UP में ब्राह्मण नाराज! 15 जिलों की 100 से ज्यादा सीटों पर असर, BJP के लिए क्यों जरूरी है ये 10% वोट?
UP Politics: लखनऊ में हुई ब्राह्मण विधायकों की बैठक के बाद ब्राह्मण की भूमिका और उसकी नाराजगी को लेकर सियासत तेज है. आइए जानें क्या कहता है पंकज चौधरी का यूपी भाजपा अध्यक्ष बनना और ब्राह्मण वोट बैंक.

उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी के ब्राह्मण विधायकों की एक अहम बैठक के बाद राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई है. यह बैठक 22 दिसंबर शाम कुशीनगर से बीजेपी विधायक पंचानंद पाठक के लखनऊ आवास पर हुई, जिसे उनकी पत्नी के जन्मदिन और सह-भोज के रूप में बताया गया.
यह बैठक यूपी की जातीय राजनीति, ब्राह्मणों के महत्व और आगामी 2027 विधानसभा चुनावों के लिहाज से देखा जाए तो अहम होगा क्योंकि कुछ ही दिन पहले यूपी में ही ठाकुर बीजेपी विधायकों की बैठक हुई थी और माना जा रहा है कि कुर्मी समाज से आने वाले पंकज चौधरी को यूपी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बनाने के बाद ब्राह्मणों को अपना दबदबा कम होने का एहसास हो रहा है. इसी बीच आइए जानें क्या है ब्राह्मण वोटबैंक, राजनीतिक आंकड़े और इस बैठक के मायने.
ब्राह्मण विधायकों की बैठक में क्या हुआ?
यूपी में ठाकुर बीजेपी विधायकों की बैठक के बाद अब ब्राह्मण विधायकों का कुटुम्ब तैयार होने की चर्चा है. इस बैठक में मिर्जापुर विधायक रत्नाकर मिश्रा और एमएलसी उमेश द्विवेदी की अहम भूमिका बताई जा रही है. खास बात यह रही कि इसमें बीजेपी के साथ-साथ अन्य दलों के ब्राह्मण विधायक भी शामिल हुए.
सूत्रों के मुताबिक बैठक में करीब 45 से 50 विधायक और एमएलसी मौजूद थे, जबकि यूपी विधानसभा में कुल 52 ब्राह्मण विधायक हैं, जिनमें से 46 भाजपा से हैं. लिट्टी चोखा और मंगलवार व्रत का फलाहार परोसा गया, वहीं नृपेन्द्र मिश्रा के बेटे और एमएलसी साकेत मिश्रा की मौजूदगी ने बैठक को और चर्चा में ला दिया.
क्या कहते हैं ब्राह्मण वोटबैंक और राजनीतिक आंकड़े?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाता करीब 8 से 10 फीसदी माने जाते हैं. प्रदेश की 110 से अधिक विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां ब्राह्मण मतदाताओं का प्रभाव निर्णायक माना जाता है. करीब 12 जिले ऐसे हैं, जहां ब्राह्मण आबादी 15% से अधिक है, जिनमें बलरामपुर, बस्ती, संत कबीर नगर, महाराजगंज, गोरखपुर, देवरिया, जौनपुर, अमेठी, वाराणसी, चंदौली, कानपुर और प्रयागराज प्रमुख हैं.
CSDS लोकनीति के अनुसार 2022 विधानसभा चुनाव में ब्राह्मणों का 89% वोट BJP को मिला, जबकि समाजवादी पार्टी को 6 फीसदी और कांग्रेस को 1 फीसदी समर्थन मिला. 2017 में भी भाजपा को 83% ब्राह्मण वोट मिले थे, जो इस वर्ग के मजबूत समर्थन को दर्शाता है.
उपरोक्त आंकड़े देखें तो यह स्पष्ट है कि बीजेपी के लिए यह वोट बैंक हर कीमत पर जरूरी है. इसकी नाराजगी बीजेपी के लिए घाटे का सौदा हो सकती है.
.यूपी में ब्राह्मणों की बैठक एक, मायने अनेक
राजनीतिक विशेषज्ञों के नजरिये से देखा जाए तो इस बैठक के कई मायने निकलते हैं. दावा किया जाता है कि हालिया सियासी परिदृश्य और जातीय राजनीति में ब्राह्मणों की आवाज दबती जा रही है और इसी कारण उनके मुद्दों को उठाने के लिए यह जुटान हुई होगी. हालांकि बैठक में शामिल विधायकों का दावा है कि इसका उद्देश्य किसी नाराजगी को जाहिर करना नहीं, बल्कि पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव और सामाजिक विषयों पर चर्चा करना था.
फिर भी राजनीतिक हलकों में इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है, खासकर तब जब भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कुर्मी समुदाय से आने वाले पंकज चौधरी को जिम्मेदारी सौंपी है. माना जा रहा है कि यह बैठक ब्राह्मण वोटबैंक के प्रभाव, उसकी ताकत और भविष्य की रणनीति को समझने की एक कोशिश है, जो आने वाले समय में यूपी की राजनीति में नए संकेत दे सकती है.
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