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AMU-JMI में मौलाना अबुल आला मौदूदी की किताब पढ़ाने पर विवाद, कई बड़ी हस्तियों ने लिखा PM Modi को खत

शिक्षाविदों की तरफ से कहा गया है कि मौदूदी दुनिया में हर जगह गैर मुसलमानों के नरसंहार का आह्वान करते हैं. उनकी शिक्षाएं गैर मुस्लिम विरोधी हैं. मौदूदी के लेखन को इन विश्वविद्यालयों में शामिल किया गया है.

AMU: क्या हिंदुस्तान की कुछ यूनिवर्सिटीज में जिहादी तैयार किए जा रहे हैं. क्या छात्रों को जिहादी इस्लाम का पाठ पढ़ाया जा रहा है. यह सवाल इसलिए उठ हैं, क्योंकि एक्टिविस्ट मधु किश्वर (Madhu Kishwar) सहित 20 से अधिक शिक्षाविदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Pm Narendra Modi) को एक खुला पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU), जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) और हमदर्द विश्वविद्यालय (Hamdard University) सहित राज्य की ओर वित्त पोषित इस्लामी विश्वविद्यालय में अपनाए जा रहे जिहादी इस्लाम पाठ्यक्रम पर रोक लगाने की मांग की है.

साथ ही इस पत्र में पाकिस्तान के कट्टर इस्लामिक प्रचारक और जमात-ए-इस्लामी के संस्थापक मौलाना अबुल आला मौदूदी की लिखित किताबों को पढ़ाए जाने पर भी सवाल उठाए हैं. मौलाना मौदूदी की लिखित किताबों को एएमयू के ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन, एमफिल और पीएचडी की क्लासों में पढ़ाया जाता है. बाकायदा छात्रों को मौदूदी की लिखित किताबों को पढ़ने के लिए रिकमेंड किया गया है. यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर इस्लामिक स्टडीज के पाठ्यक्रम को अगर देखेंगे तो उसमें मौलाना अबुल आला मौदुदी की किताबों का जिक्र है.

ग्रेजुएशन से पीएचडी तक छात्रों को पढ़ाई जाती हैं मौदूदी की किताबें

साथ ही मोदुदी की किताब इस्लामिक स्टडीज विभाग की लाइब्रेरी में भी मौजूद है. खुद एएमयू के प्रोफेसर मानते हैं कि ग्रेजुएशन से लेकर पीएचडी तक छात्रों को मौदूदी की किताबें पढ़ाई जाती हैं. हालांकि, वह किताबें इस्लामिक स्टेट को लेकर है, लेकिन क्योंकि कोर्स में है, इसलिए उनको पढ़ाना जरूरी है. 27 जुलाई को लिखे पत्र में इन शिक्षाविदों ने कहा है कि हिंदू समाज, संस्कृति और सभ्यता पर लगातार हो रहे हमले ऐसे पाठ्यक्रम का प्रत्यक्ष परिणाम है. यह गहरी और चिंता का विषय है कि अबुल अला मौदूदी का लेखन इसे व्यापक रूप से इस्लाम के आधिकारिक स्रोत के रूप में मान्यता प्राप्त है, वह इन तीन विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम का हिस्सा है.

शिक्षाविदों ने लगाए हैं ये भी आरोप

शिक्षाविदों की तरफ से कहा गया है कि मौदूदी दुनिया में हर जगह गैर मुसलमानों के नरसंहार का आह्वान करते हैं. उनकी शिक्षाएं गैर मुस्लिम विरोधी हैं. मौदूदी के लेखन को इन विश्वविद्यालयों में शामिल किया गया है. वह मौजूदा जमात-ए-इस्लामी के संस्थापक थे, जो भारत के पूर्व  इस्लामीकरण के लिए प्रतिबद्ध है. मौदूदी की हाइड्रा नेतृत्व वाली विचारधारा ने इंडियन मुजाहिदीन, जेकेएलएफ, हुर्रियत, रजा अकादमी, द पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया आदि जैसे कई शाखाएं बनाई हैं. जे आई एच ने सिमी की भी स्थापना की थी.

'मौदूदी से प्रेरित था बगदादी' 

पत्र में यह भी लिखा है कि अलकायदा, आईएसआईएस, हमास, हिजबुल्ला, मुस्लिम ब्रदरहुड, तालिबान आदि जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नामित आतंकवादी संगठन मौदूदी की मूल विचारधारा और राजनीतिक इस्लाम के ढांचे से अपनी प्रेरणा चलाना जारी रखते हैं. पत्र में समाजशास्त्र के प्रोफेसर केबिन मैकडॉनल्ड और मिडिल सेक्स विश्वविद्यालय के अपराध विज्ञान और समाजशास्त्र विभाग के प्रमुख का हवाला दिया गया है, जिन्होंने दस्तावेज किया कि कैसे आईएसआईएस प्रमुख अल बगदादी मौदूदी से प्रेरित था.

'गैर मुसलमानों के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए तैयार किए जा रहे हैं जिहादी'

मौदूदी मुस्लिम ब्रदरहुड के विचारक सैयद कुतुब, वर्तमान अल कायदा प्रमुख अल जवाहिरी और यहां तक कि पाकिस्तान के जनरल जिया उल हक के लिए प्रेरणादायक व्यक्ति थे. उन्होंने लिखा है कि भारतीय करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल भारत में गैर मुसलमानों के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए जिहादियों को तैयार करने के लिए किया जा रहा है. इस पत्र लिखी बातों को लेकर एबीपी न्यूज़ ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इस्लामिक स्टडीज विभाग के चेयरमैन मोहम्मद इस्माइल से बात की.

