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Lucknow News: एलडीए अध्यक्ष के अधिकारों को लेकर बढ़ा विवाद, कमिश्नर रंजन कुमार पर लगे ये आरोप

उत्तर प्रदेश में लखनऊ विकास प्राधिकरण के शीर्ष अधिकारियों में अधिकारों को लेकर ठन गई है. इसके अध्यक्ष पर काम में हस्तक्षेप करने के आरोप लग रहे हैं.

UP News: लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के अध्यक्ष कमिश्नर रंजन कुमार और पूर्व चीफ इंजीनियर इंदु शेखर सिंह में घमासान के बीच एक और विवाद खड़ा हो गया है. यह विवाद एलडीए के अध्यक्ष के अधिकारों को लेकर है. एलडीए के अधिकारियों और कर्मचारियों में इस बात को लेकर असंतोष भी है कि कमिश्नर रंजन कुमार अथॉरिटी के कामों में बिना वजह हस्तक्षेप करते हैं. एलडीए सूत्रों का कहना है कि अथॉरिटी के अध्यक्ष के अधिकारों को लेकर कई बार विवाद हुआ है. यही वजह है शासन स्तर पर इसे लेकर एक स्पष्ट आदेश और गाइडलाइन जारी की गई है.

क्या कहता है शासनादेश?

शासनादेश के मुताबिक प्राधिकरण का अध्यक्ष बोर्ड बैठक की अध्यक्षता करेगा. कार्यक्रमों की प्रगति समीक्षा करेगा और विभिन्न धाराओं में विकास प्राधिकरण के अधिकारियों द्वारा लिए गए निर्णयों के विरुद्ध अपील की सुनवाई करेगा. अध्यक्ष को न्यायालय के अधिकार दिए गए हैं इसलिए उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि वह प्राधिकरण के सामान्य दायित्व या निर्णय के भागीदार या अनुमोदनकर्ता नहीं बनेंगे. आदेश में साफ है कि कहीं-कहीं प्राधिकरण में यह प्रथा चल गई है कि मुख्य कार्यक्रमों एवं पत्रावली में भी अध्यक्ष का अनुमोदन प्राप्त कर कार्रवाई की जाती है. यह गैरकानूनी है. उपाध्यक्ष आवश्यक मामलों में प्राधिकरण के निदेशक मंडल का मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे. 

शासन के आदेश के खिलाफ हर बैठक में जाते हैं अध्यक्ष

हालांकि, इस शासन के आदेश के बाद भी रंजन कुमार एलडीए की हर बैठक में शामिल होते रहे हैं. सबसे चर्चित प्रबंधनगर योजना की डीपीआर बनाने संबंधी बैठक थी जिसमें कंसल्टेंट की नियुक्ति होनी थी. इस बैठक में कमिश्नर रंजन कुमार भी पहुंच गए. डीपीआर बनाने के लिए तीन कंपनी अरीनेम कंसल्टेंट्स, स्काईलाइन आर्किटेक्चरल और वेपकोज लिमिटेड ने दावेदारी की थी. बैठक में शामिल अधिकारियों को हर कंपनी को अधिकतम 25-25 नंबर देने थे.

स्काईलाइन को लेकर हो रहा है विवाद

कमिश्नर ने स्काईलाइन आर्किटेक्चरल कंपनी को 25 में से 24 नंबर दिए थे. एलडीए सूत्रों का कहना है कि कमिश्नर चाहते थे कि डीपीआर बनाने का काम स्काईलाइन आर्किटेक्चरल कंपनी को ही मिले. सूत्रों का यह भी कहना है कि कमिश्नर के 25 में से 24 नंबर देने के बाद एलडीए के अधिकारियों पर दबाव बन गया और उन्होंने भी स्काईलाइन को ज्यादा से ज्यादा नंबर दिए. इंदु शेखर सिंह ने स्काईलाइन कंपनी को 25 में से 19 नंबर दिए थे. एलडीए के मुख्य नगर नियोजक ने सबसे कम 16 नंबर दिए थे. अधिकारियों के ज्यादा नंबर मिलने से स्काईलाइन कंपनी का चयन हुआ था. हालांकि, तत्कालीन चीफ इंजीनियर इंदु शेखर सिंह ने देवपुर पारा आवास योजना में एमएमआईजी, एमआईजी और ईडब्ल्यूएस फ्लैटों के निर्माण में लापरवाही और अनियमितताओं के चलते स्काईलाइन को कई नोटिस दिए थे.

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इन आरोपों का भी सामना कर रहे अध्यक्ष

पूर्व चीफ इंजीनियर इंदु शेखर सिंह ने कमिश्नर व एलडीए के अध्यक्ष रंजन कुमार पर कई और आरोप भी लगाए हैं. उन्होंने कहा जब से कमिश्नर को एलडीए का अध्यक्ष बनाया गया है तब से उन्होंने अवस्थापना की एक भी बैठक नहीं कराई जबकि साल में दो बार अवस्थापना की बैठक होनी चाहिए. यही नहीं, जनहित से जुड़े 218 करोड़ रुपए के काम भी अटका दिए. इनमें सीजी सिटी, गोमती नगर विस्तार, बसंत कुंज योजना, शारदा नगर की सड़क, बंधा रोड, पंपिंग स्टेशन शामिल हैं. अवस्थापना निधि से कराए जाने वाले इन कामों का प्रस्ताव 8 महीने पहले तैयार किया गया था. कमिश्नर ने तीन महीने बाद इन फाइलों को लौटा दिया.

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