Haridwar Kumbh Mela 2027: हरिद्वार में कुंभ मेले की तैयारियों को मिली रफ्तार, श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर सरकार का फोकस
Haridwar Kumbh Mela 2027: हरिद्वार में अगले साल लगने वाले कुंभ मेले की तैयारियों में सरकार जुट गई है, खास बात यह है कि सरकार इस बार श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दे रही है.

हरिद्वार में 2027 में होने वाले कुंभ मेले की तैयारियां अब जमीन पर उतरने लगी हैं. केंद्र सरकार ने इसके लिए 500 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी है. इस राशि से 34 बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को गति मिलेगी, चाहे वो घाटों का पुनर्निर्माण हो, सड़कों का चौड़ीकरण हो या श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की व्यवस्था. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बीते शनिवार 234.55 करोड़ रुपये की लागत वाले 34 कार्यों का शिलान्यास किया. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि यह कुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सनातन परंपरा और सामाजिक एकता का वैश्विक उत्सव है और इसे उसी गरिमा के साथ आयोजित किया जाएगा.
घाट, पुल और सड़कें, तीनों मोर्चों पर काम
सिंचाई विभाग 70.54 करोड़ रुपये की लागत से अपर गंगा नहर के दोनों तटों पर घाटों का निर्माण और जीर्णोद्धार करेगा. इसके अलावा 90 मीटर स्पान का द्वि-लेन स्टील गर्डर पुल बनाया जाएगा और मेले के दौरान भीड़ प्रबंधन के लिए तीन अस्थायी पुल भी स्थापित किए जाएंगे.
इसके साथ ही सड़कों पर 127.23 करोड़ रुपये खर्च होंगे. बहादराबाद-सिडकुल मार्ग का चार लेन में चौड़ीकरण, दिल्ली-हरिद्वार-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग का सुदृढ़ीकरण और हरिद्वार मास्टर प्लान के तहत प्रशासनिक रोड कॉरिडोर का विकास, ये सब इसी राशि से होगा.
पानी और बुनियादी सुविधाओं पर भी नजर
जल संस्थान 18.11 करोड़ रुपये से पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करेगा. 1500 केएल क्षमता का ओवरहेड टैंक, नए ट्यूबवेल और पांच इंफिल्ट्रेशन कुएं बनाए जाएंगे ताकि लाखों श्रद्धालुओं को साफ पानी मिल सके. चंडी देवी और मनसा देवी मंदिर मार्ग पर सुविधाओं का विस्तार, मेला नियंत्रण भवन का नवीनीकरण और अतिरिक्त बैरकों की स्थापना पर 18.67 करोड़ रुपये अलग से खर्च किए जाएंगे.
'केंद्र और राज्य सरकार के प्रयास से ऐतिहासिक होगा आयोजन'
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि केंद्र और राज्य के मिले-जुले प्रयासों से कुंभ 2027 हर लिहाज से ऐतिहासिक आयोजन बनेगा. देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो, यही सरकार की पहली प्राथमिकता है.
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