Garhmukteshwar: खतरे के निशान पर पहुंची गंगा, बज्रघाट के गांवों में घुसा पानी, ग्रामीणों में डर
Garhmukteshwar News: यूपी के गढ़मुक्तेश्वर में गंगा नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है जिसके बाद आसपास के गावों में अब पानी घुसना शुरू हो गया है.

यूपी की तीर्थनगरी गढ़मुक्तेश्वर में गंगा अपने रौद्र रूप में दिखाई देने लगी हैं. यहां गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है. और ऐसे में गंगा का पानी गंगा के घाटों से सटे गांवों में प्रवेश कर रहा है. गंगा किनारे रहने वाले ग्रामीणों को उनकी फसलों और पशुओं के लिए चारे के साथ-साथ गांव में अपने खान-पान और जान-माल की चिंता सताने लगी है.
ऐसे में प्रशासन की ओर से दावा किया जा रहा है कि बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन ने पूरी तरह से अपने इंतजामात कर लिये हैं और ग्रामीणों को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी. आपको बता दें कि पहाड़ी तथा मैदानी क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बरसात और बिजनौर बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण तीर्थनगरी गढ़मुक्तेश्वर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार करते हुए 199.10 तक पहुंच गया है.
डीएम ने दी यह जानकारी
हापुड़ के डीएम अभिषेक पाण्डेय ने बताया कि भले ही गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है, लेकिन अभी बाढ़ के निशान से 0.2 मीटर नीचे है. लेकिन ऐसे में प्रशासन ने बाढ़ की संभावना को मद्देनजर रखते हुए अपने इंतजामों को चुस्त-दुरूस्त कर लिया है. बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया गया है और प्रशासनिक अधिकारियों की टीमें ग्रामीणों की सहायता के लिए गांवों में भेज दी गई हैं.
आपको बता दें कि ब्रजघाट में गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण तीर्थनगरी में गंगा से सटे गांवों और जंगलों में गंगा का पानी प्रवेश कर गया है. ऐसे में ग्रामीणों की फसलें और पशुओं के लिए चारा गंगा के पानी में पूरी तरह से जलमग्न हो गया है. साथ ही साथ गांवों का रास्तों पर भी पानी भर गया है. ऐसे में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए ग्रामीणों को पानी में होकर ही गुजरना पड़ रहा है. ग्रामीणों को डर सता रहा है कि गंगा का पानी उनके खेतों के साथ-साथ गांवों में प्रवेश न कर जाए, अगर ऐसा हुआ, तो हालात और बिगड़ जाएंगे.
ग्रामीणों को सतर्क और सावधान रहने के दिए निर्देश
वहीं, जिलाधिकारी अभिषेक पाण्डेय ने बताया कि गंगा से सटे गांव लठीरा और मढ़ैया आदि में गंगा का पानी निचले इलाकों में प्रवेश कर गया है. ऐसे में उन्होंने ग्रामीणों को सावधान किया है कि वह पशुओं के चारे और फसल के लिए न तो खुद जंगलों और खेतों में जाएं और न ही अपने पशुओं को वहां जाने दें. डीएम ने बताया कि उनके और पुलिस कप्तान के द्वारा देर रात गंगा से सटे खादर के इलाकों का निरीक्षण किया गया था.
निरीक्षण के दौरान बाढ़ प्रभावित इलाकों में बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया गया है. साथ ही ग्रामीणों के पशुओं के लिए चारे, मेडिकल और अन्य सभी व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली हैं. ऐसे में ग्रामीणों को किसी तरह से परेशान होने की जरूरत नहीं है. गांवों के निकास द्वार पर बोट का इंतजाम करने के साथ-साथ नाविकों की ड्यूटी लगाई गई है. गंगा का जलस्तर अभी ऊंची आबादी से दूर है, यदि गांव में गंगा का जल प्रवेश करता भी है, तो ग्रामीणों को किसी तरह से घबराने की आवश्यकता नहीं है.
प्रशासनिक अधिकारियों को किया तैनात
वह कंट्रोल रूम पर संपर्क कर प्रशासनिक टीम की मदद ले सकते हैं. डीएम ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारियों की टीमों को बाढ़ प्रभावित इलाकों में तैनात कर दिया गया है. वहीं, लठीरा गांव के ग्रामीण सतपाल गौतम ने बताया कि गंगा का जल गांवों में आने की वजह से किसानों का काफी नुकसान हुआ है. पशुओं के चारे के साथ-साथ किसानों की फसल भी पूरी तरह से जलमग्न हुई हैं. प्रशासन की तरफ से कोई राहत मिलना तो दूर, अभी यहां गांव में कोई निरीक्षण के लिए भी नहीं आया है.
ग्रामीण बसंता यादव ने बताया कि गांव ने गंगा जी का पानी भर गया है. जिसके कारण हमारा पशुओं का चारा गल रहा है . इसलिए हम समय से पहले ही इसको काट रहे है. गांव के चारों और पानी भर गया है. अब गांव में भी एक दो घंटे में पानी बढ़ सकता है. प्रशासन की तरफ से कोई भी यहां नहीं पहुंचा है.
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Source: IOCL





















