8 विधायकों का रिपोर्ट कार्ड खराब होने पर BJP आलाकमान सख्त, चुनाव से पहले टिकट पर मंडराया खतरा
Uttarakhand Politics In Hindi: उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने दो अलग-अलग सर्वे किए, जिसमें आठ मौजूदा विधायक उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए हैं. जिस वजह से उन पर संकट के बादल छा गए हैं.

उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने ही विधायकों के प्रदर्शन पर कड़ी नजर रखनी शुरू कर दी है. पार्टी द्वारा कराए गए दो अलग-अलग सर्वे में आठ मौजूदा विधायक उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए हैं, जिससे उनकी तैयारी और आगामी चुनाव में उम्मीदवारी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं.
बीजेपी ने हर विधानसभा सीट का गहराई से किया मूल्यांकन
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी संगठन ने इन सर्वे के जरिए हर विधानसभा सीट का गहराई से मूल्यांकन किया है. खास तौर पर उन सीटों पर फोकस किया गया है, जहां पार्टी ने पिछले चुनाव में जीत दर्ज की थी. चौंकाने वाली बात यह रही कि इन्हीं जीती हुई सीटों में से आठ सीटों पर इस बार हार का खतरा सामने आया है. यह संकेत पार्टी नेतृत्व के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है.
बताया जा रहा है कि इन विधायकों के खिलाफ जनता में नाराजगी का मुख्य कारण उनके अधूरे वादे और क्षेत्र में कम सक्रियता है. कई स्थानों पर विकास कार्यों की रफ्तार धीमी रही, जबकि जनता से किए गए वादों को समय पर पूरा नहीं किया गया. इसका सीधा असर उनकी लोकप्रियता पर पड़ा है, जो सर्वे रिपोर्ट में साफ दिखाई दिया.
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पार्टी के लिए 'जिताऊ उम्मीदवार' ही सर्वोच्च प्राथमिकता
पार्टी संगठन ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विधायकों को स्पष्ट संदेश दिया है कि वे तत्काल अपने प्रदर्शन में सुधार करें और जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाएं. बीजेपी किसी भी हाल में सत्ता विरोधी लहर को पनपने नहीं देना चाहती, खासकर तब जब वह राज्य में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की तैयारी में है.
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी साफ संकेत दिए हैं कि पार्टी के लिए 'जिताऊ उम्मीदवार' ही सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने दो टूक कहा है कि टिकट वितरण में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और केवल उन्हीं चेहरों को मौका मिलेगा, जिनकी जीत सुनिश्चित होगी. संगठन स्तर पर इन सर्वे रिपोर्टों के आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जा रही है. पार्टी उन सीटों पर भी विशेष ध्यान दे रही है, जहां पिछले चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. ऐसे क्षेत्रों में नए चेहरे, स्थानीय समीकरण और संगठन की मजबूती को ध्यान में रखते हुए अलग रणनीति बनाई जा रही है.
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