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Gorakhpur में DDU के 44वें दीक्षांत समारोह का शुभारंभ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने छात्रों को दी डिग्री

Gorakhpur News: यूपी के गोरखपुर में दीन दयाल उपाध्याय विश्विद्यालय के 44वें दीक्षांत समारोह का शुभारंभ हुआ है. इस बीच पद्मश्री प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने शिरकत की है.

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय का 44वां दीक्षांत समारोह का शुभारंभ सोमवार 25 अगस्‍त को दोपहर 2.30 बजे से बाबा गम्भीरनाथ प्रेक्षागृह में विद्वत परियात्रा से हुआ. मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. आशुतोष शर्मा, इंस्टीट्यूट चेयर प्रोफेसर, आईआईटी कानपुर ने दीक्षांत व्याख्यान में मेधावी छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि सफलताएं कभी केवल व्यक्तिगत प्रयास का परिणाम नहीं होतीं, बल्कि वे टीमवर्क और सामूहिक सहयोग से संभव होती हैं. असफलताएं व्यक्ति की अपनी हो सकती हैं, लेकिन सफलताएं हमेशा साझा होती हैं. यही जीवन का सबसे बड़ा पाठ है.

 उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में साहसी, निडर और सहज बने रहें. युवा अपने भीतर सकारात्मक बदलाव लाने का साहस रखें. यही दृष्टिकोण भारत के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बनेगा. युवा केवल अच्छे पेशेवर ही नहीं, बल्कि संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं.

मुख्य अतिथि ने छात्रों को किया संबोधित 

 पद्मश्री प्रो. आशुतोष शर्मा ने कहा कि दीक्षांत केवल एक शैक्षणिक उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं है. यह विद्यार्थियों की मेहनत, धैर्य और संकल्प के साथ जीवन की नई यात्रा का प्रतीक है. जहां वे अपने कर्तव्यों और समाज के प्रति जिम्मेदारियों को स्वीकारते हैं. आज हम विज्ञान और सूचना क्रांति के युग में जी रहे हैं. यह युग नई संभावनाओं के साथ-साथ अनेक चुनौतियाँ भी लेकर आया है. 

उन्होंने कहा तकनीक के साथ मशीनों का उदय, वैश्वीकरण और समावेशी विकास जैसी चुनौतियां युवाओं के सामने हैं. इन चुनौतियों का सामना करने के लिए युवाओं को जुनून के साथ तकनीक में भी आगे बढ़ना होगा. उन्‍होंने कहा‍ कि ये समय भविष्‍य की चुनौतियों के साथ जीवन की नई यात्रा में आगे बढ़ने का उत्‍सव है.

आनंदीबेन पटेल ने छात्रों को किया प्रोत्साहित

कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि युवा देश के कर्णधार हैं और उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी राष्ट्र को आगे बढ़ाना है. उन्होंने स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी और कहा कि जिन्हें पदक नहीं मिला है. उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है. 

उन्होंने कहा कि हर विद्यार्थी के भीतर कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है, जिसे उजागर करने में शिक्षक, परिवार और मित्रों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. शिक्षण को सेवा बताते हुए उन्होंने कहा कि जब भी वे भ्रमण पर जाती हैं, तो छात्राएँ उन्हें अपनी ‘शिक्षिका’ के रूप में पहचानती हैं. यही एक शिक्षक का सबसे बड़ा गौरव है.

आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय को दिए ये सुझाव

उन्होंने विश्वविद्यालय को सुझाव दिया कि एमओयू के बाद वास्तविक गतिविधियाँ जैसे लेक्चर, एक्सचेंज, उद्योगों से सहयोग और अंतरराष्ट्रीय शोध साझेदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए. नेपाल और अन्य पड़ोसी देशों के विश्वविद्यालयों से अकादमिक सहयोग बढ़ाने की भी आवश्यकता है.

 उन्होंने कहा कि पेटेंट का व्यावसायीकरण होना चाहिए और उद्योगों को इस दिशा में जोड़ना चाहिए. राज्यपाल ने समर्थ पोर्टल के माध्यम से लगभग 200 करोड़ रुपये की बचत पर विश्वविद्यालय की सराहना की. साथ ही, 34 अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नामांकन पर बधाई देते हुए कहा कि यह नैक ए++ ग्रेड और एनआईआरएफ रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन का परिणाम है.

कुलपति ने गिनाई विश्वविद्यालय की उपलब्धियां

कुलपति प्रो. पूनम टण्डन ने अपने स्वागत भाषण में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समारोह केवल डिग्री प्रदान करने का नहीं, बल्कि नये भारत की शिक्षा यात्रा में मील का पत्थर है. उन्होंने कहा इस वर्ष 73 हजार से अधिक उपाधिधारियों में 68.53% बेटियाँ शामिल रहीं.

 वहीं 76 पदक विजेताओं में 56 छात्राएँ रही, यानी 73.33%. यह न सिर्फ बदलते समाज की तस्वीर है, बल्कि क्षेत्रीय शिक्षा में महिलाओं की सशक्त उपस्थिति का प्रमाण भी है. शोध के क्षेत्र में भी विश्वविद्यालय ने रिकॉर्ड बनाया. इस वर्ष 301 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि दी गई, जो अब तक की सर्वाधिक संख्या है.

विश्वविद्यालय में शुरू हुए नए कोर्स

पिछले वर्ष यह आंकड़ा 166 और उससे पूर्व मात्र 25 था. कुलपति ने इसे शोध संस्कृति और नवाचार का प्रमाण बताया. वैश्विक स्तर पर विश्वविद्यालय ने आठ अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों (अमेरिका, मलेशिया, नेपाल व बांग्लादेश) से सहयोग स्थापित किया है.

इसी सत्र में 34 विदेशी छात्र विश्वविद्यालय से जुड़े हैं. नई शिक्षा नीति 2020 की भावना को आत्मसात करते हुए विश्वविद्यालय ने B.Sc. Agriculture in Natural Farming जैसे अभिनव कोर्स शुरू किये हैं. यह संस्थान देश का पाँचवां विश्वविद्यालय है जिसने यह पहल की है.

छात्रों को प्रदान की गई उपाधि

मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. आशुतोष शर्मा, इंस्टिट्यूट चेयर प्रोफेसर, आईआईटी कानपुर को विश्‍वविद्यालय की ओर से मानद डी.एससी. की उपाधि प्रदान की गई. समारोह में शहर के गणमान्य व्यक्तियों, शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं अन्य सहभागियों ने भाग लिया.

कुलाधिपति द्वारा समारोह में कुल 76 विद्यार्थियों को पदक प्रदान किए गए, जिनमें 56 छात्राएं और 20 छात्र शामिल थे. विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक 71 और डोनर पदक 90 प्रदान किए गए. कुल 161 मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया. गतवर्ष 43वें दीक्षांत समारोह में 55 विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक और 85 डोनर पदक प्रदान किए गए थे.

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