यूपी के इस सबसे बड़े आयुर्वेदिक चिकित्सालय में हो रहा है कोरोना मरीजों का सफल इलाज
यूपी के पीलीभीत में सबसे पुराना और बड़ा आयुर्वेदिक चिकित्सालय है. यहां जड़ी बूटियों से तैयार काढ़ा प्रदेश ही नहीं देश के कई अन्य हिस्सों में भेजा जा रहा हैं. ये आयुष काढ़ा कोरोना से बचने के लिये प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में काफी मददगार साबित हो रहा है.

पीलीभीत. यूपी का पहला सबसे प्राचीन व विशाल आयुर्वेदिक चिकित्सालय पीलीभीत में है. यहां फार्मेसी में जडी बूटियों से निर्मित आयुर्वेदिक दवा पूरे उत्तर प्रदेश से लेकर भारत के कई जिलों में भेजी जाती है. यही नहीं, पीलीभीत के राजा साहब के कर कमलों द्वारा उनके ही नाम पर ललित हरी आयुर्वेदिक कॉलेज की स्थापना सन् 1899 में की गई थी. कहा जाता है इस महाविद्यालय से आयुर्वेद की शिक्षा प्राप्त कई क्रांतिकारी व अपने क्षेत्र में बड़े बड़े पदों पर पहुंच कर उपाधि हासिल की है.
महाविद्यालय से निकले प्रतिष्ठित पदों तक पहुंचे
पीलीभीत के निवासी डाक्टर विनोद तिवारी ने यहां से बीएमएस की पढ़ाई कर कल्याण सिंह के समय मे प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री का पद भी सम्भाला. यह यूपी का पहला ऐसा महाविद्यालय है जहां प्रदेश की सबसे अनोखी हारवेरियम गार्डन कई एकड़ में फैला, तराई के जंगलों से सटा हिमालय में होने के चलते पीलीभीत का आयुर्वेदिक चिकित्सालय व महाविद्यालय अपने आप में सबसे महान ख्याति पूर्ण माना जाता है.
कोरोना मरीजों का सफल इलाज
महामारी काल के समय में यूपी का पहला आयुर्वेदिक चिकित्सालय एवं महाविद्यालय है, जिसको कोविड सेंटर के रूप में बनाकर उसमें शत प्रतिशत कोरोना संक्रमित मरीजों को ठीक ही नहीं किया बल्कि भारत सरकार की गाइड लाइन के अनुसार अपनी जड़ी बूटियों से बनाया गया स्पेशल काढ़े को यहां बनवाकर पूरे प्रदेश के कई जिलों में भेजा जा रहा है. यहां प्रतिदिन कई हजार बॉक्स की मात्रा में इम्यूनिटी बूस्टर के तौर पर कढ़ा तैयार करके भेजा जा रहा है.
कई तरह की जड़ी बुटियां परिसर में हैं
आपको बता दें पीलीभीत जिले का पहला सबसे प्राचीनतम आयुर्वेदिक महाविद्यालय है. जहां पर करीब 10 एकड़ फैले इस कैंपस में अपना हरबेरियम गार्डन है, जहां करीब 500 से अधिक प्रजातियों की जड़ी बूटियां पाई जाती हैं. साथ ही सबसे बड़ी फार्मेसी भी है, जिसमे कई हजार प्रकार की दवाइयों को फार्मेसी में निर्मित कर प्रतिदिन होने वाली दो से ढाई हजार से अधिक ओपीडी मरीजों को उपलब्ध करवाकर उन्हें ठीक किया जाता है. इन दिनों फंगल इंफेक्शन व लीवर के लिए विशेष तौर पर काम किया जा रहा है. साथ ही आयुष काढ़ा, पंचपुट तेल, कुरिष्ठा रिष्ट, अम्सलीय चूर्ण, सहित कई प्रकार की जड़ी बूटियों से दवाएं तैयार की जा रही हैं.
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