'10 हजार का जबरन किराया, नहीं दिया तो वीजा रद्द', हज यात्रा को लेकर सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का बड़ा आरोप
MP Mohibullah Nadvi News: हज के हवाई किराए में 10 हजार की बढ़ोतरी को लेकर सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने इसे बिना नियम हाजियों पर थोपे गए बोझ और संविधान के खिलाफ बताते हुए सरकार पर आरोप लगाया.

समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने हज 2026 के हवाई किराए में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि हाजियों की तरफ से लगातार शिकायतें आ रही हैं, लेकिन हज कमेटी ऑफ इंडिया और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय इन समस्याओं को दूर करने में नाकाम साबित हो रहे हैं.
मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा, “जिस तरह से हाजियों की वहां से शिकायतें आ रही हैं, उसको तो हज कमेटी और अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय दूर नहीं कर रहा है. यह बहुत अफसोस की बात है"
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ज्यादा किराया लेने का लगाया आरोप
उन्होंने आगे कहा, बिना किसी नियम और कानून के एक व्यवस्था के तहत हाजियों पर 10 हजार रुपये का अतिरिक्त किराया थोपा गया है. और जिस तरह से कहा गया है कि अगर यह राशि नहीं दी गई तो हज का वीजा रद्द कर दिया जाएगा या हज पर नहीं जाने दिया जाएगा. यह सरासर अखलाक के कानून और मुल्क के संविधान के खिलाफ है.”
उन्होंने आगे कहा कि सरकार का काम लोगों को राहत और सहूलत देना होता है. अगर सरकार ऐसा नहीं कर पा रही है, तो यह हज के मामले में मुसलमानों के साथ नाइंसाफी और भेदभाव जैसा लगता है.
नदवी ने अपने बयान में नमाज से जुड़े एक हालिया मामले का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, “कोर्ट में संभल के एक व्यक्ति द्वारा एक याचिका डाली गई थी, जिसमें खुले स्थानों पर नमाज पढ़ने की अनुमति मांगी गई थी. इस पर कोर्ट ने फैसला सुनाया और कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर नमाज अदा नहीं की जा सकती है, और इसके लिए राज्य सरकारों को कहीं न कहीं अधिकार दिया गया है.”
'किसी को नुकसान हो तो इजाजत नहीं'
उन्होंने साफ किया कि किसी भी ऐसी जगह नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं होनी चाहिए, जहां विवाद हो या किसी को नुकसान पहुंचे. उन्होंने कहा, “ऐसी जगह नमाज पढ़ना जहां किसी को नुकसान हो, या वह जगह विवादित हो, झगड़े की जगह हो, या मकान मालिक या किसी स्थान की रजामंदी न हो, उसकी इजाजत नहीं है.”
मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा कि सरकारी जगहों पर थोड़ी देर नमाज पढ़ लेने से कब्जा नहीं माना जाना चाहिए. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर कब्जे की बात मानी जाती है तो कानून सभी धर्मों के लिए एक समान होना चाहिए.
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “हम देखते हैं कि बहुत सी जगहों पर जब जुलूस निकलते हैं तो रास्ते बंद कर दिए जाते हैं और हफ्तों-हफ्तों, महीनों तक लोग परेशान रहते हैं. कई बीमार लोग अस्पताल तक नहीं पहुंच पाते और तड़प-तड़प कर मर जाते हैं. यह भी तो शहरियों के अधिकारों का हनन है. इसे भी बंद होना चाहिए.”
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उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जगहों के इस्तेमाल को लेकर ऐसा कानून होना चाहिए जो सभी पर बराबर लागू हो और जिससे किसी को परेशानी न हो. उनके बयान के बाद हज किराया और धार्मिक गतिविधियों को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज होने के आसार हैं.























