हापुड़ में लापता बेटे की राह देखते रह गए परिजन, पुलिस ने 'लावारिस' मानकर कर दिया अंतिम संस्कार
Hapur News In Hindi: सिंभावली थाना क्षेत्र के माधापुर गांव के रहने वाले प्रशांत कुमार 1 अप्रैल से लापता था. सड़क हादसे में मौत के बाद पुलिस ने शव की शिनाख्त नहीं की और अंतिम संस्कार कर दिया.

हापुड़ से पुलिस विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है, सड़क हादसे में घायल व्यक्ति की मौत के बाद पुलिस ने शव की शिनाख्त किए बगैर उसका अंतिम संस्कार कर दिया. यह मामला सिंभावली थाना क्षेत्र के माधापुर गांव के रहने वाले प्रशांत कुमार (उर्फ पप्पू) से जुड़ा है. एसपी ने मामले में सख्त रुख अपनाया है, एसपी ने दो पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है.
जानकारी के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 को प्रशांत अपने दोस्तों के साथ गंगा स्नान के लिए घर से निकला था. रास्ते में सिखैड़ा के पास उसकी बाइक का एक्सीडेंट हो गया. मौके पर पहुंची पुलिस और सब-इंस्पेक्टर ने उसे इलाज के लिए पहले स्थानीय केंद्र और फिर मेरठ मेडिकल कॉलेज भिजवाया. अप्रैल को इलाज के दौरान प्रशांत की मृत्यु हो गई.
लावारिस मानकर पुलिस ने शव का किया अंतिम संस्कार
हैरानी की बात यह है कि प्रशांत के परिजन 2 अप्रैल से ही उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए सिंभावली थाने के चक्कर काट रहे थे और पुलिस उन्हें टालती रही. 6 अप्रैल को जाकर पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की. इस बीच, प्रशांत की पहचान होने के बावजूद या पहचान सुनिश्चित करने का प्रयास किए बिना ही, पुलिस ने 5 अप्रैल को उसे 'अज्ञात' (लावारिस) घोषित कर उसका अंतिम संस्कार कर दिया.
इसके बाद 9 अप्रैल को परिजनों को सूचना मिली कि प्रशांत की बाइक थाने में खड़ी है. जब उन्होंने कड़ाई से पूछताछ की और छानबीन हुई, तो पता चला कि जिस युवक को पुलिस ने लावारिस समझकर जला दिया, वह प्रशांत ही था. इस खबर ने परिजनों
परिजनों ने जाम की सड़क
पुलिस की इस लापरवाही से आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने दिल्ली-लखनऊ हाईवे को जाम कर दिया. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस के पास प्रशांत का फोटो और जानकारी होने के बावजूद उसे सार्वजनिक नहीं किया गया और न ही गुमशुदगी की तलाश कर रहे परिवार को इसकी सूचना दी गई.
एसपी ने पुलिस कर्मियों को किया सस्पेंड
वहीं, पुलिस अधीक्षक ज्ञानंजय सिंह ने मामले में संज्ञान लेते हुए उप-निरीक्षक विकेश कुमार और गोविन्द सिंह को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है. एसपी ज्ञानंजय सिंह की ओर से दोनों सब इंस्पेक्टरों के द्वारा घटना को गंभीरता से न लेना, युवक की पहचान हेतु फोटो प्रचारित न करना और अपने कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही बरतने में दोषी पाया गया.
साथ ही एसपी ने जनपद के सभी पुलिसकर्मियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि जब परिवार थाने के चक्कर काट रहा था, तब पुलिस को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी. अज्ञात शव मिलने पर पहचान की प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है, जिसमें इन अधिकारियों ने कोताही बरती.
परिजनों ने लगाई इंसाफ की गुहार
फिलहाल, इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. परिवार अब न्याय की गुहार लगा रहा है कि उनके साथ हुई इस अमानवीय चूक के जिम्मेदार लोगों पर केवल निलंबन ही नहीं, बल्कि कठोर कानूनी कार्रवाई भी हो.
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Source: IOCL



























