बस्ती में भर्ती घोटाला उजागर, अधिकारियों की मिलीभगत और फर्जी दस्तावेजों से टेंडर हासिल
Basti News In Hindi: आयुक्त की जांच रिपोर्ट के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए बस्ती मंडल के एडेड माध्यमिक विद्यालयों में 300 सेअधिक चतुर्थ श्रेणी पदों पर आउटसोर्सिंग के माध्यम से भर्ती होनी थी.

उत्तर प्रदेश के बस्ती मंडल में माध्यमिक शिक्षा विभाग के एडेड स्कूलों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया में एक बड़े संगठित भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है. मंडल आयुक्त अखिलेश सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय जांच ने लखनऊ की फर्म 'महिष इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड' द्वारा किए गए बड़े फर्जीवाड़े को बेनकाब कर दिया है. जांच रिपोर्ट में न केवल कंपनी के दस्तावेज जाली पाए गए, बल्कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत की भी पुष्टि हुई है.
मंडल आयुक्त की जांच रिपोर्ट के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए बस्ती मंडल के एडेड माध्यमिक विद्यालयों में 300 से अधिक चतुर्थ श्रेणी पदों पर आउटसोर्सिंग के माध्यम से भर्ती होनी थी. नियमानुसार, जिस कंपनी को यह टेंडर दिया गया था, उसने तकनीकी निविदा जीतने के लिए भारी जालसाजी का सहारा लिया.
इस घोटाले की जांच रिपोर्ट जैसे ही जेडी के पास पहुंचीं तो उन्होंने कंपनी का टेंडर तो निरस्त कर दिया मगर उसी कंपनी से कर्मचारियों को सैलरी देने का भी एक विवादित आदेश दे दिया जो अपने आप में कई सवाल खड़ा कर रहा है.
क्या है पूरा मामला ?
आयुक्त अखिलेश सिंह की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय जांच ने लखनऊ की फर्म महिष इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड के उस काले कारनामे को उजागर कर दिया है, जिसके जरिए जाली दस्तावेजों के दम पर करोड़ों का टेंडर हथियाया गया था. यह मामला बस्ती मंडल के एडेड माध्यमिक स्कूलों में वर्ष 2025-26 के लिए होने वाली चतुर्थ श्रेणी के 300 से अधिक पदों की भर्ती से जुड़ा है. जांच रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं.
संयुक्त विकास आयुक्त और कोषाधिकारी द्वारा की गई गहन पड़ताल में पाया गया कि महिष इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड ने टेंडर हासिल करने के लिए न केवल अपने अनुभव प्रमाण पत्रों के साथ छेड़छाड़ की, बल्कि कंपनी का टर्नओवर और बैंक गारंटी के लिए जमा की गई धरोहर राशि भी पूरी तरह फर्जी और जाली निकली. कंपनी ने बेहद शातिराना तरीके से कागजी हेरफेर कर खुद को योग्य साबित किया और विभाग की आंखों में धूल झोंककर यह बड़ा काम हासिल कर लिया.
लिपिक की मिलीभगत के सुबूत
जांच में संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) कार्यालय के एक बाबू आलोक की सीधी संलिप्तता और कंपनी के साथ गहरी मिलीभगत की पुष्टि हुई है. आरोप है कि विभाग के भीतर बैठे इस मददगार ने ही फर्जी दस्तावेजों को दरकिनार कर फाइल को आगे बढ़ाने और टेंडर फाइनल कराने में मुख्य भूमिका निभाई. यह खुलासा होते ही प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है क्योंकि 300 से अधिक पदों पर होने वाली इस भर्ती पर को निरस्त कर दिया गया और बेरोजगार युवाओं की उम्मीदों को गहरा झटका लगा है.
फर्जी दस्तावेजों का हुआ इस्तेमाल
संयुक्त विकास आयुक्त और कोषाधिकारी की संयुक्त जांच रिपोर्ट में गंभीर खामियां पाई गईं जिसमें कंपनी ने टेंडर हासिल करने के लिए जो कार्य अनुभव के दस्तावेज लगाए थे, वे सत्यापन के दौरान फर्जी मिले. निविदा की शर्तों को पूरा करने के लिए कंपनी ने अपने टर्नओवर के आंकड़ों में भारी हेरफेर की थी. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कंपनी द्वारा जमा की गई धरोहर राशि और बैंक गारंटी के दस्तावेज भी विभागीय जांच में संदिग्ध और जाली पाए गए.
जांच रिपोर्ट के संकेतों के अनुसार, यह फर्जीवाड़ा केवल कंपनी तक सीमित नहीं था. संयुक्त शिक्षा निदेशक (JD) कार्यालय के एक बाबू आलोक की इस पूरे सिंडिकेट में मुख्य भूमिका सामने आई है. आरोप है कि विभागीय बाबू ने कंपनी के साथ साठगांठ कर फर्जी दस्तावेजों को सही ठहराते हुए टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया. मंडल आयुक्त अखिलेश सिंह ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए पूरी भर्ती प्रक्रिया की शुचिता पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि महिष इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाए. फर्जीवाड़े में संलिप्त विभागीय कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई और विभागीय जांच बिठाई जाए.
चयन प्रक्रिया लटकी
बस्ती मंडल में 300 से अधिक बेरोजगार युवाओं को इस भर्ती से रोजगार मिलने की उम्मीद थी, लेकिन इस घोटाले के कारण अब पूरी चयन प्रक्रिया लटक गई है. प्रशासन अब नए सिरे से पारदर्शी तरीके से टेंडर आमंत्रित करने पर विचार कर रहा है, ताकि योग्य उम्मीदवारों के साथ न्याय हो सके. आयुक्त अखिलेश सिंह ने इस धोखाधड़ी को बर्दाश्त न करने के सख्त निर्देश दिए हैं. उन्होंने इस जालसाजी के जिम्मेदार कंपनी निदेशकों और विभाग के दोषी कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है. साथ ही, महिष इन्फोटेक को काली सूची में डालने और इस पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर नए सिरे से पारदर्शी जांच के घेरे में लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
कमिश्नर की इस कार्रवाई से भ्रष्टाचार में लिप्त ठेकेदारों और अधिकारियों के बीच खलबली मची हुई है. वहीं इस प्रकरण पर जब हमने संयुक्त निदेशक माध्यमिक शिक्षा आनंद कर पांडे से जब बात की गई, तो उन्होंने बताया कि कमिश्नर के निर्देश का पालन किया जा रहा है. जिस कंपनी को आउट सोर्स के कार्य मिला था उसकी शिकायत के बाद जांच हो रही थी और दोषी पाए जाने पर अब कार्यवाही अमल में लाई जा रही है. इस घोटाले में दोषी बाबू की जवाबदेही तय करने के सवाल पर जेडी ने चुप्पी साध ली और कहा मंडलायुक्त के निर्देश का अनुपालन कराया जा रहा है.
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Source: IOCL



























