केदारनाथ पैदल मार्ग पर ओवरलोडिंग, क्षमता से 56.48% ज्यादा यात्री
चारधाम यात्रा में केदारनाथ पैदल मार्ग पर यात्रियों के दबाव ने चिंताएं बढ़ा दी हैं. भारतीय वन्यजीव संस्थान की रिपोर्ट के मुताबिक 56.48% क्षमता से अधिक लोग यात्रा कर रहे हैं.

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान लगातार बढ़ती तीर्थयात्रियों की भीड़ के बीच भारतीय वन्यजीव संस्थान के ताज़ा शोध ने केदारनाथ पैदल मार्ग को लेकर चिंता बढ़ाने वाले तथ्य सामने रखे हैं. संस्थान के अध्ययन के अनुसार केदारनाथ धाम जाने वाले पैदल मार्ग पर वर्तमान समय में जितने यात्री प्रतिदिन आवाजाही कर रहे हैं, वह मार्ग की तय भार-वहन क्षमता से करीब 56.48 प्रतिशत अधिक है.
यह जानकारी संस्थान की वार्षिक शोध संगोष्ठी में सोमवार को प्रस्तुत किए गए अध्ययन टेस्टिंग सिनेरियो फॉर एस्टिमेटिंग द कैरिंग कैपेसिटी ऑफ पिलग्रिमेज ट्रैक्स इन उत्तराखंड में सामने आई. इस शोध के तहत विशेषज्ञों ने केवल केदारनाथ ही नहीं बल्कि हेमकुंड साहिब, गंगोत्री और यमुनोत्री जाने वाले यात्रा मार्गों की वहन क्षमता का भी बारीकी से आकलन किया है.
कैसे तय होती है मार्ग की क्षमता
अध्ययन के अनुसार किसी भी पैदल मार्ग की वहन क्षमता यात्रियों की कुल संख्या और रास्ते की चौड़ाई के आधार पर तय की जाती है. इसके साथ ही शोधकर्ताओं ने पालकी और कंडी से यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए ज़रूरी अतिरिक्त जगह मार्ग पर मौजूद घोड़े खच्चरों की आवाजाही तथा तीर्थयात्रियों की सुरक्षा जैसे पहलुओं को भी गणना में शामिल किया है.
हर दिन 22 हज़ार यात्रियों का दबाव
शोध में सामने आया कि यात्रा सीजन के सबसे व्यस्त महीनों यानी मई और जून में केदारनाथ मार्ग पर रोज़ाना लगभग 22 हज़ार तीर्थयात्री पहुंचते हैं. इसके अतिरिक्त हजारों की संख्या में मज़दूर, कर्मचारी और घोड़े खच्चर भी यात्रा व्यवस्था संभालने में जुटे रहते हैं, जिससे मार्ग और समूची प्रबंधन व्यवस्था पर भारी दबाव बन जाता है.
हेमकुंड साहिब में सबसे कम दबाव
दिलचस्प बात यह रही कि तुलनात्मक रूप से हेमकुंड साहिब के पैदल मार्ग पर तीर्थयात्रियों का दबाव सबसे कम पाया गया. यानी चारों मार्गों में केदारनाथ पर स्थिति सबसे ज़्यादा गंभीर है, जबकि हेमकुंड साहिब अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है.
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