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2029 लोकसभा चुनाव से पहले बदल जाएगा यूपी का सियासी नक्शा! सिर्फ 80 सीटों पर नहीं होंगे चुनाव, बढ़ेंगे 40 सांसद?

उत्तर प्रदेश का सियासी नक्शा 2029 के लोकसभा चुनाव के पहले बदल सकता है. महिला आरक्षण कानून लागू होने के बाद परिसीमन के आसार जताए जा रहे हैं. तो अब यूपी में कितनी लोकसभा सीटें होने के अनुसमान है?

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  • महिला आरक्षण के साथ 2029 में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ सकती है.
  • उत्तर प्रदेश में सीटों की संख्या 80 से बढ़कर 120 हो सकती है.
  • परिसीमन के बाद उत्तर प्रदेश में सामान्य व आरक्षित सीटों में बढ़ोतरी होगी.
  • 1951 में 69 निर्वाचन क्षेत्रों से पहले उत्तर प्रदेश में 52+17 सीटें थीं.

लोकसभा चुनाव 2029 से पहले देश में निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या बढ़ सकती है. केंद्र सरकार आगामी 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण कानून यानी नारी वंदन अधिनियम लागू करने की तैयारी कर रही है. सूत्रों के अनुसार इस प्रक्रिया के तहत लोकसभा की कुल सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर लगभग 816 करने की योजना पर भी काम चल रहा है.
इस क्रम में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी उत्तर प्रदेश में होगी. 

भारत का सबसे ज्यादा आबादी और लोकसभा में सबसे ज्यादा निर्वाचन क्षेत्रों वाले राज्य उत्तर प्रदेश में सीटों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी होने की संभावना है. अभी यूपी से 80 लोकसभा सांसद चुने जाते हैं. परिसीमन होने पर राज्य में निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या 120 तक पहुंच सकती है.

मौजूदा स्थिति में राज्य में फिलहाल सामान्य सीटें 63, अनुसूचित जाति (SC) के लिए 17 सीटें आरक्षित हैं. अगर परिसीमन के बाद सीटों की संख्या 120 तक पहुंचती हैं तो सामान्य वर्ग की सीटें बढ़कर 94-95 और अनुसूचित जाति के कोटे में 25-26 सीटें हो सकती हैं. देश में जब सन् 1951 में पहला चुनाव हुआ था तब यूपी में 69 निर्वाचन क्षेत्र थे. तब राज्य से उत्तराखंड अलग नहीं हुआ था.

देश में पहला चुनाव हुआ तब कितनी लोकसभा सीटें थीं?

