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छुट्टियों में भी घर नहीं जाना चाहते छात्र, ये हैं भारत के सबसे खूबसूरत स्कूल

भारत में कुछ खास स्कूल ऐसे भी हैं, जहां एक बार जाने के बाद छात्रों का घर आने का मन ही नहीं करता है. तो आइए जानते कहां-कहां हैं ये स्कूल...

भारत में पढ़ाई का मतलब सिर्फ क्लासरूम, किताबें और परीक्षा ही नहीं है. देश में कई ऐसे बोर्डिंग स्कूल हैं, जहां पढ़ाई के साथ-साथ प्रकृति, रोमांच और दोस्ती का ऐसा माहौल मिलता है कि बच्चे छुट्टियों में भी घर लौटने का मन नहीं बनाते.

पहाड़ों की ठंडी हवा, हरियाली, समंदर की लहरें, खेल, ट्रेकिंग और सांस्कृतिक कार्यक्रम छात्रों के जीवन को खास बना देते हैं. यही वजह है कि इन जगहों पर पढ़ने वाले छात्र स्कूल और कॉलेज को अपना दूसरा घर मानने लगते हैं. अगर आप भी जानना चाहते हैं कि भारत में कौन-कौन से ऐसे स्कूल और कॉलेज हैं, जहां पढ़ाई के साथ जिंदगी का असली मजा मिलता है, तो आइए जानते हैं...

दून स्कूल, देहरादून

उत्तराखंड के देहरादून में स्थित दून स्कूल देश के सबसे नामी बोर्डिंग स्कूलों में से एक है. यहां पढ़ाई के साथ-साथ नेतृत्व, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों पर जोर दिया जाता है. स्कूल का कैंपस काफी बड़ा और हरा-भरा है. आसपास के पहाड़, खुले मैदान और शांत वातावरण बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं. यहां होने वाले नाटक, संगीत और खेल कार्यक्रम छात्रों को आत्मविश्वास से भर देते हैं, इसलिए छुट्टियों में भी वे स्कूल से दूर जाने का मन नहीं बनाते.

वुडस्टॉक स्कूल, मसूरी

मसूरी की पहाड़ियों में स्थित वुडस्टॉक स्कूल एक जाना-माना इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूल है. यहां भारत के साथ-साथ कई दूसरे देशों के छात्र पढ़ाई करते हैं. इस स्कूल में पढ़ाई के अलावा कला, संगीत, खेल और आउटडोर एक्टिविटी पर भी ध्यान दिया जाता है. पहाड़ों के बीच कैंपिंग, ग्रुप एक्टिविटी और दोस्ती का माहौल बच्चों को खास अनुभव देता है. यही कारण है कि छात्र यहां खुद को खुश और सुरक्षित महसूस करते हैं और छुट्टियों में भी घर जाने की जल्दी नहीं करते.

लॉरेंस स्कूल, सनावर

हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों में बसा लॉरेंस स्कूल, सनावर भारत के सबसे पुराने बोर्डिंग स्कूलों में से एक है. इसकी स्थापना साल 1847 में हुई थी. यह स्कूल शिमला से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित है. यहां पढ़ाई के साथ-साथ खेल, नैतिक शिक्षा और अनुशासन पर खास ध्यान दिया जाता है. स्कूल के आसपास हरियाली, पहाड़ और खुले मैदान हैं, जहां छात्र ट्रेकिंग, कैंपिंग और खेलों का भरपूर आनंद लेते हैं. ठंडा मौसम और शांत माहौल बच्चों को इतना पसंद आता है कि छुट्टियों में भी वे स्कूल छोड़ने का मन नहीं बनाते.
बिशप कॉटन स्कूल, शिमला

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में स्थित बिशप कॉटन स्कूल भी एक पुराना और प्रसिद्ध बोर्डिंग स्कूल है. यह स्कूल अपनी मजबूत पढ़ाई, अनुशासन और खेल गतिविधियों के लिए जाना जाता है. यहां हॉर्स राइडिंग, पर्वतारोहण और आउटडोर गेम्स का अच्छा मौका मिलता है. पहाड़ों के बीच बसे इस स्कूल का माहौल बच्चों को प्रकृति से जोड़ता है. पढ़ाई और एडवेंचर का यह मेल छात्रों को स्कूल से गहरा जुड़ाव महसूस कराता है.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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