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इस्लामिक स्टडीज विभाग के चेयरमैन कही ये बात

मोहम्मद इस्माइल ने बताया कि मौलाना अबुल अला मौदूदी की किताबें हमारे यहां बीए से लेकर पीएचडी तक प्रेसक्राइब्ड है. पीएचडी के छात्र मौलाना अबुल अला मौदूदी पर पीएचडी कर रहे हैं. मौलाना अबुल आला मौदूदी जमात-ए-इस्लामी के संस्थापक थे और उनका यह था कि कुरान की जो शिक्षा है, इस्लामिक गवर्नमेंट स्टेबलिश होनी चाहिए. वह हिंदुस्तान से पाकिस्तान चले गए, जो उनके ख्याल थे, उसमें वह सक्सेसफुल नहीं हो पाए, लेकिन वहां पर सेक्युलर गवर्नमेंट स्टेबलिश हुई.

जो आरोप लगाए गए हैं, वह गलत है: मोहम्मद इस्माइल

उन्होंने कहा कि मौलाना मौदूदी को ओर से स्थापित जमात-ए-इस्लामी का काम इस्लामिक स्टेट का स्थापना करना था. मौदूदी इस्लामिक स्टेट स्थापित करना चाहता था. पहले उन्होंने पाकिस्तान में कोशिश की, लेकिन वह सक्सेस नहीं हुए. शिक्षाविदों की ओर से पत्र लिखने के सवाल पर मोहम्मद इस्माइल ने कहा कि जिन लोगों ने भी यह आरोप लगाया है, वह गलत है. वह कहीं भी इस चीज को दिखा दें कि यहां पर इस तरह की शिक्षा दी जाती है. आपको एक भी लाइन यहां ऐसी नहीं मिलेगी.

'यह लोग इस्लाम को कर रहे हैं बदनाम'

मोहम्मद इस्माइल ने कहा कि दुनिया के बड़े आतंकवादी संगठनों के मौदूदी के विचारों को फॉलो करने के सवाल पर मोहम्मद इस्माइल ने कहा के ऐसे आतंकवादी संगठन पर मुझे संदेह है. सही मायने में मौदूदी ने इस तरह के इस्लाम के बारे में नहीं कहा है. यह लोग इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं. मौदूदी की एक किताब 'इस्लामिक लॉ एंड कॉन्स्टिट्यूशन जो एमए में पढ़ाई जाती है, वह भारतीय संविधान के खिलाफ है' के सवाल पर मोहम्मद इस्माइल ने कहा कि वह किताब जो कुरान और सुन्ना के हिसाब से है. यहां का जो संविधान है वह अलग है.

मोहम्मद इस्माइल बोले- भारतीय संविधान के नहीं है खिलाफ

उन्होंने कहा कि अगर कहीं इस्लामिक स्टेट कायम होगा, वह उसके लिए है, तो हिंदुस्तान के लिए थोड़े ही है. अब कोर्स में है, उनका जो विचार है, उस विचार को पढ़ाया जा रहा है कि यह मौदूदी के विचार थे. इसका मतलब यह नहीं है कि वह भारतीय संविधान के खिलाफ है. कोर्स में जो दिया है, अगर कोई ऐसी सेंटेंस, जिसमें बच्चे प्रोवोक होंगे तो उस चीज को वहां से हटा देना चाहिए, जिससे आदमी मिसगाइड न हो जाए. उनका एक ही मोटो था कि इस्लामिक स्टेट कायम हो और उसमे कुरान और सुन्ना हदीस की विचारधारा शामिल हो. उसके हिसाब से सरकार का गठन हो.

थियोलॉजी विभाग के डीन ने आरोप को बताया झूठा

एबीपी न्यूज़ ने शिक्षाविदों के आरोपों पर थियोलॉजी विभाग के डीन मोहम्मद सऊद आलम कासमी से बात की तो उन्होंने कहा के यह एक झूठा इल्जाम है. यूनिवर्सिटी में इस तरह की कोई चीज नहीं पढ़ाई जाती है. हमारे यहां थियोलॉजी में न इस्लामिक स्टडीज में कुछ इस तरह का पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है. अब्दुल आला मौदूदी पाकिस्तान के राइटर थे, वहां उनकी किताबें हैं और उनकी जो तहरीक है वह पाकिस्तान में है. जमात-ए-इस्लामी भी उनकी किताब और तकरीर पर काम करती है. हमारे यहां कोई ऐसी किताब नहीं पढ़ाई जाती है.

थियोलॉजी विभाग के पूर्व चेयरमैन प्रोफेसर मुफ्ती जाहिद अली खान ने कहा कि यह वह सारे के सारे लोग हैं या होंगे जो सरकार के पूरी तरीके से फंड से कोई न कोई अपना एंपायर चला रहे होंगेय. लिहाजा उनकी लूट से ध्यान हटाने के लिए दूसरों को 'जैसे चोर दूसरे को चोर बताता है' इसी तरह की जहनियत के वह लोग होंगे जो सरकार से फायदा उठा रहे होंगे.

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