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UP में सपा-कांग्रेस के गले की फांस बना धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा?

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर भारतीय जनता पार्टी डिफेंसिव होने के बजाय आक्रामक रुख अख्तियार कर रही है. बीजेपी इस मुद्दे पर नकारात्मक नैरेटिव बनने की हर कोशिश को नाकाम करने की जुगत में है.

भारतीय जनता पार्टी के नेता और ओडिशा स्थित संबलपुर से सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया. उनके इस्तीफे को लेकर समाजवादी पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का मनोबल ऊंचा है. दोनों ही पार्टियों का दावा है कि इस इस्तीफे के जरिए वह उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों में युवाओं को अपने साथ ला पाएंगे. 

हालांकि बीजेपी के सहयोगी दल इस मामले में नई रणनीति अपनाते दिख रहे हैं. यूपी में उसके सहयोगी दल ने जो लाइन ली है अगर वह नैरेटिव में बदला तो सपा-कांग्रेस के लिए चुनावी जमीन पर अपनी बात रखना मुश्किल भरा हो सकता है.

दरअसल, आगामी चुनाव में सपा,पीडीए फॉर्मूले पर काम कर रही है. यह वही फॉर्मूला है जिसे वर साल 2024 के लोकसभा चुनाव में आजमा चुकी है और उसे सफलता भी मिली. अब इसी को लेकर वह विधानसभा चुनाव में भी उतेरगी.

इधर, बीजेपी के सहयोगी प्रधान के इस्तीफे को पिछड़े वर्ग के नेता के साथ अन्याय बताते दिख रहे हैं. खुद बीजेपी भी प्रधान के रेजिगनेशन को इस तरह से पेश कर रही है कि उनका कार्यकाल शानदार रहा और उन्होंने युवाओं की मांग के चलते इस्तीफा दिया है.

निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री संजय निषाद और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता बेदीराम ने पेपर लीक मामले को पिछड़ा और दलित से जोड़ दिया है.

संजय निषाद ने क्या कहा?

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने एक बयान में कहा कि अखिलेश यादव का उद्देश्य पिछड़े वर्ग के शिक्षा मंत्री को हटाना था और कुछ उद्देश्य नहीं था. धर्मेंद्र प्रधान के पास कोई और आरोप नहीं है उन्हें लंबे समय तक का अनुभव है पिछड़ों के नेता है और इनका एक उद्देश्य है नाम पिछड़ा है इन लोगों का काम पिछड़ा विरोधी है.पिछड़े का बेटा अगर शिक्षा मंत्री है तो इन्हें क्या दर्द है अगर अधिकारियों की गलती थी तो अधिकारियों को हटाया गया.

निषाद यही नहीं रुके. उन्होंने कहा कि शिक्षा माफिया तो इनके समय में ज्यादा थे. ये लोग पिछड़ों के नाम पर राजनीति कर रहे हैं और पिछड़ों के बेटों को शिक्षा मंत्री नहीं बनने देना चाहते हैं. शिक्षा पिछड़ों के हाथ में न रहे और देश की व्यवस्था पिछड़ों के हाथ में न रहे और मोदी जी चाहते हैं कि पिछड़ों को भी अवसर मिले और जो पहले से वंचित हैं उन्हें अवसर दिया जाए और ये चाहते हैं कि इन्हें अवसर न मिले.

राजनीतिक जानकारों का भी मानना है कि बीजेपी, प्रधान के इस्तीफे को नकारात्मक तौर पर पेश नहीं होने देना चाहती.

बेदीराम का क्या कहना है?

उधर, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के विधायक बेदी राम ने पेपर लीक मामले पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बयान पर कहा,  अखिलेश बहुत बड़े नेता हैं. उन्हें बिना जाने-सुने ऐसे बयान नहीं देने चाहिए. एक दलित होने के नाते मुझे बार-बार निशाना बनाया जाता है. इससे पहले भी, जब NEET पेपर लीक का मामला चल रहा था, तब उन्होंने ट्वीट किया था कि इन लोगों को गिरफ़्तार किया जाना चाहिए. बताइए, मैं तो उसमें शामिल भी नहीं था, फिर भी मेरे बारे में ऐसा कहा गया. इतने बड़े नेता हैं, इसलिए मैं उनसे कुछ नहीं कहूंगा.'

सपा-AIMIM क्या बोली?

इस मामले पर एबीपी लाइव से बात करतेहुए सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि सवाल प्रधान की जाति नहीं बल्कि उनके काम का था. जिन बच्चों को नीट में नुकसान हुआ, उनकी क्या जाति थी? जिन बच्चों की जान गई उनकी क्या जाति थी? बीजेपी जनता का ध्यान बांटना चाहती है. प्रधान से विभाग से संभल नहीं रहा था इसलिए उनका इस्तीफा हुआ. प्रधान इकलौते हैं, लेकिन लाखों लाख बच्चों का भविष्य बर्बाद हुआ.

उधर, AIMIM प्रवक्ता शादाब चौहान ने एबीपी लाइव से कहा कि प्रधान का इस्तीफा अहंकार पर जीत है. छात्रों ने अपनी आवाज उठाने के लिए संघर्ष किया. इसका श्रेय आम छात्रों को जाता है जो लोग बिना किसी स्वार्थ के लगे रहे. यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अगर कोई अपराध करेगा, जवाबदेह नहीं रहेगा तो उनके खिलाफ आंदोलन होगा. 

अब यह देखना होगा कि संजय निषाद और सुभासपा के विधायक बेदीराम ने जो सियासी लाइन अख्तियार की है क्या उस पर आने वाले वक्त में बीजेपी भी खुलकर खेलेगी या वह सहयोगी दलों के बहाने ही सपा-कांग्रेस पर निशाना साधेगी. 

राहुल सांकृत्यायन एबीपी लाइव में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और स्टेट्स टीम का नेतृत्व कर रहे हैं. उन्हें राजनीति, शासन-प्रशासन, अपराध और राज्यों की समकालीन राजनीतिक गतिविधियों की कवरेज में एक दशक से अधिक का अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और फीचर डेस्क से की और इसके बाद न्यूज़18 हिंदी, वनइंडिया हिंदी और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया.   राहुल ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की शिक्षा प्राप्त की है. उन्होंने कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2018, लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और महाकुंभ 2025 जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों की कवरेज की है. पत्रकारिता के साथ-साथ उन्हें हिंदी साहित्य और वैचारिक लेखन में भी विशेष रुचि है.

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