्र भट्ट ने बताया कि विधायक अरविंद पांडे के बयानों को लेकर उनसे व्यक्तिगत रूप से बातचीत की गई है. "चूंकि वे सरकार का हिस्सा हैं, इसलिए उन्हें सलाह दी गई है कि यदि कोई विषय या समस्या है तो उसे पार्टी फोरम या मुख्यमंत्री के समक्ष रखें, न कि सार्वजनिक मंचों पर," उन्होंने कहा.
बजट सत्र में कोर कमेटी की बैठक
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने आगे बताया कि पिछले लोकसभा सत्र के दौरान दिल्ली में कोर कमेटी की बैठक हुई थी और अब संसद के आगामी बजट सत्र के दौरान अगली कोर कमेटी की बैठक प्रस्तावित है. इस बैठक में संगठनात्मक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी. होर्डिंग से प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम का नाम हटने को लेकर उठ रही चर्चाओं पर महेंद्र भट्ट ने कहा कि यह निर्णय दिल्ली स्तर से लिया गया है. उन्होंने इसे लेकर फैल रही अन्य बातों को पूरी तरह निराधार और अफवाह करार दिया.
संगठन में अनुशासन बनाए रखने का कदम
बीजेपी नेतृत्व का यह कदम संगठन में अनुशासन और एकरूपता बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है. यह फैसला पार्टी के आंतरिक अनुशासन को मजबूत करने और संगठन की एक सुर में आवाज उठाने की रणनीति का हिस्सा है. इससे यह संदेश जाता है कि पार्टी अपने नेताओं से अनुशासित और जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा करती है.




















