महाकुंभ के बाद त्रिवेणी संगम के जल की विदेशों में बढ़ी मांग, इस देश में भेजी गईं 1000 बोतल
Maha Kumbh 2025: महाकुंभ 2025 में लगभग 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान था और त्रिवेणी संगम में स्नान करना प्रत्येक श्रद्धालु की इच्छा होती है.

Maha Kumbh Triveni Sangam Water: प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ 2025 के दिव्य और भव्य आयोजन के पश्चात, त्रिवेणी संगम के पावन जल की मांग अब विदेशों से भी आने लगी है. हाल ही में, जर्मनी में रहने वाले हिंदू परिवारों के लिए संगम का पवित्र गंगाजल भेजा गया है. यह पहल जसरा की नारी शक्ति महिला प्रेरणा संकुल स्तरीय समिति द्वारा की गई, जिन्होंने श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी के माध्यम से कांच की 250 मिलीलीटर की 1,000 बोतलों में गंगाजल जर्मनी भेजा. यह गंगाजल उन श्रद्धालुओं के लिए भेजा गया जो किसी कारणवश महाकुंभ में शामिल नहीं हो सके.
महाकुंभ 2025 में लगभग 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान था, और त्रिवेणी संगम में स्नान करना प्रत्येक श्रद्धालु की इच्छा होती है. योगी सरकार ने इस अवसर पर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को गंगाजल की पैकेजिंग और वितरण की जिम्मेदारी सौंपी थी. प्रयागराज के जसरा क्षेत्र की नारी शक्ति महिला प्रेरणा संकुल समिति की प्रभारी नमिता सिंह के अनुसार, महाकुंभ के दौरान और उसके बाद, उनकी समिति ने अब तक 50,000 से अधिक बोतलों में गंगाजल की पैकेजिंग और वितरण किया है. हाल ही में, नागपुर की शिव शंभू ग्रुप सोसायटी को 500 मिलीलीटर की 50,000 बोतलों में गंगाजल भेजा गया है.
यूपी के सभी 75 जिलों में पहुंचा त्रिवेणी संगम का पवित्र जल
महाकुंभ के दौरान, प्रदेश सरकार ने अग्नि शमन विभाग के माध्यम से उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में त्रिवेणी संगम का पवित्र जल पहुंचाया था, ताकि जो लोग महाकुंभ में शामिल नहीं हो सके, वे भी इस पवित्र जल का लाभ उठा सकें. इसके अतिरिक्त, असम के गुवाहाटी स्थित परम शिवम शिव मंदिर योगाश्रम के संत राजा रामदास ने निजी टैंकर के माध्यम से संगम का जल ले जाने के लिए अग्नि शमन विभाग से सहयोग प्राप्त किया था.
महेवा गांव की महिलाओं ने डिजाइनर डलियों का किया निर्माण
गंगाजल की पैकेजिंग के लिए प्रयागराज के ‘एक जिला, एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना के तहत मूंज से बनी इको-फ्रेंडली डलियों का उपयोग किया गया. नैनी के महेवा गांव की महिलाओं ने इन डिजाइनर डलियों का निर्माण किया, जिससे न केवल गंगाजल की सुरक्षित पैकेजिंग सुनिश्चित हुई, बल्कि स्थानीय महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता भी मिली.
देश-विदेश में व्यापक रूप से स्वीकार किया जा रहा त्रिवेणी संगम
महाकुंभ 2025 ने न केवल आध्यात्मिकता का संदेश दिया, बल्कि नारी सशक्तिकरण और स्थानीय उत्पादों के प्रोत्साहन का भी उदाहरण प्रस्तुत किया. त्रिवेणी संगम के पवित्र जल की बढ़ती मांग से यह स्पष्ट होता है कि इसकी महिमा देश-विदेश में व्यापक रूप से स्वीकार की जा रही है.
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