बस्ती BJP में घमासान, पूर्व अध्यक्ष शैल त्रिपाठी के आरोपों पर जिलाध्यक्ष का पलटवार
बस्ती बीजेपी में गुटबाजी पूरे चरम पर है. पूर्व महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष शैल त्रिपाठी ने जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्रा पर उन्हें पद से हटवाने के गंभीर आरोप लगाया. दोनों ओर से बयानबाजी जारी है.

उत्तर प्रदेश के बस्ती में भारतीय जनता पार्टी के भीतर गुटबाजी और कलह अब खुलकर सामने आ गयी है. जिसमें महिला मोर्चा की पूर्व अध्यक्ष शैल त्रिपाठी द्वारा जिला अध्यक्ष विवेकानंद मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाए हैं. शैल त्रिपाठी ने आरोप लगाते हुए कहा कि जिलाध्यक्ष का महिला कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ व्यवहार सही नहीं है.
उधर इसके बाद जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्रा ने पलटवार करते हुए शैल त्रिपाठी पर अनुशासनहीनता और झूठ फैलाने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की बात कही है. विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी में इस तरह की गुटबाजी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. मामला शैल त्रिपाठी को पद से हटाए जाने के बाद तूल पकड़ गया है.
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क्या हैं आरोप ?
दरअसल 12 अक्टूबर को बीजेपी में शैल त्रिपाठी को महिला मोर्चा का जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया था. लेकिन इसके बाद 18 अक्टूबर को बिना उन्हें बताए पद से हटाकर मंजू श्रीवास्तव को जिलाध्यक्ष पद पर नियुक्त कर दिया गया था. शैली त्रिपाठी के मुताबिक यह सब विवेकानन्द मिश्रा ने यह करवाया है. उन्होंने आरोप लगाया कि इसके लिए प्रदेश अध्यक्ष सरोज कुशवाह ने उन पर दबाब भी बनाया था कि वे इस्तीफा दे दें. लेकिन जब उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया तो उन्हें बिना बताए हटा दिया गया था.
इसके साथ ही शैल त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि जिलाध्यक्ष बनाने के लिए संबंधित से दो लाख रुपए विवेकानंद मिश्रा ने बंद कमरे में लिए हैं. जबकि पार्टी में कई सक्रिय पदाधिकारी भी मौजूद थीं, उनमें से किसी को नहीं बनाया गया. यही नहीं उन्होंने अपने आरोपों में पार्टी के एक महामंत्री का भी नाम लिया है.
विवेकानंद मिश्रा का पलटवार
इस पूरे मामले पर अब भाजपा जिला अध्यक्ष विवेकानंद मिश्रा पलटवार किया है, उन्होंने शैल त्रिपाठी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत बताया है. जिला अध्यक्ष विवेकानंद मिश्रा ने दो टूक शब्दों में कहा है कि वह इस मामले में मानहानि और झूठे आरोप लगाने के लिए कानूनी रूप से एफआईआर दर्ज कराएंगे.
इसके अलावा उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि पार्टी स्तर पर अनुशासनहीनता और झूठी बयानबाजी करने के लिए शैल त्रिपाठी के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी. जिला अध्यक्ष ने सफाई देते हुए बताया कि पार्टी की जिला इकाई के द्वारा जो आधिकारिक लिस्ट भेजी गई थी, उसमें शैल त्रिपाठी का कहीं भी नाम शामिल नहीं था. इसके बावजूद उन्हें अध्यक्ष पद मिल गया था और जैसे ही इस प्रशासनिक त्रुटि या गड़बड़ी की जानकारी पार्टी नेतृत्व के सामने आई, तो तत्काल प्रभाव से सूची को संशोधित करते हुए उन्हें पद से हटा दिया गया. जिला अध्यक्ष का कहना है कि इसी बात से बौखलाकर और पद छिन जाने की वजह से शैल त्रिपाठी अब उनके ऊपर इस तरह के बेबुनियाद और गंदे आरोप लगा रही हैं.
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