'सरकार चलाएगी तो होगा बड़ा नुकसान', JPNIC विवाद पर बोला LDA
लखनऊ में बनी JPNIC को लेकर एलडीए ने दावा किया है कि यदि इसे निजी कंपनी चलाती है तो प्राधिकरण को आर्थिक फायदा होगा, जबकि सरकार खुद इसे चलाएगी तो लंबे समय में बड़ा नुकसान हो सकता है.

- सरकारी संचालन से 555 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान संभव.
लखनऊ में समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान बने जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को निजी हाथों में देने के फैसले को लेकर विवाद जारी है. इसी बीच लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने JPNIC को सरकारी और निजी तरीके से चलाने का हिसाब सामने आया है. LDA का दावा है कि अगर JPNIC को निजी कंपनी चलाती है तो प्राधिकरण को आर्थिक फायदा होगा, जबकि सरकार खुद इसे चलाएगी तो लंबे समय में बड़ा नुकसान हो सकता है.
निजी कंपनी को देने पर 439 करोड़ की कमाई का अनुमान
LDA सूत्रों के मुताबिक, JPNIC का संचालन निजी कंपनी को देने पर प्राधिकरण को शुरुआत में 10 करोड़ रुपये मिलेंगे. इसके अलावा निजी कंपनी को कम से कम 135 करोड़ रुपये अपने स्तर से खर्च करने होंगे.
LDA ने 30 साल के हिसाब से अनुमान लगाया है कि निजी कंपनी के जरिए JPNIC चलाने पर करीब 439 करोड़ रुपये की कमाई हो सकती है. इस व्यवस्था में JPNIC के रखरखाव और रोजाना के खर्च की जिम्मेदारी निजी कंपनी की होगी. रिपोर्ट के मुताबिक, निजी कंपनी करीब 9 साल में अपना लगाया हुआ पैसा निकाल सकती है. इसके बाद उसकी कमाई शुरू होने का अनुमान है.
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LDA खुद चलाएगा तो 555 करोड़ का नुकसान
अगर JPNIC को LDA खुद चलाता है तो शुरुआत में करीब 150 करोड़ रुपये लगाने होंगे. इसके बाद अगले 30 साल में इसके संचालन और रखरखाव पर करीब 1739 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. LDA के हिसाब से 30 साल बाद करीब 49 करोड़ रुपये की कमाई तो हो सकती है, लेकिन पूरे खर्च और पैसे की मौजूदा कीमत को जोड़कर देखें तो करीब 555 करोड़ रुपये का नुकसान बैठता है.
सरकार को पैसा लौटाना पड़ा तो नुकसान और बढ़ेगा
LDA ने एक और स्थिति का हिसाब लगाया है. अगर आने वाले 30 साल में सरकार को करीब 821 करोड़ रुपये वापस करने पड़े, तो नुकसान और बढ़ सकता है. LDA की रिपोर्ट में इस स्थिति में करीब 3723 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है. यानी प्राधिकरण का कहना है कि इस हिसाब से JPNIC को सरकारी तरीके से चलाना आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं होगा.
निजी कंपनी से 80% तक इस्तेमाल का अनुमान
LDA ने JPNIC के इस्तेमाल यानी यहां होने वाली बुकिंग और कार्यक्रमों का भी अनुमान लगाया है. रिपोर्ट के मुताबिक, अभी LDA के संचालन में IGF की ऑक्यूपेंसी करीब 20 फीसदी है. सरकारी तरीके से संचालन होने पर इसके 40 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि निजी कंपनी को संचालन देने पर यह 80 फीसदी तक पहुंच सकती है.
2016 में भी निजी कंपनी को मिला था संचालन
LDA की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि साल 2016 में JPNIC के संचालन और रखरखाव का काम M/S Fortuna को 15 साल के लिए दिया गया था. उस समय कंपनी को हर साल कम से कम 3.15 करोड़ रुपये या कुल कमाई का 18 फीसदी, जो भी ज्यादा हो, LDA को देना था.
LDA का कहना है कि निजी कंपनी को JPNIC चलाने की जिम्मेदारी देने से प्राधिकरण पर निवेश और रखरखाव का बोझ कम होगा. वहीं, सरकारी तरीके से संचालन करने पर लंबे समय में भारी आर्थिक नुकसान होने का अनुमान है.
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