Ghaziabad News: गाजियाबाद के संयुक्त जिला अस्पताल में बड़ी लापरवाही, गरीबों को दी जाने वाले लाखों की दवाएं हुईं बेकार
Ghaziabad News: गाजियाबाद के संयुक्त अस्पताल में लाखों रुपयों की दवाईयों को बेकार कर दिया गया है. इनमें से ज्यादातर वो दवाईयां थी जिनकी कोरोना काल में सबसे ज्यादा जरुरत थी.

Ghaziabad News: गाजियाबाद (Ghaziabad) के संयुक्त जिला अस्पताल (Sayunkt District Hospital) में भ्रष्टाचार का ऐसा मामला सामने आया है जहां लाखों रुपयों की दवाईयों को बेकार कर दिया गया है. इन दवाईयों को मरीजों को नहीं दिया गया और जब इनकी एक्सपायरी डेट निकल गई तो चुपचाप इन दवाईयों को आईसोलेशन वार्ड की छत पर ले जाकर फेंक दिया. हैरानी की बात तो ये है कि इनमें से ज्यादातर वो दवाईयां थी जिनकी कोरोना काल (Covid 19) में सबसे ज्यादा जरुरत थी. कई मरीजों ने तो इन दवाईयों के न मिलने की वजह से दम तक तोड़ दिया था.
लाखों की दवाईयां बर्बाद
इन दवाइयों में एंटीबायोटिक में एजिथ्रोमाइसिन, एमाक्सीक्लेव, एमाक्सीलिन हैं. पेट दर्द की डाइसाइक्लोनेट, खून बंद करने की ईथामाइसिलेट, मधुमेह की ग्लिम्प्रीडीन, मलेरिया और बुखार की आरटुशिनेट, सांस फूलने पर नेमुलाइजर करने की दवाई डुआलीन, डिहाइड्रेशन होने पर चढ़ाई जाने वाली ग्लूकोज की बोतल आईवी-5 डिक्सट्रोज डी-5, आरएल, मल्टीविटामिन एनवीआई इंजेक्शन सहित अन्य दवाइयों के इंजेक्शन और गोलियां शामिल हैं. इनमें से ज्यादातर दवाईयों की एक्सपायरी डेट मई 2021 है.
स्वास्थ्य विभाग ने कही जांच की बात
ये वो अहम दवाईयां हैं जिनकी कोरोना काल में सख्त जरुरत थी. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर क्यों इन दवाईयों को खराब होने के लिए अस्पताल में पड़े रहने दिया गया. वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं हो पाई, मामला गंभीर है, इसकी जांच कराई जाएगी. अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विनोद चंद्र पांडेय का कहना है कि जानकारी करने पर पता चला है कि सभी दवाइयां अप्रैल से मई 2021 के बीच की एक्सपायरी तिथि है. इस मामले की जांच के लिए टीम का गठन कर दिया गया है.
जानिए क्या कहते हैं मरीज
इस बारे में जब एबीपी गंगा के संवाददाता ने संयुक्त जिला अस्पताल में जाकर वहां आ रहे मरीजों से बातचीत की, तो उन्होंने अस्पताल के बड़े-बड़े डॉक्टरों पर ही आरोप लगाए और अपने हाथ में उन पर्चियों को दिखाया जिसमें डॉक्टरों ने बाहर से लाने के लिए दवाईयां लिखीं थी. उन्होंने कहा कि ये सभी दवाईयां हम बाहर से खरीद रहे हैं. उन्होंने बताया कि अस्पताल से गिनी-चुनी दवाईयां ही दी जाती हैं. अक्सर डॉक्टर साहब बाहर मेडिकल स्टोर से दवाइयां लिखते हैं. जिनको खरीदना हमारे लिए मुश्किल होता है.
अस्पताल की लापरवाही पर उठे सवाल
गरीब लोग सरकारी अस्पताल में इसलिए आते हैं ताकि डॉक्टर की फीस और दवाइयां बिना पैसों के मिल सके. अब ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये भी है कि डॉक्टर आखिर मरीजों को बाहर की दवाईयां क्यों लिखते हैं जबकि अस्पताल में ये पड़ी-पड़ी एक्सपायर हो रही हैं. क्या इसमें किसी तरह का भ्रष्टाचार हो रहा है, अस्पताल की लापरवाही पर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं.
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Source: IOCL






















