Basti News: बस्ती में चरागाह की जमीन का फर्जी पट्टा, कब्जा रोकने के लिए 100 साल पुरानी जमीन पर लेटे ग्रामीण
Basti News In Hindi: बस्ती के बगही गांव में भू-माफियाओं और राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से चरागाह की जमीन का फर्जी पट्टा कराने का मामला सामने आया है. ग्रामीणों ने जमीन पर लेटकर विरोध जताया है.

उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद से सरकारी जमीन को खुर्द-बुर्द करने और फर्जी पट्टा कर भू-माफियाओं को बेचने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. मामला सदर तहसील के ग्राम बगही (बेनीपुर) का है, जहां राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से सैकड़ों साल पुरानी 'घास कला' (चरागाह) की आरक्षित भूमि को निजी हाथों में सौंप दिया गया. जमीन पर कब्जा होने से बचाने के लिए ग्रामीणों ने अनोखा विरोध प्रदर्शन किया और 100 साल पुरानी उस विवादित जमीन पर लेट गए. मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम ने जांच बैठा दी है.
अभिलेखों में हेरफेर कर बंजर में बदली गई चरागाह की जमीन
ग्रामीणों और ग्राम पंचायत प्रतिनिधि विपेंद्र सिंह के अनुसार, गाटा संख्या 510 सरकारी दस्तावेजों में 'घास कला' यानी सार्वजनिक चरागाह के रूप में दर्ज थी. उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश अधिनियम (धारा 132) और राजस्व संहिता (धारा 77) के तहत ऐसी जमीन का पट्टा या आवंटन किसी निजी व्यक्ति को नहीं किया जा सकता. बावजूद इसके, तत्कालीन लेखपालों ने 1384 फसली के दौरान इसका खाता समाप्त कर इसे 'बंजर' श्रेणी में डाल दिया. इसके बाद बिना किसी वैध आदेश के, बगल के गांव के निवासी कोमल के नाम 2 बीघा जमीन दर्ज कर दी गई.
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वरासत, डीएम की फर्जी परमिशन और बैनामे का खेल
- वरासत: पट्टेदार कोमल की मृत्यु के बाद यह जमीन वरासत के जरिए हरीराम (पुत्र भेजू) के नाम दर्ज हुई.
- फर्जी परमिशन: हरीराम अनुसूचित जाति से है, इसलिए वह बिना डीएम की अनुमति के अपनी जमीन गैर-अनुसूचित जाति को नहीं बेच सकता. आरोप है कि अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर डीएम का परमिशन भी ले लिया गया.
- बैनामा और खारिज-दाखिल: इसके बाद इस जमीन का बैनामा ग्राम चिलवनिया निवासी साहबराम यादव की पत्नी पुष्पा देवी के पक्ष में करा दिया गया और सांठगांठ कर खारिज-दाखिल भी हो गया.
- खसरे में फर्जी फसल: राजस्व कर्मियों ने साजिश के तहत खसरे में हर वर्ष गेहूं और धान की फसल दर्ज की, जबकि हकीकत में उस जमीन पर मोटे पेड़ और जंगल हैं और वहां कभी खेती हुई ही नहीं.
हरे पेड़ों पर चली जेसीबी, तो भड़के ग्रामीण
विवाद तब गहरा गया जब भू-माफिया पक्ष साहबराम यादव ने उक्त गाटा संख्या 510स/3 पर वन विभाग द्वारा पूर्व में रोपे गए सैकड़ों हरे-भरे पेड़ों को जेसीबी से खुदवाना शुरू किया और जमीन पर जबरन कब्जा करने का प्रयास किया. इसकी सूचना मिलते ही भारी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए. उन्होंने काम रुकवाया और जमीन पर लेट कर विरोध जताना शुरू कर दिया. विवाद बढ़ने पर गायघाट चौकी और पुलिस भी मौके पर पहुंची.
ग्रामीणों की जिलाधिकारी से प्रमुख मांगें
- गाटा संख्या 510 को दोबारा उसके मूल स्वरूप यानी 'घास कला' के रूप में दर्ज किया जाए.
- 1384 फसली के समय से चले आ रहे समस्त फर्जी पट्टों, अवैध बैनामों, खारिज-दाखिल और फर्जी खसरे को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए.
- मौके पर मौजूद पेड़-पौधों को खसरे में दर्ज कर पर्यावरण की रक्षा की जाए.
- मुख्य आरोपी साहबराम यादव और फर्जीवाड़ा करने वाले राजस्व कर्मियों के खिलाफ जालसाजी का मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाए.
- भूमि प्रबंधन समिति के सदस्य विपेंद्र सिंह, ग्रामीण रामचंद्र, बाबूराम और इंद्रजीत सहित दर्जनों ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे दोबारा डीएम के पास गुहार लगाएंगे.
SDM का बयान: दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
इस पूरे प्रकरण पर एसडीएम (सदर) हिमांशु कुमार ने कहा, "ग्रामीणों का शिकायत पत्र प्राप्त हुआ है. एक जांच टीम गठित कर दी गई है जो अभिलेखों की गहनता से पड़ताल कर रही है. जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. सरकारी जमीन पर किसी को भी कब्जा नहीं करने दिया जाएगा."























