खुद को जिंदा साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा संजय, अब DM ने दिया आश्वासन
Raebareli News In Hindi: हरचंदपुर थाना क्षेत्र के चकसूंडा के रहने वाले संजय कुमार खुद को जिंदा साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं. हालांकि, डीएम ने उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया है.

रायबरेली में प्रशासनिक अधिकारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई है, यहां अधिकारियों के रहमों-करम से एक जीवित व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड मृत घोषित कर दिया. जब संबंधित व्यक्ति को खुद के मृत होने की जानकारी हुई तो वह सदमे में पड़ गया, अब बेचारा खुद को जिंदा साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है. हालांकि, जिलाधिकारी ने पीड़ित को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है.
दरअसल, जिले के हरचंदपुर थाना क्षेत्र के चकसूंडा के रहने वाले संजय कुमार सिंह पिछले लगभग 35 वर्षों से जल निगम विभाग लखनऊ में बतौर संविदा नौकरी कर रहे हैं. वह छुट्टी वाले दिन अपने गांव चकसूंडा आकर खेती-बाड़ी व परिवार संभालते हैं. बताया गया कि, जब संजय कुमार सिंह अपने आधार कार्ड में मोबाइल नंबर लिंक कराने जन सेवा केंद्र पहुंचे तो पता चला कि उनका आधार कार्ड निरस्त हो चुका है.
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सरकारी रिकॉर्ड में संजय कुमार दर्शाया मृत
आधार सेंटर में संजय कुमार सिंह को बताया गया कि उनको मिलने मिलने वाली सारी सुविधाएं समाप्त हो चुकी है. आधार सेंटर संचालक ने उन्हें बताया कि कम्प्युटर में दिखा रहा है कि आपको अपडेट करने की अनुमति नहीं है, क्योंकि आपको मृत घोषित कर दिया गया है. इसके बाद संजय कुमार के पैरों तले जमीन खिसक गई, और वह खुद को जिंदा साबित करने के लिए पंचायत सेक्रेटरी से लेकर खंड विकास अधिकारी के दरवाजे तक कई बार चक्कर काट चुके हैं.
फरियादी ने कलेक्टर को सुनाई अपनी पीड़ा
सरकारी अधिकारियों से निराशा हाथ लगने के बाद फरियादी संजय कुमार सिंह कलेक्टर की चौखट पर पहुंचे, संजय ने जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका से अपनी पीड़ा बताई और अपने को पुनर्जीवन देने के लिए गुहार लगाई. जिलाधिकारी ने अपने मातहतों को सख्त निर्देश देते हुए 4 दिन के भीतर उसे पुनर्जीवित करने की बात कही. जिलाधिकारी के आश्वासन के बाद संजय कुमार सिंह को जैसे नए जीवन की आस जगी है.
कागजों में मृत घोषित किए जाने के बाद बंद हुईं सारी सुविधाएं
संजय कुमार सिंह का कहना है कि सारे अभिलेखों में मुझे मृत घोषित करने के बाद मुझे मिलने वाली सारी सुविधाएं भी समाप्त कर दी गई है. मेरे बच्चे हैं मैं उनकी परवरिश व देखभाल बिना इन अभिलेखों के कैसे कर पाऊंगा. पीड़ित ने भरोसा जताया है कि जिलाधिकारी ने आश्वस्त किया है कि जो गलती है, उसमें सुधार कर आपको पुनः लाइफ सर्टिफिकेट दिया जाएगा. इसके साथ ही संजय सिंह ने संबंधितों पर कार्रवाई की मांग की है.
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