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बांदा जेल में इंतजाम से असंतुष्ट हैं बड़े अफसर, मुख्तार अंसारी को दूसरी जेल में रखने की कर सकते हैं सिफारिश

माफिया व बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यूपी लाया जा रहा है. लेकिन इस बीच सरकार के बड़े अफसर बांदा जेल में सुरक्षा के इंतजाम से खुश नहीं हैं.

प्रयागराज: बाहुबली मुख्तार अंसारी से जुडी बड़ी ख़बर सामने आई है. इसके मुताबिक, मुख़्तार को ज़्यादा दिनों तक बांदा जेल में नहीं रखा जाएगा. सुरक्षा कारणों से मुख्तार को बांदा जेल में रखने के पक्ष में पुलिस के अफसर नहीं हैं. अफसरों की टीम ने बांदा जेल के मुआयने के बाद शासन से मुख्तार को यहां की जेल में नहीं रखने की सिफारिश की है.

रिपोर्ट के मुताबिक, बांदा जेल में कोई हाई सिक्योरिटी बैरक नहीं है. जेल में अभी कोई स्पेशल बैरक भी नहीं है जिसमे हाई प्रोफाइल अपराधी को रखा जा सके. बांदा जेल में वर्तमान में क्षमता से दो गुना ज़्यादा कैदी बंद हैं.

क्षमता से ज्यादा हैं कैदी

इसके अलावा बांदा जेल में गंभीर बीमारी वाले कैदियों के इलाज के लिए स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स और अस्पताल भी नहीं हैं. बांदा जेल की क्षमता 567 कैदियों को रखने की है, जबकि इस समय वहां ग्यारह सौ के करीब कैदी बंद हैं.

यही नहीं, जेल की बाहरी सुरक्षा व्यवस्था भी बहुत भरोसे लायक नहीं है. वरिष्ठ अधिकारियों की टीम मुख्तार को बांदा जेल में रखने के कत्तई पक्ष में नहीं है. नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर एक बड़े अधिकारी ने एबीपी न्यूज को शासन से सिफारिश की Exclusive जानकारी दी है.

जेल की व्यवस्थाओं से सरकारी अमला संतुष्ट नहीं है

मुख्तार के मामले की गंभीरता को देखते हुए बांदा जेल की सुरक्षा व्यवस्था से सरकारी अमला संतुष्ट नहीं है. वहीं, अफ़सरों की राय है कि, बांदा जेल में लाए जाने के बाद मुख्तार को किसी सेंट्रल जेल में ही रखा जाए. मुख्तार को लाने के मद्देनज़र बांदा जेल में कई व्यवस्थाओं में बदलाव भी कराया गया है. यहां लगे सीसीटीवी कैमरों को चेक किया गया. इस बार बैरक नंबर 15 में मुख्तार को नहीं रखा जाएगा. पिछली बार मुख्तार अंसारी को इसी बैरक में रखा गया था.

सुरक्षा कारणों से अलग बैरक तैयार की जा रही है. कई बड़े अफसर बांदा जेल का मुआयना कर चुके हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक़ मुख्तार को सबसे पहले बांदा जेल ही लाया जाना है. आगे किस जेल में रखा जाना है, इसका फैसला प्रयागराज की स्पेशल एमपी एमएलए कोर्ट को करना है. सरकारी अमला स्पेशल कोर्ट में मुख्तार को बांदा जेल में नहीं रखे जाने की सिफारिश कर सकता है.

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मोहम्मद मोईन को पत्रकारिता का करीब तीन दशक का अनुभव है. वह प्रिंट - इलेक्ट्रानिक और डिजिटल तीनों ही माध्यमों में सालों तक काम कर चुके हैं. ABP नेटवर्क से वह पिछले करीब 18 सालों, स्टार न्यूज़ के समय से ही जुड़े हुए हैं. राजनीति - धर्म और लीगल टापिक के साथ सम सामयिक विषयों के एक्सपर्ट हैं. पत्रकार होने के साथ ही राजनीतिक विश्लेषक, एक्सपर्ट पैनलिस्ट, आलोचक और टिप्पणीकार भी हैं. इनकी चुनावी भविष्यवाणी ज्यादातर मौकों पर सटीक साबित हुई है. 8 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव कवर कर चुके हैं. 7 कुंभ और महाकुंभ की कवरेज कर अपनी अलग पहचान बनाई है. यह अपनी बेबाक- निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. मोहम्मद मोईन ने चार विषयों पत्रकारिता एवं जनसंचार, राजनीति विज्ञान, हिंदी और मध्यकालीन व आधुनिक इतिहास विषयों में मास्टर डिग्री यानी स्नातकोत्तर किया हुआ है. लॉ ग्रेजुएट भी हैं. देश के कई राज्यों में काम करने का अनुभव रखते हैं. देश की तमाम नामचीन हस्तियों का इंटरव्यू ले चुके हैं और कई चर्चित घटनाओं को कवर चुके हैं. 

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