सन् 1951में हुए पहले चुनाव के वक्त यूपी में जो सीटें थीं उसमें-

- देहरादून जिला सह बिजनौर जिला (उत्तर-पश्चिम) सह सहारनपुर जिला (पश्चिम)
- गढ़वाल जिला (पश्चिम) सह टिहरी गढ़वाल जिला सह बिजनौर जिला (उत्तर)
- गढ़वाल जिला (पूर्व) सह मुरादाबाद जिला (उत्तर-पूर्व)
- अल्मोड़ा जिला (उत्तर-पूर्व)
- नैनीताल जिला सह अल्मोड़ा जिला (दक्षिण-पश्चिम) सह बरेली जिला (उत्तर)
- बरेली जिला (दक्षिण)
- पीलीभीत जिला सह बरेली जिला (पूर्व)
- मुरादाबाद जिला (पश्चिम)
- मुरादाबाद जिला (केंद्रीय)
- रामपुर जिला सह बरेली जिला (पश्चिम)
- बिजनौर जिला (दक्षिण)
- सहारनपुर जिला (पश्चिम) सह मुजफ्फरनगर जिला (उत्तर)
- मुजफ्फरनगर जिला (दक्षिण)
- मेरठ जिला (पश्चिम)
- मेरठ जिला (दक्षिण)
- मेरठ जिला (उत्तर-पूर्व)
- बुलंदशहर जिला
- अलीगढ़ जिला
- आगरा जिला (पश्चिम)
- आगरा जिला (पूर्व)
- मथुरा जिला (पश्चिम)
- एटा जिला (पश्चिम) सह मैनपुरी जिला (पश्चिम) सह मथुरा जिला (पूर्व)
- एटा जिला (केंद्रीय)
- एटा जिला (उत्तर-पूर्व) सह बदायूं जिला (पूर्व)
- बदायूं जिला (पश्चिम)
- फर्रुखाबाद जिला (उत्तर)
- मैनपुरी जिला (पूर्व)
- जालौन जिला सह इटावा जिला (पश्चिम) सह झांसी जिला (उत्तर)
- कानपुर जिला (उत्तर) सह फर्रुखाबाद जिला (दक्षिण)
- कानपुर जिला (केंद्रीय)
- कानपुर जिला (दक्षिण) सह इटावा जिला
- झांसी जिला (दक्षिण)
- हमीरपुर जिला
- बांदा जिला सह फतेहपुर जिला
- उन्नाव जिला सह रायबरेली जिला (पश्चिम) सह हरदोई जिला (दक्षिण-पूर्व)
- हरदोई जिला (उत्तर-पश्चिम) सह फर्रुखाबाद जिला (पूर्व) सह शाहजहांपुर जिला (दक्षिण)
- शाहजहांपुर जिला (उत्तर) सह खीरी जिला (पूर्व)
- सीतापुर जिला सह खीरी जिला (पश्चिम)
- लखनऊ जिला सह बाराबंकी जिला
- लखनऊ जिला (केंद्रीय)
- प्रतापगढ़ जिला (पश्चिम) सह रायबरेली जिला (पूर्व)
- प्रतापगढ़ जिला (पूर्व)
- सुल्तानपुर जिला (दक्षिण)
- सुल्तानपुर जिला (उत्तर) सह फैजाबाद जिला (दक्षिण-पश्चिम)
- फैजाबाद जिला (उत्तर-पश्चिम)
- जौनपुर जिला (पूर्व)
- इलाहाबाद जिला (पूर्व) सह जौनपुर जिला (पश्चिम)
- इलाहाबाद जिला (पश्चिम)
- मिर्जापुर जिला सह बनारस जिला (पश्चिम)
- बनारस जिला (केंद्रीय)
- बनारस जिला (पूर्व)
- बहराइच जिला (पूर्व)
- बहराइच जिला (पश्चिम)
- गोंडा जिला (उत्तर)
- गोंडा जिला (पश्चिम)
- गोंडा जिला (पूर्व) सह बस्ती जिला (पश्चिम)
- बस्ती जिला (उत्तर)
- बस्ती जिला (केंद्रीय-पूर्व) सह गोरखपुर जिला (पश्चिम)
- गोरखपुर जिला (उत्तर)
- गोरखपुर जिला (केंद्रीय)
- गोरखपुर जिला (दक्षिण)
- देवरिया जिला (दक्षिण)
- देवरिया जिला (पश्चिम)
- देवरिया जिला (पूर्व)
- आजमगढ़ जिला (पश्चिम)
- आजमगढ़ जिला (पूर्व) सह बलिया जिला (पश्चिम)
- गाजीपुर जिला (पश्चिम)
- गाजीपुर जिला (पूर्व) सह बलिया जिला (दक्षिण-पश्चिम)
- बलिया जिला (पूर्व) शामिल है. 

बता दें 1951 के चुनाव में एक ही क्षेत्र में दो सीटें होतीं थीं. वहां से 2 सांसदों का चुनाव होता था. यूपी में 1951 के चुनाव में 52 सीटों पर 1 और 17 सीटों पर दो सांसद चुने जाते थे.

1973 के परिसीमन के बाद यूपी में कितनी सीटें बढ़ीं?

सन् 1973 के परिसीमन के बाद उत्तर प्रदेश में कुल 85 निर्वाचन क्षेत्र हो गए.

