यूपी में विभागीय जांच का बदला स्वरूप, 10 बिंदुओं की चेकलिस्ट जारी
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीरो टॉलरेंस की नीति और पारदर्शी एवं जवाबदेह को सुनिश्चित करने के लिए बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने विभागीय जांच के लिए 10 बिंदुओं की चेकलिस्ट जारी की है.

यूपी सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति और पारदर्शी एवं जवाबदेही तय करने के लिए विभागीय जांच से जुड़ा एक बड़ा फैसला लिया है. समाज कल्याण विभाग ने इसके लिए नए मापदंड तय किए हैं. विभाग ने उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियम-7 के तहत होने वाली विभागीय जांचों के लिए मानकीकृत प्रारूप और 10 बिंदुओं की चेकलिस्ट जारी की है. इसके मकसद है निष्पक्ष जांच को बढ़ावा देना और लीपापोती पर कोई ढिलाई न देना. विशेष सचिव प्रवीण मिश्र ने इस संबंध में शासनादेश जारी किया है.
नए मापदंडों के प्रारूप के तहत जांच अधिकारियों को निर्धारित प्रक्रिया के प्रत्येक चरण का विधिवत अभिलेखीकरण करना होगा. इससे जांच आख्या की गुणवत्ता बेहतर होगी और शासन स्तर पर मामलों के परीक्षण में भी स्पष्टता आएगी.
CM योगी ने कबूला अयोध्या चुनाव चैलेंज तो सपा चीफ बोले- 'लोकसभा भूल गए क्या'
आरोपों की होगी स्वतंत्र जांच
नई व्यवस्था की खास बात यह है कि आरोपपत्र में दर्ज प्रत्येक आरोप का अलग-अलग परीक्षण किया जाएगा. जांच अधिकारी को आरोप, संबंधित अधिकारी के उत्तर, उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के परीक्षण के साथ मौखिक सुनवाई का विवरण भी दर्ज करना होगा. इसके आधार पर प्रत्येक आरोप के संबंध में स्पष्ट और कारणयुक्त निष्कर्ष दिया जाएगा. इससे विभागीय जांच प्रक्रिया अधिक तथ्यपरक और निष्पक्ष बनेगी.
10 बिंदुओं की चेकलिस्ट जारी
जांच आख्या के साथ 10 बिंदुओं की अनिवार्य चेकलिस्ट और अनुपालन प्रमाण-पत्र संलग्न करना जरूरी होगा. इसमें आरोपपत्र की तामीली, लिखित उत्तर, अभिलेखों के निरीक्षण का अवसर, गवाहों की जिरह और मौखिक सुनवाई सहित आवश्यक प्रक्रियाओं का विवरण शामिल होगा. निर्धारित प्रक्रियाओं का पूरा पालन नहीं होने पर जांच आख्या को पूर्णता के लिए वापस भेजा जा सकेगा. इससे जांच प्रक्रिया में गुणवत्ता और जिम्मेदारी दोनों सुनिश्चित होंगी.
जांच और दंड निर्धारण की भूमिका स्पष्ट
योगी सरकार ने जांच अधिकारी की भूमिका भी स्पष्ट कर दी है. जांच अधिकारी उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर आरोपों के सिद्ध, आंशिक रूप से सिद्ध या असिद्ध होने का निष्कर्ष देंगे. दंड के संबंध में निर्णय सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियमों के अनुसार लिया जाएगा. इससे विभागीय जांच में निष्पक्षता और संस्थागत प्रक्रिया मजबूत होगी.
CM योगी ने खोला विकास का पिटारा, बलरामपुर को मिलीं 803 करोड़ की 78 परियोजनाएं




















