PM मोदी ने ‘मन की बात’ में की बस्ती के युवाओं की तारीफ, 60 दिन की मेहनत से पुनर्जीवित हुई पौराणिक मनोरमा नदी
Basti News In Hindi: इस पूरे अभियान की नींव रखने वाले स्थानीय समाजसेवी आकाश गुप्ता बताते हैं कि मनोरमा नदी सिर्फ एक जलस्रोत नहीं, बल्कि बस्ती और पूर्वांचल की सांस्कृतिक विरासत है.

उत्तर प्रदेश के बस्ती से एक बेहद उत्साहित करने वाली खबर है, जिसने न सिर्फ जिले और प्रदेश बल्कि देश भर में चर्चा कर दी है. यहां युवाओं की टोली ने बिना किसी सरकारी सहायता के पौराणिक नदी मनोरमा को पुनर्जीवित कर दिया. जिसका जिक्र खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने 'मन की बात' एपिसोड में किया. उन्होंने इस भगीरथ प्रयास की सराहना करते हुए युवाओं के जज्बे को सलाम किया.
इस पूरे अभियान की नींव रखने वाले स्थानीय समाजसेवी आकाश गुप्ता बताते हैं कि मनोरमा नदी सिर्फ एक जलस्रोत नहीं, बल्कि बस्ती और पूर्वांचल की सांस्कृतिक विरासत है. समय के साथ यह नदी एक गंदे नाले में तब्दील हो चुकी थी. आकाश ने बचपन की यादों से जुड़ी इस नदी को तड़पते देखा, तो दो महीने पहले उन्होंने अकेले ही नदी में उतरकर कचरा साफ करना शुरू किया.
शुरुआत बेहद चुनौतीपूर्ण और हतोत्साहित करने वाली थी. नदी का पानी इतना प्रदूषित हो चुका था कि उसमें उतरते ही त्वचा संक्रमण का खतरा रहता था. पानी के भीतर जहरीले सांपों और बिच्छुओं का डर हर पल बना रहता था. शुरुआत में जब आकाश अकेले कचरा निकालते थे, तो राह चलते कुछ लोगों ने उनका मजाक भी उड़ाया. लेकिन आकाश का संकल्प डिगा नहीं. धीरे-धीरे उनकी इस निष्काम सेवा को देखकर स्थानीय युवाओं का ज़मीर जागा और देखते ही देखते 6 से 7 उत्साही युवाओं की एक कोर टीम तैयार हो गई.
60 दिनों से बनाया कदा नियम
युवाओं की इस टोली ने पिछले 60 दिनों से एक कड़ा नियम बनाया। हर दिन बिना नागा किए, सुबह और शाम के वक्त 4 से 5घंटे तक यह टीम नदी के भीतर गंदे पानी और कीचड़ में आकंठ डूबकर सफाई करती रही. टीम ने अपने हाथों से नदी के सीने को चीरकर प्लास्टिक की बोतलें, पॉलीथिन, भारी जलकुंभी और गाद निकालना शुरू किया. दो महीनों की इस अटूट तपस्या का परिणाम यह रहा कि नदी से लगभग 700 किलोग्राम से अधिक कचरा बाहर फेंका गया, कचरा साफ होने के साथ ही नदी के प्राकृतिक जल स्रोतों के मुहाने खुल गए और मनोरमा का पानी एक बार फिर साफ और निर्मल होने लगा.
आज स्थिति यह है कि जिस घाट पर लोग बदबू के कारण खड़े नहीं होते थे, वहां आज पानी इतना स्वच्छ हो चुका है कि स्थानीय लोग आस्था की डुबकी लगा रहे हैं और बेज़ुबान जानवर अपनी प्यास बुझा रहे हैं. इसी गांव के बीजेपी विधायक अजय सिंह भी अब इन युवाओं की मुहिम के साथ हो गए है, और उन्होंने नदी की सफाई भी की.
सोशल मीडिया के जरिए शुरू की मुहीम
आकाश गुप्ता और उनकी टीम ने इस अभियान को केवल नदी की सफाई तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने जमीनी स्तर पर काम करने के साथ-साथ डिजिटल और सोशल मीडिया को अपनी ताकत बनाया. टीम के सदस्य सफाई के दौरान बाकायदा वीडियो और तस्वीरें बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते थे, ताकि आम जनता को यह अहसास कराया जा सके कि हमारी लापरवाही से नदी किस कदर प्रभावित हो रही है.
जब स्थानीय मीडिया ने युवाओं के इस अनूठे प्रयास को प्रमुखता से देश के सामने रखा, तो यह खबर तेजी से वायरल हो गई. मीडिया के माध्यम से ही बस्ती के इन युवाओं की गूँज देश के नीति-नियंताओं और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंची, जिसके बाद आज प्रसारित हुए 'मन की बात' कार्यक्रम में इस बदलाव की कहानी को पूरे देश के सामने मिसाल के तौर पर पेश किया गया.
प्राचीन कथाओं में जिक्र है नदी का
मनोरमा नदी का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली है. स्थानीय मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मनोरमा नदी का सीधा संबंध भगवान श्रीराम और अयोध्या की धार्मिक सांस्कृतिक परंपराओं से रहा है. बुजुर्ग बताते हैं कि एक दौर था जब इस नदी के किनारे भव्य घाट, प्राचीन मंदिर और वर्षभर बड़े-बड़े धार्मिक अनुष्ठान व मेले हुआ करते थे.
नदी का जल इतना पवित्र माना जाता था कि लोग इसे घरों में पूजनीय कार्यों के लिए रखते थे. लेकिन बीते कुछ दशकों में हुए अवैध अतिक्रमण, गाद जमने और शहरी कचरे के सीधे प्रवाह ने इस पौराणिक नदी का अस्तित्व ही संकट में डाल दिया था. युवाओं के इस प्रयास ने अब एक बार फिर बुजुर्गों की आँखों में मनोरमा के पुराने स्वरूप को लौटने की उम्मीद जगा दी है.
बीजेपी विधायक भी अब आगे आए
स्थानीय बीजेपी विधायक अजय सिंह कई साल पहले नदी की सफाई को लेकर अभियान चला चुके है, मगर कुछ दिन बाद हालात जस के तस हो गए, वही आकाश की टीम ने अब नदी सफाई का बीड़ा उठाया है, आकाश ने कहा कि नदी को मरते देखना अपनी संस्कृति को मरते देखने जैसा था. इसलिए उनकी टीम ने तय किया कि हम सरकार या प्रशासन के भरोसे बैठकर सिर्फ शिकायत नहीं करेंगे.
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