चमोली में जंगल की आग बुझाते समय हादसा, खाई में गिरने से फायर वॉचर की मौत
Uttarakhand Fire News: घटना उस समय हुई जब वह वन विभाग की टीम के साथ मिलकर जंगल में लगी आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहा था.इस हादसे ने पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ा दी है.

उत्तराखंड के चमोली जिले में बदरीनाथ हाईवे के पास जंगल की आग बुझाने के दौरान एक दर्दनाक हादसे में फायर वॉचर (अग्नि प्रहरी) की जान चली गई. यह घटना उस समय हुई जब वह वन विभाग की टीम के साथ मिलकर जंगल में लगी आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहा था. इस हादसे ने पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ा दी है और एक बार फिर ऐसे जोखिम भरे कामों में लगे कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
जानकारी के अनुसार, चमोली जिले के बदरीनाथ हाईवे के समीप जंगलों में आग लगी हुई थी. उत्तराखंड में इन दिनों कई स्थानों पर जंगलों में आग की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे वन विभाग की टीमें चौबीसों घंटे अलर्ट मोड में काम कर रही हैं. इसी कड़ी में संबंधित क्षेत्र में भी आग बुझाने के लिए फायर वॉचर और वन विभाग के कर्मचारियों को तैनात किया गया था.
खाई में गिरने से गयी जान
बताया जा रहा है कि टीम दुर्गम पहाड़ी इलाके में आग पर काबू पाने का प्रयास कर रही थी. क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति बेहद कठिन थी, जहां ऊंचाई, ढलान और फिसलन भरे रास्तों के कारण काम करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. इसी दौरान एक फायर वॉचर अचानक संतुलन खो बैठा और गहरी खाई में गिर गया. घटना इतनी अचानक हुई कि साथी कर्मचारियों को संभलने का मौका भी नहीं मिला.
घटना की जानकारी मिलते ही अन्य वनकर्मी और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और तुरंत रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया. कठिन परिस्थितियों के बीच काफी मशक्कत के बाद घायल फायर वॉचर को खाई से बाहर निकाला गया. उसे तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
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कर्मचारियों के लिए जोखिम भरी परिस्थिति
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह उजागर कर दिया है कि जंगलों में आग बुझाने वाले कर्मचारी कितनी कठिन और जोखिम भरी परिस्थितियों में काम करते हैं. सीमित संसाधनों, अपर्याप्त उपकरणों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के बीच ये कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर वन संपदा और पर्यावरण की रक्षा करते हैं. पहाड़ों में आग बुझाना न केवल शारीरिक रूप से कठिन है, बल्कि यह जानलेवा भी साबित हो सकता है.
स्थानीय लोगों और अधिकारियों ने मृतक के प्रति गहरा शोक व्यक्त किया है. साथ ही सरकार से यह मांग उठने लगी है कि ऐसे कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं. आधुनिक उपकरण, बेहतर प्रशिक्षण और सुरक्षा उपायों की व्यवस्था के साथ-साथ मृतक के परिवार को उचित मुआवजा देने की भी मांग की जा रही है.
उत्तराखंड में हर साल गर्मियों के मौसम में जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जिससे न केवल वन संपदा को भारी नुकसान होता है, बल्कि मानव जीवन भी खतरे में पड़ जाता है. यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि जंगलों में आग से निपटने के लिए बेहतर रणनीति और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके.
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Source: IOCL

