- टिहरी गढ़वाल
- गढ़वाल
- अल्मोड़ा
- नैनीताल
- बिजनौर (एससी)
- अमरोहा
- मुरादाबाद
- रामपुर
- संभल
- बदायूं
- आंवला
- बरेली
- पीलीभीत
- शाहजहांपुर
- खीरी
- शाहाबाद
- सीतापुर
- मिश्रिख (एससी)
- हरदोई (एससी)
- लखनऊ
- मोहनलालगंज (एससी)
- उन्नाव
- रायबरेली
- प्रतापगढ़
- अमेठी
- सुल्तानपुर
- अकबरपुर (एससी)
- फैजाबाद
- बाराबंकी (एससी)
- कैसरगंज
- बहराइच
- बलरामपुर
- गोंडा
- बस्ती (एससी)
- डुमरियागंज
- खलीलाबाद
- बांसगांव (एससी)
- गोरखपुर
- महाराजगंज
- पडरौना
- देवरिया
- सलेमपुर
- बलिया
- घोसी
- आजमगढ़
- लालगंज (एससी)
- मछलीशहर
- जौनपुर
- सैदपुर (एससी)
- गाजीपुर
- चंदौली
- वाराणसी
- रॉबर्ट्सगंज (एससी)
- मिर्जापुर
- फूलपुर
- इलाहाबाद
- चैल (एससी)
- फतेहपुर
- बांदा
- हमीरपुर
- झांसी
- जालौन (एससी)
- घाटमपुर (एससी)
- बिल्हौर
- कानपुर
- इटावा
- कन्नौज
- फर्रुखाबाद
- मैनपुरी
- जलेसर
- एटा
- फिरोजाबाद (एससी)
- आगरा
- मथुरा
- हाथरस (एससी)
- अलीगढ़
- खुर्जा (एससी)
- बुलंदशहर
- हापुड़
- मेरठ
- बागपत
- मुजफ्फरनगर
- कैराना
- सहारनपुर
- हरिद्वार (एससी)

यूपी में अभी कितनी लोकसभा सीटें?

बाद में जब सन् 2000 में राज्य का बंटवारा हुआ तब पांच सीटें उत्तराखंड में चलीं गईं और उसके बाद यूपी में कुल 80 सीटें बचीं. 

फिलहाल उत्तर प्रदेश में कुल 80 लोकसभा सीटें हैं. सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, नगीना, मुरादाबाद, रामपुर, संभल, अमरोहा, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, हाथरस, मथुरा, आगरा, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, बदायूं, आंवला, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, खीरी, धौरहरा, सीतापुर, मिश्रिख, हरदोई, उन्नाव, मोहनलालगंज, लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, फर्रुखाबाद, इटावा, कन्नौज, कानपुर, अकबरपुर, जालौन, झांसी, हमीरपुर, बांदा, फतेहपुर, कौशांबी, फूलपुर, इलाहाबाद, बाराबंकी, फैजाबाद, अम्बेडकर नगर, बहराइच, कैसरगंज, श्रावस्ती, गोण्डा, डुमरियागंज, बस्ती, संत कबीर नगर, महाराजगंज, गोरखपुर, बांसगांव, कुशीनगर, देवरिया, सलेमपुर, बलिया, घोसी, आजमगढ़, लालगंज, जौनपुर, मछलीशहर, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, भदोही, मिर्जापुर और रॉबर्ट्सगंज शामिल है.

अब यह देखना होगा कि कौन से जिले से कौन सी लोकसभा निकलती है और भविष्य में यूपी का सियासी नक्शा कैसे बदलेगा? (डेस्क इनपुट के साथ)

अंकित गुप्ता abp न्यूज़ में सीनियर स्पेशल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. इनका अनुभव 18 से अधिक सालों का है. abp न्यूज़ से पहले ये न्यूज 24 और सहारा समय जैसे बड़े संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. अंकित लीगल और राजनीतिक बीट कवर करते हैं. इसके अलावा इन्होंने कई अन्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्टोरीज़ को भी को कवर किया है.
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