UP Politics: यूपी में इस वोट बैंक पर बीजेपी की नजर! 2022 चुनाव में हुआ था तगड़ा नुकसान, अब 2027 में नई रणनीति
UP Politics: उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी सभी किले दुरुस्त कर रही है. इसी क्रम में अब उसकी नजर उस वोट बैंक पर है जिसका असर लगभग 30 सीटों पर है.

UP Politics: उत्तर प्रदेश में वर्ष 2026 में पंचायत और साल 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं. इससे पहले भारतीय जनता पार्टी अपनी गलतियों को ठीक करने में लगी हुई है. भारतीय जनता पार्टी की कोशिश है कि वह सत्ता का सेमिफाइनल माने जा रहे पंचायत चुनाव में शानदार प्रदर्शन करे जिसका असर विधानसभा चुनाव के परिणामों में भी दिखे. माना जा रहा है कि पंचायत और विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी अब अपने सहयोगियों के हाथ भी इस तरह मजबूत करने में लगी है जिसका उसे भी लाभ मिले.
इसी कड़ी में मंगलवार, 10 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बहराइच में महाराजा सुहेलदेव की प्रतिमा का अनावरण किया. बता दें राजभर समाज, महाराजा सुहेलदेव को अपना आदर्श मानती है. दशकों बाद ऐसा हुआ है जब बहराइच में सालार मसूद गाजी की मजार पर लगने वाला मेला नहीं लगा. सरकार और बीजेपी का कहना है कि आक्रांताओं का मेला लगाकर उन्हें महामंडित करना इतिहास के साथ अन्याय है. इतना ही नहीं बीजेपी, इसी बहाने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को भी निशाने पर लेने से नहीं चूकती.
2022 में हुआ था नुकसान!
जानकारों की मानें तो वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी सपा के साथ गई और उसका नुकसान बीजेपी को उठाना पड़ा. दावा किया जाता है कि यूपी में करीब 30 विधानसभा सीटों और 10 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों पर राजभर जाति का असर है. लगभग 4 फीसदी मतों के साथ कई सीटों पर राजभर मतदाता निर्णायक होते हैं.
सुभासपा नेताओं का दावा है कि राज्य के 18 जिलों में उनकी जाति का असर है. इनमें वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, मऊ, बलिया, आजमगढ़, देवरिया, बस्ती, गोरखपुर, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संतकबीरनगर, अयोध्या, बहराइच और श्रावस्ती शामिल है.
बता दें जब सुभासपा ने भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए से नाता तोड़ा उसके बाद वर्ष 2022 में जब दोबारा सरकार बनी तब पार्टी की ओर से अनिल राजभर को योगी सरकार में मंत्री बनाया गया. ऐसे में बीजेपी भी इस बात से बखूबी वाकिफ है कि चुनावी राजनीति में राजभर समाज उसके लिए कितना जरूरी है. बीजेपी ने राजभर समाज से सकलदीप राजभर को राज्यसभा भी भेजा था. वर्ष 2018 से वर्ष 2024 तक वह राज्यसभा के सदस्य रहे.
बीजेपी की कोशिश है कि वर्ष 2022 के चुनाव में सुभासपा की गैरमौजूदगी का जो असर, पूर्वांचल की सीटों पर दिखा था, वह दोबारा न हो. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय जनता पार्टी, राजभर मतों को खुद से कितना जोड़ पाती है और बीजेपी की इन कोशिशों का लाभ उसके सहयोगियों को कितना लाभ मिलता है.
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