प्रयागराज: धूमनगंज हत्याकांड में 19 साल बाद इंसाफ, तीन दोषियों को उम्रकैद और जुर्माना
Prayagraj News:मामला 15 अगस्त 2006 को सामने आया था, जब मारियाडीह निवासी मोहम्मद आसिफ ने धूमनगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी.रिपोर्ट के मुताबिक,साबिर और मुन्नू की बदरे नामक युवक से कहासुनी हो गई थी.

UP News: प्रयागराज के धूमनगंज इलाके में 2006 में हुई हत्या के एक चर्चित मामले में कोर्ट ने 19 साल बाद फैसला सुनाते हुए तीन सगे भाइयों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. एसीजेएम (प्रथम) कुमारी अनीता की अदालत ने उमरी गांव के रहने वाले मुन्नू, साबिर और रमजानी को दोषी करार देते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई. कोर्ट ने तीनों पर 10,000-10,000 का जुर्माना भी लगाया है.
इसके अलावा आईपीसी की धारा 307/34 (हत्या के प्रयास) के तहत उन्हें 7-7 वर्ष की सश्रम सजा और 5,000-5,000 का जुर्माना भी भुगतना होगा. सजा सुनाए जाने के बाद तीनों दोषियों को कोर्ट से ही जेल भेज दिया गया.
ये है पूरा मामला
यह मामला 15 अगस्त 2006 को सामने आया था, जब मारियाडीह निवासी मोहम्मद आसिफ ने धूमनगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ दिन पहले बमरौली के एक होटल पर साबिर और मुन्नू की बदरे नामक युवक से कहासुनी हो गई थी. मामला शांत हो गया था, लेकिन 30 अगस्त 2006 को बदरे अपने साथी समून के साथ कचहरी से लौट रहा था.
दोपहर करीब दो बजे जब दोनों एक नर्सिंग होम के पास पान खाने रुके, तभी मुन्नू, साबिर और रमजानी बाइक से पहुंचे और बदरे को ललकारते हुए गोली चला दी. हमले में समून को गोली लगी और वह मौके पर गिर गया. अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. वहीं बदरे जान बचाकर पास खड़ी कार की आड़ में छिप गया.
दो दशक बाद आया फैसला
करीब दो दशक बाद आए इस फैसले से मृतक के परिजनों को न्याय मिला है. कोर्ट का यह फैसला साफ संदेश देता है कि अपराध चाहे जितना पुराना क्यों न हो, कानून के शिकंजे से बच पाना संभव नहीं.परिजनों ने कोर्ट का धन्यवाद दिया है. कोर्ट ने इस दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और सुबूतों के आधार पर फैसला सुनाया.
(प्रयागराज से सौरभ मिश्रा की रिपोर्ट)
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