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Chile Megadrought: इस देश में दशकों से पड़ रहा सूखा, जानें लोगों को कहां से मिल रहा पानी?

Chile Megadrought: दुनिया में एक ऐसा देश भी है जहां 15 से ज्यादा साल से सूखा पड़ रहा है. आइए जानते हैं कौन सा है वह देश और वहां पानी की जरूर को कैसे पूरा किया जा रहा है?

Chile Megadrought: 15 से ज्यादा सालों से चिली एक ऐसे पानी के संकट से जूझ रहा है जिसे मेगाड्रॉट कहा जाता है. 2010 के आसपास शुरू हुआ यह सूखा अब इस इलाके में लगभग 1000 सालों में सबसे लंबा और सबसे गंभीर माना जाता है. नदियां सिकुड़ गई हैं और जलाशय सूख गए हैं. आइए जानते हैं कि यहां के लोगों को पानी कैसे मिल रहा है.

सूखा इतने लंबे समय तक क्यों रहा?

वैज्ञानिक चिली के लंबे सूखे की वजह प्राकृतिक जलवायु चक्र और इंसानों की वजह से होने वाले जलवायु परिवर्तन के मेल को मान रहे हैं. ला नीना और पेसिफिक डेकेडल ऑसिलेशन के ठंडे चरण जैसे मौसम के पैटर्न ने बारिश को काफी कम कर दिया. इस समय प्रशांत महासागर में लगातार गर्म पानी के एक बड़े हिस्से ने उच्च दबाव वाली प्रणालियों बनाई, जिन्होंने बारिश के बादलों को देश तक पहुंचने से रोक दिया. इतना ही नहीं बल्कि ग्लोबल वार्मिंग ने मुश्किल को और भी ज्यादा बढ़ा दिया. बढ़ते तापमान ने एंडीज ग्लेशियरों के पिघलने की गति को तेज कर दिया है.

कैसे मिल रहा है लोगों को पानी?

उत्तरी और तटीय चिली में समुदायों ने कोहरे पकड़ने वाले कुछ जाल लगाए हैं. यह बड़े जालीदार जाल हैं जो पहाड़ी इलाकों में लगाए जाते हैं. यह जाल घने कोहरे से नमी को फंसाते हैं और पानी की बूंद को पाइप के जरिए स्टोरेज टैंक में पहुंचाते हैं. एक अकेला जाल हर दिन 1500 लीटर से ज्यादा पानी इकट्ठा कर सकता है. 17,000 वर्ग मीटर का कोहरे का जाल एक पूरे शहरी झुग्गी बस्ती की साप्ताहिक पानी की ज़रूरतों को पूरा कर सकता है.

इसके अलावा 2025 तक उत्तरी शहर एंटोफगास्टा पहला बड़ा चिली शहर बन गया जो पीने के लिए लगभग पूरी तरह से विलवणीकृत समुद्री पानी पर निर्भर था. आज देश भर में 24 से ज्यादा ऐसे संयंत्र चालू है. इसके अलावा कई ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में अभी भी मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है. यहां पीने का पानी ट्रकों से आता है. ये टैंकर सरकार और प्राइवेट ठेकेदारों द्वारा चलाए जाते हैं.

गंदे पानी की रीसाइकलिंग 

चिली ने अपने जस्ट वॉटर ट्रांजिशन फ्रेमवर्क के तहत गंदे पानी की रीसाइकलिंग को भी अपनाया है. किचन, बाथरूम और सीवेज प्लांट से ट्रेड किए गए पानी का इस्तेमाल खेती और इंडस्ट्रियल कामों के लिए किया जाता है. इससे ताजे पानी के भंडार पर दबाव कम होता है.

ये भी पढ़ें: दवा बनाने वाली Cipla कंपनी का कौन है मालिक, इसका किस धर्म है वास्ता?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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