उत्तराखंड: चमोली में टनल पहुंचे गणेश गोदियाल, मुआवजे पर उठाए सवाल
Chamoli Tunnel Accident News: उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने THDC टनल हादसे वाली जगह का दौरा किया. उन्होंने कंपनी से मजदूरों के बीमा और मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग की है.

देवभूमि उत्तराखंड में THDC (टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) की टनल (सुरंग) में हुए दर्दनाक हादसे के बाद अब इस मामले पर प्रशासनिक जवाबदेही और सियासत को लेकर बहस तेज हो गई है. उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया. हालांकि, रेस्क्यू (बचाव) अभियान में जुटे अधिकारियों और राहत कर्मियों के काम में किसी तरह की बाधा या रुकावट न आए, इसके लिए उन्होंने एक जिम्मेदार राजनेता की तरह टनल के भीतर प्रवेश नहीं किया. बाहर से ही उन्होंने THDC के आला अधिकारियों से बातचीत की और पीड़ित मजदूरों के परिवारों के हकों की पुरजोर आवाज उठाई.
बीमा और मुआवजे पर कांग्रेस के गंभीर सवाल
प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस हादसे पर गहरी संवेदना जताते हुए कहा कि टनल जैसी अत्यंत खतरनाक और जोखिम भरी जगह पर काम करने वाले सभी मजदूरों का जीवन बीमा (Life Insurance) होना बेहद जरूरी है. उन्होंने सरकार और निर्माण कंपनी के रवैये पर तीखे सवाल खड़े करते हुए कहा कि ऐसी जगहों पर जान का जोखिम हमेशा बना रहता है. गोदियाल ने कहा कि पीड़ित परिवारों को सरकार और कंपनी की तरफ से दी जा रही मुआवजे की राशि बेहद कम है. उन्होंने इस आर्थिक सहायता को तत्काल प्रभाव से बढ़ाने की मांग की है.
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इसके साथ ही, उन्होंने हादसे की 'मजिस्ट्रेट जांच' के आदेशों पर भी निशाना साधा. गोदियाल ने याद दिलाया कि करीब 3 साल पहले भी उत्तराखंड सरकार ने करंट लगने से हुई मजदूरों की मौत के मामले में मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए थे, लेकिन सरकार आज तक यह नहीं बता पाई कि उस जांच में क्या निकला.
THDC अधिकारी का जवाब, बीमा पर साधी चुप्पी
कांग्रेस की इन मांगों पर जब THDC के असिस्टेंट डायरेक्टर (Assistant Director) अजय वर्मा से सवाल पूछे गए, तो उन्होंने बताया कि प्रबंधन की ओर से तत्काल प्रभाव से एक लाख रुपये की नकद सहायता और मृतकों के परिजनों को चार लाख रुपये की अलग से आर्थिक मदद दी जा रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह धनराशि राज्य सरकार द्वारा घोषित किए गए मुआवजे से बिल्कुल अलग है. हालांकि, जब मजदूरों के अनिवार्य बीमा को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने चुप्पी साध ली और कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया.
हादसे के आंकड़े: 7 की मौत, 3 की तलाश जारी
रेस्क्यू ऑपरेशन की ताजा जानकारी देते हुए असिस्टेंट डायरेक्टर अजय वर्मा ने बताया कि हादसे वाले दिन टनल के भीतर कुल 28 लोग मौजूद थे. इनमें 22 मजदूर (लेबर) थे और 6 अधिकारी सुपरविजन (निगरानी) का काम कर रहे थे. सुपरविजन कर रहे सभी 6 लोग सुरक्षित बाहर निकल आए थे, लेकिन 22 मजदूर अचानक आए मलबे में बुरी तरह दब गए. रेस्क्यू टीमों ने दिन-रात एक करके इनमें से 12 मजदूरों को जिंदा बाहर निकाल लिया है. बेहद दुखद रूप से 7 मजदूरों की जान जा चुकी है और उनके शव बरामद कर लिए गए हैं. अभी भी 3 मजदूर लापता हैं, जिनकी तलाश की जा रही है.
खराब मौसम और मलबा बना रेस्क्यू में बाधा
अधिकारियों ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्र में खराब मौसम राहत और बचाव कार्य में सबसे बड़ी बाधा बन रहा है. टनल के भीतर भारी मात्रा में मलबा और पानी जमा हो गया है, जिसे बाहर निकालने का काम लगातार जारी है. प्रशासन को उम्मीद है कि जैसे ही टनल से मलबा और पानी कम होगा, रेस्क्यू कार्य में तेजी आएगी और बचे हुए लापता मजदूरों तक पहुंचने में कामयाबी मिलेगी.





















