हरियाणा से पकड़ा गया कोडीन कफ सिरप कांड का मास्टरमाइंड, WI-FI से व्हाट्सएप लॉगिन कर खुद फंसा
Up News: कोडीन कफ सिरप कांड का मास्टरमाइंड हरियाणा से पकड़ा गया है, कानपुर के प्रमुख दवा व्यापारी और मुख्य आरोपी विनोद अग्रवाल को क्राइम ब्रांच ने हरियाणा के महेंद्रगढ़ से गिरफ्तार कर लिया है.

प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध खरीद-बिक्री और तस्करी के बड़े कांड में कानपुर पुलिस को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है. कानपुर के प्रमुख दवा व्यापारी और मुख्य आरोपी विनोद अग्रवाल को क्राइम ब्रांच ने हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के नारनौल से गिरफ्तार कर लिया है. विनोद अग्रवाल पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था और वह पिछले 75 दिनों से फरार चल रहा था. तकनीकी निगरानी के चलते उसकी एक छोटी सी भूल ने उसके छिपने के ठिकाने का खुलासा कर दिया.
दरअसल, यह मामला नवंबर 2025 में सामने आया था, जब खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने कानपुर की बिरहाना रोड स्थित दवा मार्केट में अग्रवाल ब्रदर्स की दुकान और कोपरगंज के गोदाम पर छापेमारी की. इसमें करोड़ों रुपये मूल्य के कोडीन युक्त कफ सिरप, ट्रामाडोल टैबलेट्स और एक्सपायरी दवाएं जब्त की गईं.
छापेमारी के दौरान विनोद और शिवम अग्रवाल हो गए थे फरार
इन दवाओं का इस्तेमाल नशे के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहा था. छापेमारी के दौरान विनोद अग्रवाल और उनके बेटे शिवम अग्रवाल मौके से फरार हो गए थे. इसके बाद कलेक्टरगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया, जिसमें बीएनएस की धाराओं के साथ एनडीपीएस एक्ट की गंभीर धाराएं लगाई गईं.
एसआईटी गठित होने के बाद जांच में 12 मुख्य साजिशकर्ताओं के नाम सामने आए, जिनमें विनोद अग्रवाल के अलावा विभोर राणा, सौरभ त्यागी, विशाल राणा, पप्पन यादव, शादाब, मनोहर जायसवाल, अभिषेक शर्मा, विशाल उपाध्याय, भोला प्रसाद, शुभम जायसवाल और आकाश पाठक शामिल थे.
कई राज्यों में फैला था नेटवर्क
यह नेटवर्क न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि कई राज्यों में फैला हुआ था, जहां फर्जी फर्मों के जरिए प्रतिबंधित दवाओं की सप्लाई की जा रही थी. पुलिस के अनुसार, विनोद अग्रवाल ने 12 राज्यों में 65 से अधिक फर्जी फर्में बनाकर यह कारोबार चलाया था, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई का भी आरोप है.
75 दिनों में बदले 8 ठिकाने
बताते चले घटना के बाद फरारी के दौरान आरोपी विनोद अग्रवाल ने काफी सतर्कता बरती. उसने मोबाइल और लैपटॉप को लगातार स्विच ऑफ रखा, जिससे लोकेशन ट्रैक करना मुश्किल हो रहा था. 75 दिनों में उसने पांच राज्यों के आठ शहरों में ठिकाने बदले. कुछ समय कानपुर में रिश्तेदारों और साझेदारों के यहां छिपा रहा, लेकिन पुलिस की बढ़ती घेराबंदी के कारण अन्य राज्यों में शिफ्ट हो गया.
वाईफाई से व्हाट्सएप लॉगिन से फंसा
आखिरकार 3 जनवरी 2026 को उसने एक खास व्यक्ति से बात करने के लिए हरियाणा के नारनौल में किसी शरणदाता के घर वाई-फाई नेटवर्क से व्हाट्सएप पर लॉगिन कर लिया. इस चूक ने क्राइम ब्रांच की सर्विलांस टीम को आईपी एड्रेस के जरिए उसका ठिकाना पता चल गया.
इसके बाद तकनीकी खेल खेल कर कानपुर पुलिस और क्राइम ब्रांच ने तुरंत जाल बिछाया. जिसके बाद बाजार की तंग गलियों में ऑपरेशन चलाकर आरोपी विनोद अग्रवाल को दबोच लिया गया. पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आरोपी को महेंद्रगढ़ कोर्ट से 24 घंटे की ट्रांजिट रिमांड पर उसे कानपुर लाया जा रहा है, जहां 26 जनवरी की सुबह पहुंचने की उम्मीद है.
आरोपी के खिलाफ मिले पुख्ता सबूत
डीसीपी क्राइम ब्रांच श्रवण कुमार सिंह ने पुष्टि की है कि आरोपी के खिलाफ अवैध क्रय-विक्रय, भंडारण, अंतर्राष्ट्रीय सप्लाई, कूटरचित दस्तावेजों से साक्ष्य छेड़छाड़ और सरकारी कार्य में बाधा जैसे पुख्ता सबूत हैं. दुकान और गोदाम से कोई बिक्री रिकॉर्ड नहीं मिला था, जो अवैध कारोबार की पुष्टि करता है.
पूछताछ में नए खुलासे होने की संभावना है, जैसे नेटवर्क के अन्य सदस्यों के ठिकाने, फर्जी फर्मों का पैसा और अंतर्राष्ट्रीय कनेक्शन. यह गिरफ्तारी पूरे कांड में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है, क्योंकि विनोद अग्रवाल का कारोबार बड़े पैमाने पर था और नशे की आपूर्ति में उसकी भूमिका केंद्रीय थी. पुलिस अब आरोपी की संपत्ति जब्ती और अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है.
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Source: IOCL
























