BJP या कांग्रेस, किसका पलड़ा भारी? जानें बद्रीनाथ सीट का आंकड़ा
बद्रीनाथ सीट में राज्य के गठन के बाद 5 चुनाव और एक उपचुनाव हुआ है लेकिन इन 6 चुनावों में बीजेपी सिर्फ दो बार ही चुनाव जीती है. जबकि कांग्रेस 4 बार यह सीट कांग्रेस के पाले गई है.

उत्तराखंड ही नहीं भारतवर्ष के चार धामों में शुमार बद्रीनाथ विधानसभा सीट न केवल 2027 विधानसभा चुनाव के नहीं बल्कि धार्मिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण है. हालांकि, उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इस सीट में इस वक्त किस रणनीति और राजनीति का दौर चल रहा है.
क्या कहता है पिछले चुनावों का आंकड़ा
राज्य गठन के बाद इस सीट पर अब तक पांच चुनाव और एक उपचुनाव आयोजित हो चुका है, इन छह चुनावों में इस सीट से दो बार भाजपा और चार बार कांग्रेस पार्टी के विधायक चुने गए हैं, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि यह सीट मुख्यतः कांग्रेस की विचारधारा पर भरोसा करती है. हालांकि, इस सीट पर दोनों ही दलों के बीच मुकाबला हमेशा ही कांटे की टक्कर का रहा है तो यह कहना भी गलत नहीं होगा कि 2027 में किसी भी दल का पलड़ा भारी हो सकता है.
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वर्ष 2002 का चुनाव , दोनों दलों के बीच कांटे की टक्कर
उत्तराखंड के पहले विधानसभा चुनाव में इस सीट के चुनावी परिणाम बेहद ही दिलचस्प रहे. कांग्रेस के टिकट से डॉ अनुसूया प्रसाद मैखुरी, वहीं भाजपा से केदार सिंह फोनिया मैदान में उतरे. 11145 वोटों के समर्थन से बद्रीनाथ की जानता ने मैखुरी को अपना विधायक चुना और यह सीट कांग्रेस के खेमे में गई. वहीं दूसरी ओर फोनिया को 10154 वोट मिले. आंकड़े बताते हैं कि इस सीट पर जीत का अंतर बेहद कम था और मुकाबला कड़ा था.
2007 चुनाव भाजपा ने मारी बाजी
2002 चुनाव के विपरीत इस सीट पर जीत का अंतर बढ़ा और भाजपा प्रत्याशी केदार सिंह फोनिया इस सीट से 16607 वोटों के साथ विधायक चुने गए. वहीं कांग्रेस से अनुसूया प्रसाद मैखुरी को 12742 वोट मिले और वह दूसरे स्थान पर रहे.
2012 चुनाव , भाजपा का वह फैसला जो बना हार का कारण
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा में कथित तौर पर हुई गुटबाजी के कारण यह सीट कांग्रेस के खेमे में जा गिरी.अपने तत्कालीन विधायक केदार सिंह फोनिया का टिकट काट कर भाजपा ने नए चेहरे प्रेम बल्लभ भट्ट को बद्रीनाथ सीट से प्रत्याशी चुना. वहीं इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शामिल और बद्रीनाथ से प्रत्याशी अनुसूया प्रसाद मैखुरी की भी कोविड काल के दौरान 5 दिसंबर 2020 को मृत्यु हो गई जिस वजह से कांग्रेस ने भी नए चेहरे राजेंद्र भंडारी को मौका दिया.
वहीं टिकट काटे जाने से नाराज होकर केदार सिंह फोनिया ने रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल टीपीएस रावत के संगठन उत्तराखंड रक्षा मोर्चा (URM) के बैनर तले चुनाव लड़ने का फैसला किया. सूत्रों के अनुसार, केदार सिंह फोनिया को तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के गुट के माने जाते थे. 2012 के चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने बीसी खंडूरी को दोबारा मुख्यमंत्री बनाया तो पार्टी के भीतर चल रही इस गुटीय राजनीति के कारण निशंक का समर्थन करने वाले कई विधायकों और नेताओं के टिकट काटे गए जिनमें फोनिया भी शामिल थे.
यह गुटबाजी भाजपा के हाथ से यह सीट उड़ा ले गई, कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र भंडारी 21492 को वोटों का समर्थन मिला और वह इस सीट से चुनाव जीते. वहीं, दूसरी ओर फोनिया के पार्टी छोड़ने की वजह से भाजपा के टिकट दो हिस्सों में बंट गए, भाजपा प्रत्याशी प्रेम वल्लभ भट्ट को इस चुनाव में 11291 वोट मिले, वहीं URM से चुनाव लड़ रहे फोनिया को 7511 वोट मिले.
2017 चुनाव, भाजपा की वापसी
2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से परिणाम फिर बदले. पिछले चुनाव में मिली शिकस्त के बाद इस बार भाजपा ने मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट को मैदान में उतारा, वहीं दूसरी और कांग्रेस ने अपने सिटिंग विधायक राजेंद्र भंडारी पर दांव खेलते हुए उन्हें ही प्रतिनिधि चुना. इस वर्ष के चुनाव में महेंद्र भट्ट को इस सीट पर बम्पर समर्थ मिला 29676 वोटों के साथ और वह इस सीट से विधायक चुने गए. भट्ट की यह जीत भाजपा की जीत के लिए बेहद अहम मानी गई.
2022 में कांग्रेस ने मारी बाज़ी
वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव एक बार फिर से कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र सिंह भंडारी और भाजपा के महेंद्र भट्ट के बीच देखने को मिला. इस बार फिर से दोनों के बीच कांटे की टक्कर रही और 2022 विधानसभा चुनाव 32661 वोटों के समर्थन के साथ कांग्रेस के पलड़े में रहा. हालांकि, कांग्रेस की जीत का यह जश्न ज्यादा वक्त नहीं चल सका. वर्ष 2024 में कांग्रेस के सिटिंग विधायक राजेंद्र भंडारी ने अपने विधायक पद से इस्तीफा देकर भाजपा का दमन थाम लिया और यह सीट खाली हो गई.
2024 उपचुनाव
राजेंद्र भंडारी के इस्तीफ़े के बाद इस सीट पर 2024 में उपचुनाव हुए भाजपा ने राजेंद्र भंडारी को ही चुनावी मैदान में अपनी ओर से उतारा कयास लगाए जा रहे थे कि यह उपचुनाव भाजपा जीतेगी हालांकि हुआ ठीक उल्टा , कांग्रेस के टिकट से मैदान में उतरे लकपत बुटोला ने 28167 वोटों के समर्थन के साथ यह उपचुनाव जीता. वहीं राजेंद्र भंडारी को 22937 वोट मिले
बद्रीनाथ सीट 2027 में बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती
गौरतलब है कि बद्रीनाथ की जानता का रुझान ज्यादातर कांग्रेस की और आंकड़े दिखाते नजर आते हैं. प्रदेश में जीत की हैट्रिक लगाने की तैयारी में जुटी भाजपा इस सीट को जीतने के लिए हर मुमकिन प्रयास करेगी. हालांकि, इस सीट का उपचुनाव सत्ता परिवर्तन की और इशारा कर रहा है.
अगला दावेदार कौन
अगले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अब तक किसी भी पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की औपचारिक घोषणा नहीं की है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा जरूर है कि कांग्रेस मौजूदा विधायक लखपत सिंह बुटोला पर ही दोबारा भरोसा जता सकती है. वहीं भाजपा की ओर से महेंद्र भट्ट या राजेंद्र सिंह भंडारी में से किसी एक को मैदान में उतारे जाने की संभावना जताई जा रही है.
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