यूपी: उफनते नाले में बारातियों से भरी बोलेरो बही, युवकों ने जान जोखिम में डालकर बचाईं 6 जिंदगियां
Mahoba News In Hindi: महोबा में उफनते नाले में बारातियों से भरी बोलेरो बह गई. तौफीक, शफीक और साथियों ने नदी में कूदकर दूल्हे के पिता समेत छह लोगों की जान बचाई. PWD की लापरवाही पर भी सवाल उठे हैं.

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले से इंसानियत और भाईचारे की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया. खन्ना थाना क्षेत्र के सिरसीकला गांव के पास श्याम नाला की उफनती धारा में बारातियों से भरी एक बोलेरो कार बह गई.
बोलेरो में दूल्हे के पिता रामऔतार समेत छह लोग सवार थे. देखते ही देखते खुशियों से भरा सफर मौत के मुहाने पर पहुंच गया, लेकिन स्थानीय युवकों की बहादुरी ने बड़ा हादसा टाल दिया.
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मुस्लिम युवकों ने जान की परवाह किए बिना नदी में लगाई छलांग
हादसे के वक्त आसपास मौजूद स्थानीय युवक तौफीक, शफीक, इरफान, जमशेद, दीनदयाल और अन्य लोगों ने चीख-पुकार सुनते ही बिना देर किए उफनती नदी में छलांग लगा दी. तेज बहाव और मुश्किल हालात के बीच करीब डेढ़ घंटे तक चले राहत अभियान के बाद सभी छह बारातियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. ग्रामीणों की इस बहादुरी ने यह साबित कर दिया कि संकट की घड़ी में इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म होता है. हर कोई इन युवकों की हिम्मत और जज्बे की सराहना कर रहा है.
निर्माणाधीन पुल और बिना बैरिकेडिंग के रास्ते ने बढ़ाया खतरा
जानकारी के अनुसार चिचारा गांव निवासी रामऔतार के पुत्र रोहित की बारात बांदा जिले के मसारी गांव जा रही थी. सिरसीकला गांव के पास निर्माणाधीन पुल के कारण बनाए गए वैकल्पिक रास्ते से गुजरते समय तेज बहाव में बोलेरो अनियंत्रित होकर नाले में बह गई. स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुल का निर्माण पिछले करीब एक वर्ष से चल रहा है, लेकिन पीडब्ल्यूडी विभाग और ठेकेदार ने खतरनाक मार्ग पर न तो बैरिकेडिंग की और न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाया. लगातार बारिश के बावजूद सुरक्षा इंतजाम न होने से बड़ा हादसा हो गया.
पुलिस ने निकाली कार, विभागीय लापरवाही पर उठे सवाल
घटना की सूचना मिलते ही खन्ना थाना प्रभारी धर्मेंद्र सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे. ग्रामीणों की मदद से ट्रैक्टर बुलाकर बोलेरो को भी नाले से बाहर निकाला गया. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पुल निर्माण की धीमी रफ्तार और सुरक्षा मानकों की अनदेखी लंबे समय से लोगों की जान जोखिम में डाल रही है.
राहत की बात यह रही कि इस हादसे में सभी बाराती सुरक्षित बच गए, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर सरकारी लापरवाही और बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. वहीं, तौफीक, शफीक और उनके साथियों की बहादुरी ने सांप्रदायिक सौहार्द और इंसानियत की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है.
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