देहरादून: ITBP स्टेडियम में दो दिवसीय माल्टा महोत्सव का आयोजन, स्थानीय उत्पादों को उपलब्ध कराया बाजार
Dehradun News: आईटीबीपी स्टेडियम में आयोजित दो दिवसीय माल्टा महोत्सव ने पर्वतीय किसानों की आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक प्रभावशाली पहल के रूप में अपनी पहचान बनाई.

देहरादून स्थित आईटीबीपी स्टेडियम, सीमा द्वार में सेवा संकल्प (धारिणी) फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय माल्टा महोत्सव ने पर्वतीय किसानों की आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक प्रभावशाली पहल के रूप में अपनी पहचान बनाई. इस महोत्सव ने न केवल स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया, बल्कि “वोकल फॉर लोकल” की भावना को जमीनी स्तर पर साकार करने का सफल उदाहरण भी प्रस्तुत किया.
महोत्सव में उत्तराखंड के चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, नैनीताल सहित सभी पर्वतीय अंचलों से आए माल्टा उत्पादक किसानों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की. दो दिनों तक चले इस आयोजन में किसानों द्वारा उत्पादित 7000 किलोग्राम से अधिक माल्टा की सीधी बिक्री हुई.
'किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास'
इसके साथ ही माल्टा से निर्मित जूस, जैम, स्क्वैश, कैंडी जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों को भी उपभोक्ताओं ने खूब सराहा. उत्कृष्ट बिक्री के चलते किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिला, जिससे उनके आत्मविश्वास में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली. सेवा संकल्प (धारिणी) फाउंडेशन की ट्रस्टी गीता धामी ने कहा कि यह आयोजन केवल एक महोत्सव नहीं, बल्कि पर्वतीय किसानों की मेहनत को सम्मान देने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक दूरदर्शी प्रयास है.
'किसानों को उपभोक्ता से बिचौलियों की भूमिका कम'
उन्होंने बताया कि फाउंडेशन स्थानीय किसानों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़कर बिचौलियों की भूमिका को कम करने का कार्य कर रहा है, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित और वास्तविक मूल्य मिल सके. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि महोत्सव के माध्यम से प्राप्त समस्त धनराशि को पुनः किसान कल्याण, उत्पाद संवर्धन, प्रशिक्षण और विपणन से जुड़े कार्यों में लगाया जाएगा, जिससे यह पहल दीर्घकालिक रूप से किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सके.
महोत्सव के दौरान सामाजिक सरोकारों का भी विशेष ध्यान रखा गया. फाउंडेशन की ओर से अनाथ आश्रमों में माल्टा भेजकर यह सुनिश्चित किया गया कि पर्वतीय किसानों की मेहनत से उपजे फल का लाभ समाज के वंचित वर्गों तक भी पहुंचे. यह पहल फाउंडेशन की मानवीय सोच, सामाजिक संवेदनशीलता और समर्पित कार्यशैली को दर्शाती है.
माल्टा महोत्सव में पहुंचे किसान, उपभोक्ता और आम नागरिक
माल्टा महोत्सव में बड़ी संख्या में उपभोक्ता, किसान और आम नागरिक पहुंचे. लोगों ने न केवल स्थानीय उत्पादों की खरीदारी की, बल्कि पर्वतीय किसानों से सीधे संवाद कर उनके अनुभवों और चुनौतियों को भी जाना. जनसहभागिता और सकारात्मक प्रतिक्रियाओं ने यह साबित कर दिया कि यदि स्थानीय उत्पादों को सही मंच और बाज़ार मिले, तो वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान कर सकते हैं.
कुल मिलाकर, ट्रस्टी गीता धामी के मार्गदर्शन में सेवा संकल्प (धारिणी) फाउंडेशन द्वारा आयोजित यह माल्टा महोत्सव उत्तराखंड के पर्वतीय किसानों के लिए आशा, सम्मान और आत्मनिर्भर भविष्य का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है.
Source: IOCL






















