संभल में फिर चला बुलडोजर, कब्रिस्तान की जमीन पर अवैध मस्जिद जमींदोज, शिया बोर्ड ने जताई नाराजगी
Sambhal News: संभल में सरकारी कब्रिस्तान की जमीन पर मस्जिद और ईदगाह बनाने की डीएम से शिकायत दर्ज की गई थी. जमीन की पैमाइश के बाद पता चला कि ये ढांचे गैर-कानूनी तरीके से बनाए गए थे.

उत्तर प्रदेश के संभल में एक और अवैध मस्जिद पर बुलडोज़र एक्शन हुआ हुआ हैं. मंगलवार को पुलिस प्रशासन ने कोर्ट के आदेश पर सरकारी जमीन पर बनी कथित तौर पर अवैध मस्जिद और ईदगाह को गिरा दिया गया. ये कार्रवाई असमोली पुलिस स्टेशन इलाके में भारी सुरक्षा के बीच की गई.
अधिकारियों ने बताया कि सबसे पहले ईदगाह की 25 फुट ऊंची मीनार को गिराया गया जबकि बाकी ढांचे को गिराने का काम दोपहर तक चलता रहा. इस दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आसपास के इलाकों के लोगों को मौके पर इकट्ठा होने से रोकने के लिए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा.
जिला प्रशासन के मुताबिक, सरकारी कब्रिस्तान की जमीन पर मस्जिद और ईदगाह बनाने को लेकर तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट के पास शिकायत दर्ज कराई गई थी. जमीन की पैमाइश के बाद पता चला कि ये ढांचे गैर-कानूनी तरीके से बनाए गए थे.
संभल में एक और मस्जिद पर बुलडोजर
इसके बाद, तहसीलदार की अदालत ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के प्रावधानों के तहत दोनों ढांचों को गिराने का आदेश दिया. संभल के जिला मजिस्ट्रेट अंकित खंडेलवाल ने कहा कि गांव में कब्रिस्तान के लिए आरक्षित सरकारी जमीन पर गैर-कानूनी कब्जा करने की कोशिश की जा रही थी. इस मामले की सुनवाई तहसीलदार की अदालत में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत हुई. सुनवाई के बाद, कब्जे को गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया.
डीएम ने कहा कि ऐसे संकेत भी मिले थे कि जमीन पर प्लॉट विकसित करने की कोशिश की जा रही थी. लगभग 10.5 बीघा जमीन को कब्जे से मुक्त कराया गया है. यह हाईवे के किनारे की कीमती जमीन है, जिसकी कीमत कम से कम 5 करोड़ रुपये आंकी गई है. प्रशासन ने अब जमीन का कब्जा ले लिया है और इसका इस्तेमाल सरकारी और जन-कल्याण के कामों के लिए किया जाएगा.
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शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने जताई नाराजगी
प्रशासन की इस कार्रवाई पर ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने आपत्ति जताई है. बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि संभल में ग्राम सभा की जमीन पर बनी ईदगाह को गिराना गलत है. यह तय करना अदालत का काम है कि यह कानूनी है या गैरकानूनी. जिला कलेक्टर को एक अर्जी दी गई थी, जिन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से गैर-कानूनी है.
प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई उचित कानूनी प्रक्रिया के बाद तहसीलदार कोर्ट के आदेश के पालन में की गई थी और मुक्त कराई गई जमीन का इस्तेमाल सरकारी और जन-कल्याण के कामों के लिए किया जाएगा.























