हरिद्वार: कांवड़ यात्रा मार्ग पर बंद हों मांस-मदिरा की दुकान, करौली शंकर महादेव सरकार से मांग
Kanwar Yatra 2026: हरिद्वार में कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले एक बार फिर से यात्रा मार्ग शराब और मांस की दुकानों को लेकर विवाद छिड़ गया है. अखाड़ा परिषद ने इस पर रोक की माँग की.

हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान मार्ग पर शराब और मांस की दुकानों पर प्रतिबंध लगाने की माँग तेज हो गई हैं. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने कांवड़ यात्रा को सुगम और सात्विक माहौल में संपन्न कराने और ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि यात्रा मार्ग पर पड़ने वाली ऐसी दुकानों से हिन्दुओं का भावनाएं आहत होती है.
अखाड़ा परिषद के मीडिया संयोजक करौली शंकर महादेव ने कहा कि यात्रा के दौरान इन दुकानों का खुला रहना न केवल श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करता है. बल्कि, शांति और कानून व्यवस्था के लिए भी खतरा पैदा करता है. उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर पड़ने वाली शराब और मांस की दुकानें अत्यंत निंदनीय हैं.
कांवड़ यात्रा मार्ग पर मांस मदिरा की दुकानों पर रोक
शंकर महादेव ने कहा कि अखाड़ा परिषद और समस्त संतों की ओर से यह मांग की जाती है कि पूरी कांवड़ यात्रा के दौरान मार्ग पर पड़ने वाली शराब और मांस की दुकानों पर पूरी तरह से रोक लगाई जाए और इन्हें यात्रा मार्ग से हटाया जाए. ताकि यात्रा की सात्विकता और आस्था पर प्रभाव न हो.
उन्होंने कहा कि "कांवड़िए अपने घर से हरिद्वार के लिए सात्विक विचारधारा और कांवड़ लेकर निकलते हैं. जब मार्ग में मांस और मदिरा की दुकानें दिखती हैं, तो इससे मन खराब होता है और श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं प्रभावित होती हैं. नशे का सेवन करने वाले असामाजिक या स्थानीय लोग अक्सर मार्ग में उपद्रव और दंगे-बवाल की स्थिति पैदा कर देते हैं.
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सीएम धामी और स्थानीय प्रशासन से की माँग
अखाड़ा परिषद ने कहा कि शराब और मांस की दुकानों के कारण अनावश्यक तनाव और माहौल खराब होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. अखाड़ा परिषद की बैठकों में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा और मुख्यमंत्री व स्थानीय प्रशासन को इस संबंध में सूचित किया जाएगा. हमारी मांग है कि सख्त कदम उठाए जाएं ताकि कांवड़ यात्रा बिना किसी विघ्न, दंगे या बवाल के सुगमता से संपन्न हो सके.
अखाड़ा परिषद का मानना है कि यदि यात्रा मार्ग पर शराब और मांस की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी जाए, तो यात्रा के दौरान होने वाले आधे से अधिक विवाद और अशांति अपने आप नियंत्रित हो जाएंगे.
























