Noida में द विजडम ट्री स्कूल को IT नोटिस, मैनेजर ने कहा- लीगल टीम 30 अप्रैल तक देगी जवाब
आयकर विभाग ने 'द विजडम ट्री स्कूल' स्कूल को नोटिस जारी किया है. हालांकि स्कूल के मैनेजर ने कहा है कि इसका असर बच्चों की पढ़ाई पर नहीं पड़ेगा और इसका कानूनी जवाब दिया जाएगा.

उत्तर प्रदेश स्थित ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित 'द विजडम ट्री स्कूल' इस समय एक बड़े वित्तीय विवाद के केंद्र में आ गया है. आयकर विभाग के कानपुर स्थित बेनामी प्रकोष्ठ ने स्कूल की करीब 125 करोड़ रुपये की इमारत पर बेनामी संपत्ति अधिनियम की धारा 24(1) के तहत नोटिस जारी किया है. हालांकि स्कूल के मैनेजर वीरेंद्र कौशिक ने बताया कि आयकर विभाग की तरफ से एक नोटिस, जो कि तत्कालीन ट्रस्ट के अध्यक्ष को भेजा गया था, जिसका जवाब कॉलेज को 30 अप्रैल 2026 तक देना है. हमारी लीगल टीम 30 तारीख तक इसका जवाब आयकर विभाग को देगी.
वहीं, अभी स्कूल पूरी तरह से चालू है और बच्चों की पढ़ाई जारी है. इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत करीब 6 महीने पहले हुई, जब आयकर विभाग को एक गुमनाम पत्र मिला था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि स्कूल की इमारत के निर्माण में बड़े पैमाने पर काले धन का इस्तेमाल किया गया है. इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने विस्तृत जांच शुरू की.
जांच के दौरान दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और संबंधित व्यक्तियों के बयान खंगाले गए. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, मामला और गहरा गया. कई ऐसे तथ्य सामने आए जिन्होंने इस पूरे प्रोजेक्ट की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए और यह भी कि इस स्कूल के निर्माण में किन लोगों का पैसा लगा हुआ है.
करोड़ों की रकम खपाने का आरोप
जांच में सामने आया है कि इस स्कूल प्रोजेक्ट में सीधे निवेश के बजाय तीन बोगस कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपये लगाए गए थे. आरोप है कि अलग-अलग कारोबारी और सहयोगियों से नगद रकम ली गई और उसे इन कंपनियों के माध्यम से लोन या निवेश के रूप में दिखाया गया. आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए काले धन को वैध दिखाने की कोशिश की गई. सूत्रों की मानें तो जांच एजेंसी को कई ऐसे लोगों के बयान भी मिले हैं जिन्होंने नगद निवेश करने की बात स्वीकार की, जिससे इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलती गईं.
जांच में यह भी सामने आया है कि स्कूल की इमारत सतनाम बिल्डर द्वारा तैयार की गई है. बिल्डर ने अपने परिवार और अन्य कारोबारी सहयोगियों के साथ मिलकर 'द विजडम ट्री स्कूल फाउंडेशन' नाम से कंपनी बनाई. इस कंपनी के जरिए स्कूल का संचालन और निवेश दिखाया गया था.
सबसे अहम बात यह रही कि बिल्डर खुद इस कंपनी का निदेशक भी था, जिससे पूरे मामले में हितों के टकराव और पारदर्शिता की कमी के संकेत मिले. अब आयकर विभाग सतनाम बिल्डर की जांच कर रहा है कि आखिर इसके कितने ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जिनमें कथित तौर पर काले धन का इस्तेमाल किया गया है और साथ ही इसके अन्य सहयोगियों की भी जांच की जा रही है.
वहीं, ग्रेटर नोएडा स्थित इस स्कूल की बात करें तो यह करीब 15 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी इमारत चार मंजिला है. आधुनिक सुविधाओं से लैस इस परिसर की कमर्शियल कीमत लगभग 125 करोड़ रुपये आंकी गई है. इतनी बड़ी परियोजना में निवेश के स्रोत को लेकर ही अब सबसे बड़ा विवाद खड़ा हो गया है.
जांच के दौरान कई अहम दस्तावेज और बयान सामने आए, जिनसे यह संकेत मिल रहे हैं कि बड़ी मात्रा में नगद धनराशि को कंपनियों के जरिए घुमाकर इस प्रोजेक्ट में लगाया गया. सूत्रों के अनुसार, कई निवेशकों ने यह भी स्वीकार किया है कि उन्होंने नगद पैसे दिए थे, जिन्हें बाद में कागजों में लोन या निवेश के रूप में दिखाया गया. यही आधार आयकर विभाग की जांच का प्रमुख कारण बना.
बच्चों के भविष्य को लेकर गहराई चिंता
सूत्रों की मानें तो 27 मार्च को आयकर विभाग ने आधिकारिक नोटिस जारी किया. इसके बाद स्कूल परिसर में नोटिस चस्पा भी कर दिया गया. फिलहाल कुर्की की अंतिम कार्रवाई नहीं हुई है.
इन सबके बीच अब इस पूरे मामले का सबसे ज्यादा असर उन बच्चों पर पड़ सकता है, जो इस स्कूल में पढ़ रहे हैं. अभिभावकों के बीच चिंता गहराती जा रही है कि अगर आगे चलकर स्कूल के संचालन पर असर पड़ता है या कुर्की की कार्रवाई होती है, तो बच्चों की पढ़ाई बीच में ही प्रभावित हो सकती है. एक अभिभावक महतोष मुखर्जी ने बताया कि उनका बेटा नौवीं कक्षा में है. एक अन्य अभिभावक योगेश श्रीवास्तव ने बताया कि उनका बेटा सातवीं कक्षा में पढ़ता है. जब से स्कूल के बारे में खबर सुनी है, तब से वे असमंजस में हैं.
डीआईओ ने क्या कहा?
इस पूरे मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार सिंह ने कहा कि अभी फिलहाल स्कूल में बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह संचालित है. इस पूरे मामले में आयकर विभाग की जांच अभी जारी है. अगर भविष्य में स्कूल पर किसी भी तरह की कोई कार्रवाई होती है, तो जितने भी बच्चे हैं, उन्हें अन्य स्कूलों में शिफ्ट करने का प्रयास किया जाएगा. उनका यह भी कहना है कि किसी भी बच्चे की पढ़ाई को लेकर उनके भविष्य को खराब नहीं होने दिया जाएगा.
'लीगल टीम 30 तारीख तक देगी जवाब'
स्कूल के मैनेजर वीरेंद्र कौशिक ने एक बयान दिया है कि आयकर विभाग की तरफ से एक नोटिस ट्रस्ट के तत्कालीन अध्यक्ष को भेजा गया था, जिसका जवाब कॉलेज की लीगल टीम 30 अप्रैल 2026 तक आयकर विभाग को दे देगी. उन्होंने बताया कि यह नोटिस तत्कालीन अध्यक्ष केके श्रीवास्तव के नाम से ट्रस्ट को आया था, जो 2017 से लेकर 2020 तक स्कूल में कार्यरत थे, लेकिन अब वे यहां कार्य नहीं करते. स्कूल 2017 से सुचारू रूप से चल रहा है. स्कूल पर किसी तरह का कोई नोटिस चस्पा नहीं किया गया है. आयकर विभाग से जो नोटिस आया था, उसका जवाब 30 अप्रैल तक लीगल टीम दे देगी.
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Source: IOCL


























