UP: जिला पंचायत अध्यक्ष पद चुनाव को लेकर एक्टिव मोड में अखिलेश यादव, जीत को लेकर बनाई गई रणनीति
यूपी के 57 जिलों में ही 3 जुलाई को वोट डाले जाएंगे. क्योंकि, 18 जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष का निर्विरोध निर्वाचन तय है. इसमें भी 17 सीटें बीजेपी के पास जा रही हैं और एक सीट पर ही केवल समाजवादी पार्टी को जीत मिल रही है.

लखनऊ: जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर शनिवार को नामांकन होने के बाद अब 57 जिलों में 3 जुलाई को वोट डाले जाएंगे. क्योंकि, नामांकन के बाद 18 जिलों में उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय है. जिनमें, 17 बीजेपी के और एक सपा का उम्मीदवार है. अब जिन 57 जिलों में वोटिंग होनी है उनमें 41 जिलों में बीजेपी और समाजवादी पार्टी की सीधी टक्कर है. ऐसे में रविवार को अखिलेश यादव ने इस चुनाव में पार्टी की रणनीति को तय करने के लिए दो जिलों के जिला पंचायत अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों और पार्टी के जीते हुए सदस्यों के साथ बैठक की. बैठक में चुनाव की रणनीति तय की गई. जिला पंचायत अध्यक्ष पद का ये चुनाव 2022 से पहले प्रदेश में होने वाले कुछ नए सियासी समीकरणों की ओर भी इशारा कर रहे हैं.
57 जिलों में 3 जुलाई को वोट डाले जाएंगे
शनिवार को जिस तरीके से जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर नामांकन के दौरान कई जगहों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अपना पर्चा ही नहीं दाखिल कर पाए उसके बाद अखिलेश यादव ने कड़ी कार्रवाई करते हुए 11 जिलों के अपने पार्टी के जिला अध्यक्षों को पद से हटा दिया. नामांकन के बाद जो तस्वीर निकलकर सामने आई है उसके मुताबिक अब केवल 57 जिलों में ही 3 जुलाई को वोट डाले जाएंगे. क्योंकि, 18 जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष का निर्विरोध निर्वाचन तय है. इसमें भी 17 सीटें बीजेपी के पास जा रही हैं और एक सीट पर ही केवल समाजवादी पार्टी को जीत मिल रही है.
जारी है बैठकों का दौर
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ये रणनीति तैयार करने में जुटे हैं कि 57 जिलों में किस तरीके से सपा का जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाया जाए, इसे लेकर बैठकों का दौर भी जारी है. रविवार को लखनऊ में पार्टी कार्यालय पर अखिलेश यादव ने गाजीपुर और अमेठी जिलों के जिला पंचायत अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों को और पार्टी के जिला पंचायत वार्ड के सदस्यों को बुलाया था, उनके साथ अखिलेश यादव ने बैठक की और चुनावी रणनीति पर चर्चा हुई है.
कांग्रेस के सीनियर लोगों से बातचीत कर रहे हैं
बैठक के बाद बाहर निकले अमेठी से पार्टी के विधायक और अमेठी में समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार शीलम सिंह के पति राकेश प्रताप सिंह ने साफ तौर पर कहा कि अमेठी में समाजवादी पार्टी को ही जीत मिलेगी. वहीं, उनसे जब ये पूछा कि क्या कांग्रेस भी उन्हें सपोर्ट करेगी तो उन्होंने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष इस पर कांग्रेस के सीनियर लोगों से बातचीत कर रहे हैं.
रायबरेली का चुनावी समीकरण
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए चुनाव उत्तर प्रदेश में साल 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भी कुछ नए सियासी समीकरणों की ओर इशारा कर रहे हैं. इन चुनावों में कुछ नई सियासी खिचड़ी पकेगी, इसके भी संकेत मिल रहे हैं. क्योंकि, रायबरेली में समाजवादी पार्टी ने पहले अपने पूर्व विधायक रामलाल अकेला के बेटे को जिला पंचायत अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया था, लेकिन चर्चा है कि 2 दिन पहले अखिलेश यादव के दिल्ली दौरे के बाद पार्टी ने कल अपने उम्मीदवार को रायबरेली में नामांकन करने से मना कर दिया.
सपा करेगी सपोर्ट
पूरे प्रदेश में कांग्रेस ने केवल रायबरेली में ही जिला पंचायत अध्यक्ष पद का उम्मीदवार उतारा है, ऐसे में अब सियासी सुगबुगाहट तेज है कि शायद प्रियंका गांधी वाड्रा ने रायबरेली सीट के लिए अखिलेश यादव से बात की और उसके बाद ही ये तय हुआ कि रायबरेली में समाजवादी पार्टी अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी बल्कि कांग्रेस को सपोर्ट करेगी और उसके बदले में कांग्रेस अमेठी में समाजवादी पार्टी को सपोर्ट करेगी.
बीजेपी पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप
नामांकन के बाद समाजवादी पार्टी ने बीजेपी पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया था और उसका दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल राज्य निर्वाचन आयोग जाकर अधिकारियों से मिला भी था. लेकिन, उसके तुरंत बाद ही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने 11 जिला अध्यक्षों को पद से हटा दिया था. अब ऐसे में समाजवादी पार्टी की ओर से कोई भी इसपर कुछ बोलने को तैयार नहीं है कि अगर शासन सत्ता के दबाव के चलते उनके उम्मीदवार नामांकन नहीं कर पाए तो फिर गाज जिला अध्यक्षों पर क्यों गिरी.
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