लाखों का पैकेज छोड़कर आधयात्म की राह पर बाबा अभय पुरी, यूरोप में कर रहे हैं सनातन धर्म का प्रचार
महाकुंभ में यूरोप में सनातन धर्म का प्रचार प्रसार करने वाले अभय पुरी बाबा ने अपना जीवन को लेकर काफी कुछ बताया. उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने वन विभाग अधिकारी के रूप में भी काम किया था.

Maha Kumbh 2025: महाकुंभ के अलग-अलग स्वरूप एबीपी न्यूज़ के माध्यम से आप पढ़ रहे हैं. एबीपी न्यूज़ अलग-अलग साधु संतों महात्माओं की कहानी आपको सुना रहा है. जिन संतों की सनातन के प्रति विशेष आस्था है. एक ऎसे ही संन्यासी से हमारी मुलाकात हुई जिन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी और अब वह यूरोप में रहकर सनातन धर्म का प्रचार प्रसार कर रहे हैं. इनका नाम है अभय पुरी महाराज.
अभय पूरी महराज ने अपने जीवन के बारे में एबीपी न्यूज़ से बातचीत में बताया कि बचपन में उनके पिता का स्वर्गवास हो गया था. सन 1974 में उनके पिता का स्वर्गवास हुआ. उस समय नौकरी करने में वो समर्थ नहीं थे. उनकी माता बूढ़ी थी, बहन भाई थे जमीन थी जिसको सब देखना था तो इसलिए बचपन से कठोर परिस्थितियों उन्होंने देखी. उन्होंने कहा वो सनातनी हैं, सनातन में पैदा हुए हैं और सनातन में ही उनका विश्वास है. क्योंकि सनातन एक ऐसा धर्म है इसका ना कोई अंत है और ना ही कोई आरंभ है इसलिए इसे सनातन कहते हैं .
रामराज्य चाहिए तो गाय को राष्ट्रमाता बनाना पड़ेगा- अभय पुरी महाराज
उन्होंने कहा आज लोग रामराज की बात करते हैं पर राम का राज्य तभी होगा जब हमारी गौ माता राष्ट्र माता बनेगी. राम के राज्य में क्या कोई दुखी था, तो राम तो आ गए टेंट से अपने मंदिर में पर हम गाय को राष्ट्रमाता बनाना भूल रहे हो तो कैसे रामलाल खुश होंगे. उन्होंने अपने बारे में बताया कि वो फॉरेस्ट डिपार्टमेंट राजस्थान में थे. पर अब संन्यास के बाद उस विषय पर कोई चर्चा नहीं करना चाहते. उनके परिवार के लोग सरकारी डिपार्टमेंट में काम करते हैं और सब संतुष्ट हैं.
संन्यास लेने के विषय पर उन्होंने कहा कि मुझे अपने पुराने अधूरे काम पूरा करने के लिए इस संन्यासी जीवन में आना पड़ा. हमारे गुरु महाराज अवतरित संत हैं. जयराम पुरी जी महाराज और उनके शिष्य शंकरपुरी जी महाराज दोनों ने जीवित समाधि ली है. आज से हजारों साल पहले तो दोनों गुरु शिष्यों ने एक साथ समाधि ली थी और आज उन्हीं के स्वरूप में हीरापुरी जी महाराज है. इनकी मुझ पर बड़ी कृपा रही है. उन्होंने कहा उन्होंने भले ही एक परिवार छोड़ा है पर अब पूरी दुनिया उन्होंने अपना ली हैं. आज सब घर अपने है.
आजकल यूरोप में कर रहे सनातन का विस्तार
उन्होंने बताया कि वो आजकल यूरोप में हैं और वहां सनातन को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं. वो अपने गुरु महाराज की शिक्षा को लोगों तक पहुंचा रहे हैं. उन्होंने बताया कि पहले नागा संन्यासी टहलते नहीं थे नदी नहीं पार करते थे पर आज वसुधैव कुटुंबकम के भाव से सब अलग-अलग जगह जाते हैं. अपने धर्म का प्रचार प्रसार कर सकते हैं और इसीलिए अपना धर्म का प्रचार प्रसार में यूरोप में कर रहा हूं.
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