Lok Sabha Elections 2024: कन्नौज में अखिलेश यादव और सुब्रत पाठक की टक्कर? जानें इस सीट का सियासी समीकरण
Kannauj Lok Sabh Seat Equation: कन्नौज लोकसभा सीट समाजवादी पार्टी का गढ़ रही है. 2019 को छोड़ दें तो साल 1998 से 2019 तक लगातार इस सीट पर सपा का ही कब्जा रहा है.

Lok Sabha Elections 2024: उत्तर प्रदेश की कन्नौज लोकसभा सीट सुर्खियों में आज गई है. सूत्रों के मुताबिक समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव इस सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. 25 अप्रैल को वो यहां से नामांकन पत्र भरेंगे. इससे पहले सोमवार को ही सपा ने तेज प्रताप यादव को कन्नौज से प्रत्याशी बनाया था लेकिन अब उनका टिकट कट सकता है. सियासी गलियारों में चर्चा है कि कन्नौज लोकसभा सीट से सपा मुखिया अखिलेश यादव चुनाव लड़ सकते हैं, हालांकि अभी तक इस मामले पर कोई ऑफिशियल बयान सामने नहीं आया है.
कन्नौज लोकसभा सीट समाजवादी पार्टी का गढ़ रही है. अखिलेश यादव ने जैसे ही यहां से तेज प्रताप यादव को टिकट देने का एलान किया है. स्थानीय नेताओं में हलचल मच गई है. सूत्रों के मुताबिक जिले में बड़े समाजवादी नेताओं ने अखिलेश यादव से अपने फैसले पर पुनर्विचार की अपील की और कहा कि खुद अखिलेश यादव को ही यहां से चुनाव लड़ना चाहिए.
सपा अध्यक्ष कन्नौज से चुनाव लड़ेंगे या नहीं इसे लेकर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन माना जा रहा है कि गुरुवार को नामांकन पत्र भरने के आखिरी दिन अखिलेश यादव नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं. आइए आपको बताते हैं कि कन्नौज का सियासी और जातीय समीकरण क्या कहता है.
कन्नौज का सियासी समीकरण
कन्नौज लोकसभा सीट साल 1967 में अस्तित्व में आई थी. इस सीट से कांग्रेस नेता और दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित भी एक बार सांसद रह चुकी हैं. पिछली बार 2019 को छोड़ दें तो साल 1998 से 2019 तक लगातार इस सीट पर सपा का ही कब्जा रहा है. साल 1998 में पहली बार सपा से प्रदीप यादव सांसद चुने गए थे, जिसके बाद 1999 मुलायम सिंह यादव ने कन्नौज से चुनाव जीता लेकिन बाद उन्होंने ये सीट छोड़ दी और फिर अखिलेश यादव ने उपचुनाव में भारी मतों से जीत हासिल की.
अखिलेश यादव ने 2004 में बसपा के ठाकुर राजेश सिंह और 2009 लोकसभा चुनाव में बसपा में महेश चंद्र वर्मा को मात देकर जीत हासिल की. साल 2014 में इस सीट से अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव ने चुनाव लड़ा और मोदी लहर में भी बीजेपी के सुब्रत पाठक को हरा दिया लेकिन 2019 में बाज़ी पलट गई और बीजेपी के सुब्रत पाठक ने कन्नौज से जीत दर्ज कर डिंपल यादव से हार का बदला ले लिया.
कन्नौज लोकसभा सीट पर कुल 18 लाख मतदाता है. इस सीट पर मुस्लिम और यादव समीकरण काफी मज़बूत है जो जीत में अहम भूमिका निभाता है. कन्नौज में 2.5 लाख मुस्लिम और लगभग इतनी ही संख्या यादव वोटर्स की है. इनके अलावा 2.5 दलित, दस फीसद राजपूत और 15 फीसद ब्राह्मण मतदाता है.
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Source: IOCL






















