लखनऊ में अधिकारियों के सामने छलका शहीद की मां का दर्द, शौर्य लौटाने की कही बात
लखनऊ में शौर्य चक्र विजेता शहीद सहायक कमांडेंट स्व. विवेक सक्सेना की 80 वर्षीय मां सावित्री सक्सेना अपनी वर्षों पुरानी फरियाद लेकर अधिकारियों के पास पहुंचीं और अधिकारियों के सामने अपनी पीड़ा बयां की.

लखनऊ के सरोजनीनगर तहसील में शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में शौर्य चक्र विजेता शहीद सहायक कमांडेंट स्व. विवेक सक्सेना की 80 वर्षीय मां सावित्री सक्सेना अपनी वर्षों पुरानी फरियाद लेकर पहुंचीं. बुजुर्ग मां ने शहीद बेटे के परिवार को आवंटित भूमि से जुड़े मामले का जल्द निस्तारण कराने की मांग की.
शहीद की मां सावित्री सक्सेना लखनऊ के सरोजिनी नगर स्थित दरोगा खेड़ा की कृष्ण लोक कॉलोनी में रहती है. वह अपने बड़े बेटे रंजीत सक्सेना के साथ समाधान दिवस में पहुंचीं. उन्होंने अधिकारियों को बताया कि उनके बेटे सहायक कमांडेंट विवेक सक्सेना 8 जनवरी 2003 को मणिपुर में आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए थे. उनकी वीरता के लिए उन्हें शौर्य चक्र और राष्ट्रपति पुलिस पदक (वीरता) से सम्मानित किया गया था.
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शहीद के परिवार को जमीन का शासनादेश
सावित्री सक्सेना के मुताबिक, शहीद के परिवार को भूमि आवंटन का शासनादेश जारी हुआ था, लेकिन इसके बावजूद वर्षों से मामला एक विभाग से दूसरे विभाग के बीच घूम रहा है. उन्होंने कई बार आईजीआरएस के जरिए भी शिकायत की, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी.
मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति से मुलाकात की मांग
80 वर्षीय सावित्री ने अधिकारियों के सामने अपनी पीड़ा रखते हुए कहा कि उम्र के इस पड़ाव पर लगातार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाना उनके लिए मुश्किल हो गया है. उन्होंने राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री से मुलाकात का समय दिलाने की भी मांग की. उनका कहना है कि सरकारी इससे अच्छा सम्मान वापस ले ले.
'सम्मान भी वापस करने की अनुमति दिलाई जाए'
सावित्री सक्सेना ने सरकार से शौर्य चक्र के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दी गई सम्मान धनराशि, शौर्य चक्र और राष्ट्रपति पुलिस पदक को सम्मानपूर्वक वापस करने की अनुमति दिलाने की मांग भी रखी. उन्होंने कहा कि शहीद बेटे की कुर्बानी और परिवार को मिले सम्मान के बावजूद अगर उनके जायज हक के लिए उन्हें वर्षों तक भटकना पड़े तो यह बेहद पीड़ादायक है.
वहीं, एसडीएम अभिषेक सिंह ने संबंधित अधिकारियों को शिकायतों की जांच कर एक सप्ताह के भीतर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए.
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